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दिशोम गुरु शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन, CM हेमंत सोरेन ने दी मुखाग्नि

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज / मुकेश भारतीय। झारखंड के दिग्गज आदिवासी नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से विख्यात शिबू सोरेन आज मंगलवार 5 अगस्त 2025 को अपने पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत नेमरा में पंचतत्व में विलीन हो गए।

उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी, जबकि छोटे बेटे बसंत सोरेन ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। इस दौरान हजारों समर्थकों, नेताओं और आम जनता ने नम आँखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।

शिबू सोरेन, जिन्हें झारखंड की जनता ‘दिशोम गुरु’ के रूप में सम्मान देती थी, उन्होंने 81 वर्ष की आयु में 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी और हाल ही में हुए स्ट्रोक से जूझ रहे थे।

उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन एक शिक्षक थे जिनकी महाजनों द्वारा हत्या के बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़कर सामाजिक न्याय की लड़ाई शुरू की।

शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन को नई दिशा दी। धनकटनी आंदोलन और महाजनों-सूदखोरों के खिलाफ उनके अभियानों ने आदिवासी समुदाय को एकजुट किया।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में उन्होंने न केवल बिहार से अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए संघर्ष किया, बल्कि आदिवासी समाज को शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित किया।

वे तीन बार (2005, 2008, 2009) झारखंड के मुख्यमंत्री बने। हालांकि वे कभी भी पूर्ण कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। इसके अलावा वे आठ बार लोकसभा सांसद और तीन बार राज्यसभा सांसद रहे। साथ ही केंद्र में कोयला मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं।

शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर 4 अगस्त की शाम को विशेष विमान से दिल्ली से रांची लाया गया। रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उनके पार्थिव शरीर को पहले मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर ले जाया गया, जहाँ रात भर आम जनता, मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी अंतिम दर्शन के लिए उमड़े।

मंगलवार सुबह 9 बजे उनके पार्थिव शरीर को झारखंड विधानसभा परिसर में रखा गया, जहाँ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

दोपहर में उनकी अंतिम जोहार यात्रा रांची से रामगढ़ जिले के नेमरा गांव के लिए रवाना हुई। नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार दोपहर 3 बजे संपन्न हुआ।

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत कई अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेता मौजूद रहे।

शिबू सोरेन के निधन से झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राज्य सरकार ने 4 से 6 अगस्त तक तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया, जिसके दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा और कोई राजकीय समारोह आयोजित नहीं हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सर गंगाराम अस्पताल जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में ऊंचाइयों को छुआ।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता के निधन पर भावुक संदेश में कहा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूँ।”

उनकी बहू सीता सोरेन ने भी एक्स पर लिखा, “बाबा सिर्फ हमारे घर के मुखिया नहीं थे…वे हमारे जीवन के प्रकाश थे।” अन्य नेताओं जैसे रघुबर दास, बाबूलाल मरांडी और सुदेश महतो ने भी उनकी अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त किया।

शिबू सोरेन का निधन झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में झामुमो ने न केवल आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा की, बल्कि झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान दिलाई। उनके संघर्षों ने झारखंड के संथाल आदिवासी समुदाय को सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त किया।

नेमरा गांव में उनके अंतिम संस्कार के दौरान हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के दिलों में बसे एक प्रेरणास्रोत थे। उनकी विरासत को उनके बेटे हेमंत सोरेन और झामुमो कार्यकर्ता आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।

दिशोम गुरु की यह अंतिम जोहार यात्रा न केवल एक व्यक्ति का अंत थी, बल्कि एक ऐसे नेता की विदाई थी, जिसने झारखंड को नई दिशा दी।

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मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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