T20 World Cup controversy: विश्व कप ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर बमके कीर्ति आजाद, बोले इशान किशन
After the T20 World Cup victory, taking the trophy to a Hanuman temple in Ahmedabad sparks controversy as Kirti Azad raises questions and Ishan Kishan dismisses the debate.

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। भारत की टी-20 विश्व कप जीत के बाद जश्न के बीच एक नया विवाद (T20 World Cup controversy) खड़ा हो गया है। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रतिनिधियों द्वारा विश्व कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आजाद ने कड़ी नाराज़गी जताई है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और खेल जगत में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
दरअसल टी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव, टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और जय शाह विश्व कप ट्रॉफी के साथ हनुमान मंदिर अहमदाबाद पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीत के लिए आभार व्यक्त किया। लेकिन इस कदम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
कीर्ति आजाद का तीखा सवालः पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान में सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए टीम के इस कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि टीम इंडिया पर शर्म आती है कि विश्व कप ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थल से जोड़ दिया गया।
उन्होंने अपने पोस्ट में 1983 के विश्व कप का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कपिलदेव की कप्तानी में भारत ने 1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था, तब टीम में हर धर्म के खिलाड़ी थे और जीत को पूरे देश की उपलब्धि माना गया था।
कीर्ति आजाद ने सवाल उठाया कि यदि ट्रॉफी मंदिर ले जाई जा सकती है, तो मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा क्यों नहीं? उनका कहना था कि भारतीय टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है और यह जीत सभी धर्मों के लोगों की है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसः कीर्ति आजाद के बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय उपलब्धियों को किसी एक धर्म से जोड़ना उचित नहीं है। वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इसे खिलाड़ियों की निजी आस्था बताते हुए विवाद को अनावश्यक करार दिया।
कई क्रिकेट प्रशंसकों का कहना है कि खिलाड़ियों का किसी धार्मिक स्थल पर जाना उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय है और इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़कर विवाद खड़ा करना ठीक नहीं है।
ईशान किशन ने टाला विवादः इधर विश्व कप जीतने के बाद भारत लौटे युवा विकेटकीपर बल्लेबाज इशान किशन से जब पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने इस विवाद पर सवाल किया तो उन्होंने इसे महत्वहीन बताते हुए कहा कि अभी टीम ने शानदार विश्व कप जीता है और सवाल उसी से जुड़े होने चाहिए।
ईशान किशन ने कहा कि मैं अभी इतना शानदार वर्ल्ड कप जीतकर आया हूं। आप अच्छे सवाल पूछिए। कैसा लग रहा है, खिताब जीतकर कितना मजा आया। यह पूछिए। किसी ने क्या कहा, उस पर मैं क्या कहूं।
खेल और आस्था के बीच संतुलन की बहसः यह पूरा विवाद एक बड़े सवाल को भी जन्म देता है। क्या राष्ट्रीय खेल उपलब्धियों को धार्मिक प्रतीकों से जोड़ना उचित है या नहीं? भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में यह मुद्दा अक्सर संवेदनशील बन जाता है।
हालांकि खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों की निजी आस्था और राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर रास्ता है।
फिलहाल यह विवाद बयानबाजी और सोशल मीडिया की बहस तक सीमित है, लेकिन इससे यह साफ है कि भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं, पहचान और सामाजिक विमर्श का भी बड़ा माध्यम बन चुका है। समाचार स्रोतः एक्सपर्ट मीडिया न्यूज/मीडिया रिपोर्टस्





