मुंगेर/बेगूसराय (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला तेज होता दिख रहा है। एक ही दिन में दो बड़ी कार्राइयों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली कार्रवाई में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के प्रशाखा प्रभारी सह पेशकार मुकेश कुमार को 1.70 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरी कार्रवाई में बेगूसराय जिले के मंसूरचक प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और एक डीलर को 12 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा गया।
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी जमीन और जन वितरण प्रणाली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रष्टाचार किस हद तक जड़ें जमा चुका है।
सरकारी जमीन के विवाद में मांगी थी 5 लाख की घूसः जानकारी के अनुसार मामला बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के पंचवीर गांव का है। यहां लगभग तीन कट्ठा चार धूर सरकारी जमीन पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा करने और बेचने की साजिश का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में पंचायत के पूर्व मुखिया नंदकिशोर प्रसाद सुमन ने न्याय के लिए मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में मामला दर्ज कराया था। शिकायत में गांव के ही मो. जावेद पर सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था।
जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो आयुक्त न्यायालय में कार्यरत पेशकार मुकेश कुमार ने कथित रूप से शिकायतकर्ता से उसके पक्ष में फैसला दिलाने के बदले 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।
निगरानी टीम ने बिछाया जालः पीड़ित ने इस पूरे मामले की शिकायत सीधे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से कर दी। जांच के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया।
गुरुवार दोपहर जैसे ही पेशकार मुकेश कुमार ने शिकायतकर्ता से 1.70 लाख रुपये की पहली किस्त ली, उसी समय निगरानी टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद टीम उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे प्रकरण में अन्य अधिकारियों की भी कोई भूमिका है या नहीं।
बेगूसराय में बीएसओ और डीलर भी घूस लेते पकड़े गएः इसी दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई बेगूसराय जिले में हुई। यहां निगरानी ब्यूरो ने मंसूरचक प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) शैलेंद्र कुमार और एक राशन डीलर विद्या सागर को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। शैलेंद्र कुमार फिलहाल मंसूरचक में पदस्थापित हैं और भगवानपुर प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे।
बताया जाता है कि रिश्वत की यह रकम किसी काम के बदले मांगी गई थी। निगरानी टीम ने दोनों को मंसूरचक थाना क्षेत्र के नवटोल गांव के पास सड़क किनारे से गिरफ्तार किया।
भ्रष्टाचार पर लगातार कार्रवाई, लेकिन सवाल कायमः एक ही दिन में दो अलग-अलग मामलों में अधिकारियों के पकड़े जाने से यह साफ संकेत मिलता है कि प्रशासनिक व्यवस्था के कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की समस्या गहरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी जमीन के मामलों में अक्सर फर्जी कागजात, दलालों का नेटवर्क और अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती रहती है। वहीं जन वितरण प्रणाली (PDS) में भी शिकायतें आम हैं। हालांकि लगातार हो रही निगरानी की कार्रवाई से यह उम्मीद जरूर जगी है कि भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
क्या कहता है यह पूरा मामलाः इस पूरे घटनाक्रम से तीन अहम बातें सामने आती हैं कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। न्यायिक प्रक्रियाओं में भी रिश्वतखोरी की कोशिशें व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैं। निगरानी एजेंसियों की सक्रियता से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संभव है।


