बिहारः मंत्री ने रिश्वतखोर CO को जनकल्याण संवाद मंच से ही हटाया, मचा हड़कंप!
जनसंवाद कार्यक्रम में मंच पर ही डिजिटल सबूत पेश, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने आमस अंचलाधिकारी को तत्काल हटाया

पटना/बोधगया (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क)। बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति का असर अब जमीनी स्तर पर भी खुलकर दिखने लगा है। बोधगया स्थित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रम के दौरान उस समय सनसनी फैल गई, जब डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आमस अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) अरशद मदनी को रिश्वतखोरी के आरोप में तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। मंत्री के इस निर्णय से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई और पूरा माहौल कुछ देर के लिए स्तब्ध हो गया।
शिकायतें सुनने पहुंचे मंत्री, मंच बना जन अदालत
कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों की जमीन, दाखिल-खारिज, सीमांकन और राजस्व से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान करना था। डिप्टी सीएम खुद मंच पर बैठकर फरियादियों की बातें सुन रहे थे। जैसे-जैसे शिकायतें सामने आती गईं, माहौल गंभीर होता चला गया। आमस अंचल से जुड़े मामलों की बारी आते ही लोगों में नाराजगी खुलकर दिखी।
एक बुजुर्ग फरियादी ने भावुक होकर कहा कि जब दर्द हद से गुजर जाता है, तब आवाज खुद-ब-खुद निकलती है। इस पर मंत्री ने कहा कि जनता की पीड़ा ही सरकार की प्राथमिकता तय करती है और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंच पर दिखा डिजिटल सबूत, हॉल में छा गया सन्नाटा
जनसुनवाई के दौरान आमस के रहने वाले सुमंत कुमार ने सीओ पर 25 हजार रुपये घूस लेने का आरोप लगाया। उन्होंने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाया, बल्कि मोबाइल से यूपीआई लेन-देन का रिकॉर्ड भी दिखाया। जैसे ही स्क्रीन पर ट्रांजेक्शन डिटेल्स सामने आईं, सभागार में सन्नाटा छा गया।
इसके बाद अन्य ग्रामीणों ने भी ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई, जिनमें कथित तौर पर पैसे की मांग की बातें सुनाई दे रही थीं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने तत्काल राजस्व विभाग के प्रधान सचिव और गया के जिलाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया।
तत्काल आदेश: पद से हटे अधिकारी, अधिकार भी सीज
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने मौके पर ही घोषणा की कि संबंधित सीओ को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए और उनके सभी प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाएं। साथ ही उनके खिलाफ शोकॉज नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया गया।
मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि “सरकार की छवि खराब करने वाले अधिकारियों के लिए प्रशासन में कोई जगह नहीं है। जनता को परेशान करना अब महंगा पड़ेगा।”
अन्य मामलों पर भी चला सख्ती का डंडा
कार्रवाई यहीं तक सीमित नहीं रही। आमस अंचल के कई अन्य आवेदकों प्रदीप कुमार मिश्रा, राणा रंजीत सिंह और विशुनदेव ठाकुर ने भी जमीन विवाद और दाखिल-खारिज में गड़बड़ी की शिकायतें रखीं।
मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मामलों का निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाए। उन्होंने कहा कि अब फाइलें दबाकर रखने या अनावश्यक दौड़ लगाने की परंपरा खत्म होगी।
भूमि सुधार अभियान को मिल सकती है नई दिशा
गया जिले सहित पूरे बिहार में भूमि विवाद एक बड़ी समस्या रहे हैं। ऐसे में इस तरह के जनसंवाद कार्यक्रम सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं।
मौके पर मौजूद लोगों ने मंत्री की कार्रवाई की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि ऐसी सख्ती नियमित होनी चाहिए। यदि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बनी रहती है तो इससे आम लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश, जनता में बढ़ा विश्वास
यह घटना सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि डिजिटल सबूत और जन शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह त्वरित फैसले होते रहे तो राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी लगाम लगाई जा सकती है।
आम लोगों से अपील: आवाज उठाइए, समाधान पाइए
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे अपनी समस्याएं दबाकर न रखें, बल्कि सरकार द्वारा आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में खुलकर सामने आएं। सरकार का दावा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।
बोधगया की यह घटना अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है और इसे प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क के लिए मुकेश भारतीय की रिपोर्ट










