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डीडी के स्वर्णिम युग की आवाज सरला माहेश्वरी नहीं रहीं, लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र की अनोखी श्रद्धांजलि

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। हिंदी पत्रकारिता और दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की एक अहम और विश्वसनीय आवाज़ सरला माहेश्वरी अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनका निधन केवल एक वरिष्ठ पत्रकार का जाना नहीं, बल्कि उस युग की विदाई है जब समाचार संयम, भाषा की शुद्धता और तथ्यनिष्ठ प्रस्तुति के लिए पहचाने जाते थे।

सोशल मीडिया पर उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत के प्रसिद्ध लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार भावुक हो उठे। उन्होंने अपनी विशेष कला के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक अद्भुत कलाकृति तैयार की।

लीफ आर्ट के जादूगर मधुरेंद्र ने पांच घंटे की कठिन साधना के बाद मात्र 3 सेंटीमीटर के पीपल के हरे पत्ते पर सरला माहेश्वरी की अत्यंत सूक्ष्म और जीवंत तस्वीर उकेरी। इस अनूठी कलाकृति के साथ उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में लिखा- “अलविदा सरला माहेश्वरी”। उनकी यह कलाकृति देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इसे भावभीनी श्रद्धांजलि बताया।

मधुरेंद्र कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बचपन के दिनों में सरला माहेश्वरी देश की सबसे लोकप्रिय समाचार वाचिकाओं में से एक थीं। उन्होंने अत्यंत सौम्य, गरिमामय और विश्वसनीय अंदाज में समाचार प्रस्तुत कर दर्शकों का विश्वास जीता। ब्लैक एंड व्हाइट टीवी युग में भी उन्होंने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से इतिहास रचा।

गौरतलब है कि सरला माहेश्वरी ने 1970 के दशक से लेकर 2005 तक पत्रकारिता जगत में सक्रिय भूमिका निभाई। उस दौर में लोग समाचार सुनने के लिए घरों में शांति से बैठते थे। उनकी रिपोर्टिंग में न शोर था, न उत्तेजना। बल्कि समाज और सत्ता के बीच संतुलित संवाद था।

आज जब टीवी पत्रकारिता पर टीआरपी की होड़ और शोर-शराबे का आरोप लगता है, ऐसे समय में सरला माहेश्वरी का कार्य और भी प्रासंगिक प्रतीत होता है। उनकी पत्रकारिता सत्य, संयम और संवेदना की मिसाल रही।

सरला माहेश्वरी का जाना दूरदर्शन के उस स्वर्णिम अध्याय का समापन है, जिसे आज भी “डीडी का स्वर्णिम युग” कहा जाता है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए पत्रकारिता का मानक बनी रहेगी।

समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्टस्

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