नालंदा के मघड़ा शीतला मंदिर में भगदड़: 8 महिलाओं की मौत, कई गंभीर; प्रशासनिक लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। नालंदा जिले के मघड़ा गांव में चैत्र माह के आखिरी मंगलवार को माता शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर बड़ा हादसा हो गया। प्राचीन मघड़ा शीतला मंदिर में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक भगदड़ में बदल गई, जिसमें 8 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 10 से 12 श्रद्धालु घायल हो गए। घायलों को तत्काल बिहारशरीफ के मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसे के बाद मंदिर परिसर से लेकर अस्पताल तक मातम का माहौल पसरा रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। कई बच्चे अपनी मां को पुकारते नजर आए, वहीं पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर परिवार के लोग सिर पीटते और विलाप करते दिखे।

प्रशासन ने एहतियातन मंदिर परिसर और उससे जुड़े मंगला मेले को तत्काल बंद करा दिया है। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और मेला समिति की टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रही।

अब तक दो मृतकों की पहचान हो चुकी है। इनमें सकुन्त बिहार निवासी दिनेश रजक की पत्नी रीता देवी (50 वर्ष) और नूरसराय के मथुरापुर निवासी कमलेश प्रसाद की पत्नी रेखा देवी (45 वर्ष) शामिल हैं।

रेखा देवी के पुत्र ने बताया कि उनकी मां मेला देखने और माता के दर्शन के लिए गई थीं। सूचना मिलते ही परिवार अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सभी मृतक महिलाएं बताई जा रही हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा था। शीतला अष्टमी के अवसर पर परंपरा के अनुसार लोग एक दिन पहले बना ठंडा भोजन माता को चढ़ाने आते हैं। इसी वजह से हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भीड़ अपेक्षा से कहीं अधिक थी, लेकिन मंदिर परिसर छोटा होने और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति बिगड़ गई।

बताया जा रहा है कि अचानक दर्शन को लेकर धक्का-मुक्की शुरू हुई, जिसके बाद अफवाह और अफरा-तफरी फैल गई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और देखते ही देखते भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि समय रहते भीड़ नियंत्रण और बैरिकेडिंग की व्यवस्था होती तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

हादसे के बाद प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संयोग से उसी दिन नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम भी था।

जिले का अधिकांश पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था नहीं की गई थी।

मघड़ा स्थित यह प्राचीन शीतला माता मंदिर बिहारशरीफ से लगभग 5 किलोमीटर दूर पंचाने नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख आस्था केंद्र है। मान्यता है कि यहां माता सती के शरीर का एक अंग गिरा था। शीतला अष्टमी के अवसर पर यहां तीन दिवसीय मेला लगता है, जिसमें बिहार ही नहीं, बल्कि नेपाल और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को आपदा प्रबंधन विभाग से 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये, यानी कुल 6 लाख रुपये प्रति मृतक देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के समुचित इलाज का निर्देश भी दिया गया है।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों में बार-बार सामने आ रही लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, मेडिकल टीम, इमरजेंसी प्लान और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती अब अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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