Home जरा देखिए झारखंड में ब्लैकलिस्टेड कंपनी बिहार में कर रही ऑनलाइन परीक्षा संचालन!

झारखंड में ब्लैकलिस्टेड कंपनी बिहार में कर रही ऑनलाइन परीक्षा संचालन!

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में ऑनलाइन परीक्षा के आयोजन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कुम्हरार स्थित बापू परीक्षा केंद्र में एक एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं ने छात्रों और शिक्षा संगठनों में चिंता पैदा कर दी है। यह वही एजेंसी है जिसे झारखंड सरकार ने दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

अगस्त 2025 में झारखंड सेवा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मई 2025 में आयोजित दंत चिकित्सा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा में एजेंसी की लापरवाही सामने आई। इसके बाद आयोग ने एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। परिणामस्वरूप कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

हालांकि, दिसंबर 2024 में बिहार में बापू परीक्षा केंद्र के लिए इस एजेंसी को ठेका दिया गया। तब से इस केंद्र पर कई परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं। इनमें एलआईसी, बीआरएलपीएस जीविका, आरआरबी एनटीपीसी ग्रेजुएट व अंडर ग्रेजुएट, एसटीईटी और सक्षमता परीक्षा चतुर्थ शामिल हैं। 24 सितंबर 2025 तक इन परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है।

देशभर में पिछले चार महीनों से एसएससी की ऑनलाइन परीक्षाएं चल रही हैं, और बिहार में ये निजी ऑनलाइन केंद्रों पर आयोजित हो रही थीं। बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन एसोसिएशन ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है।

उनका कहना है कि अधिकृत कंपनी ने बिहार में ऑनलाइन परीक्षा संचालन के लिए 30 कंपनियों का चयन किया था, जबकि कथित ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को टेंडर देकर प्राथमिकता दी जा रही है।

एसएससी के नियमों के अनुसार इन केंद्रों में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता होनी चाहिए। चार महीने तक 30 केंद्रों पर परीक्षा संपन्न हुई, लेकिन अब एजेंसी मार्च तक की परीक्षाओं को बापू परीक्षा केंद्र में आयोजित करना चाहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निजी केंद्रों को प्रति कंप्यूटर तीन शिफ्ट के लिए 115 रुपए मिलते हैं, जबकि बापू परीक्षा केंद्र में प्रति कंप्यूटर 300 रुपए भुगतान किया जा रहा है, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।

हालांकि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर का कहना है कि बापू परीक्षा केंद्र में ऑनलाइन परीक्षा के लिए टेंडर निकाला गया था और उसी प्रक्रिया के तहत एजेंसी को छह साल का ठेका मिला। एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की हमें कोई जानकारी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऑनलाइन केंद्र का विस्तार करते समय कथित एजेंसी को अलग रखा जाएगा, ताकि अन्य कंपनियों को भी अवसर मिल सके।

शिक्षा विशेषज्ञों और छात्रों का कहना है कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी द्वारा परीक्षा संचालन से परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न उठ सकते हैं। वे मांग कर रहे हैं कि ऐसे कंपनियों को परीक्षा संचालन से दूर रखा जाए और सभी टेंडर पारदर्शी तरीके से हों।

बिहार में ऑनलाइन परीक्षा का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन इस विवाद ने साफ कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली में निगरानी और पारदर्शिता की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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