Home अपराध नालंदा महिला उत्पीड़न कांड: SIT गठित, ADG ने बताया पूरा मामला

नालंदा महिला उत्पीड़न कांड: SIT गठित, ADG ने बताया पूरा मामला

Social Media Privacy Violation Also Under Probe in Nalanda Case
Bihar Police Cracks Down on Harassment, Arrests Eight in NURSARAI Case

पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि अपराध करने वालों के साथ-साथ अपराध को बढ़ावा देने वाले या पीड़िता की गरिमा से खिलवाड़ करने वाले लोग भी कानून के दायरे में आएंगे…

पटना/नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र में शादीशुदा महिला के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है।

कमजोर वर्ग के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. अमित कुमार जैन ने घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि इसमें शामिल किसी भी आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

मीडिया से बातचीत में एडीजी ने कहा कि पीड़िता की गरिमा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस इस मामले में न केवल मुख्य आरोपियों बल्कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई करेगी।

घटना की पृष्ठभूमि और प्राथमिकीः पुलिस के अनुसार यह घटना 26 मार्च की शाम करीब सात से आठ बजे के बीच नूरसराय थाना क्षेत्र में घटी। घटना के अगले दिन 27 मार्च को नूरसराय थाना कांड संख्या 194/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

इस मामले में अशोक यादव, मतलु महतो उर्फ नवनीत कुमार और रविकांत कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक पीड़िता के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास का आरोप इन लोगों पर लगाया गया है।

मामले की जांच के लिए एसआईटी गठितः घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच की पारदर्शिता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एक महिला पुलिस पदाधिकारी को अनुसंधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एडीजी डॉ. जैन ने बताया कि पीड़िता का बयान न्यायालय में दर्ज कराया जा चुका है, जिसमें छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास की पुष्टि हुई है। हालांकि पीड़िता ने चिकित्सीय जांच कराने से इनकार किया है, जिससे जांच की दिशा में तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई हैं।

कानूनी धाराएं और अब तक की कार्रवाईः जांच के दौरान मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अतिरिक्त धाराएं 70(1) और 62 जोड़ी गई हैं। इसके साथ ही आईटी एक्ट की धारा 67 और 67ए भी लागू की गई हैं।

अब तक पुलिस की कार्रवाई में दो नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक आरोपी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। वीडियो फुटेज के आधार पर छह अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार अभी भी चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

मोबाइल फोन जब्त, फॉरेंसिक जांच शुरूः पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों को डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि घटना से जुड़े वीडियो, फोटो या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल सबूत इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर पहचान उजागर करने वालों पर कार्रवाईः एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि पीड़िता की पहचान उजागर करना या उससे संबंधित आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर अपराध है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में साइबर थाना में कांड संख्या 81/26 और 82/26 (दिनांक 1 अप्रैल) दर्ज कर लिया गया है। इन मामलों में BNS की धारा 72(1), 353(2) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

बहरहाल, नालंदा की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में पीड़ित की पहचान उजागर करना और घटना को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति जांच और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

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