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रिंग रोड मुआवजा घोटाला: 4 जिलों में ACB की बड़ी कार्रवाई, DLO समेत 17 गिरफ्तार

Ring Road compensation scam: ACB takes major action in 4 districts, 17 arrested including DLO.

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में बहुचर्चित धनबाद रिंग रोड भू-अर्जन मुआवजा घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ चार जिलों में छापेमारी की। रांची, धनबाद, बोकारो और देवघर में तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में ACB ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी (DLO), अंचलाधिकारी, अमीन, कानूनगो, लिपिक, पैक्स पदाधिकारी, जमीन कारोबारी, बिचौलिये और एक अधिवक्ता तक शामिल हैं।

ACB मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार देर शाम चीफ एडीजी प्रिया दूबे के निर्देश पर विशेष रणनीति तैयार की गई थी। इसके तहत डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में करीब 25 टीमें गठित की गईं। महिला पुलिस पदाधिकारियों को भी टीम में शामिल किया गया। सुबह करीब तीन बजे एक साथ सभी ठिकानों पर छापेमारी शुरू की गई, जिसकी मॉनिटरिंग खुद ACB के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे थे।

पूर्व DLO और CO समेत कई अधिकारी गिरफ्तारः गिरफ्तार किए गए आरोपियों में धनबाद के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन कानूनगो मिथिलेश कुमार, सहायक लिपिक अनुपमा कुमारी, तत्कालीन अमीन शंकर प्रसाद दूबे, तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) विशाल कुमार, तत्कालीन अमीन उमेश महतो, पैक्स से जुड़े पदाधिकारी और कई निजी व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा जमीन दलाल आलोक बरियार उर्फ जैंकी लाला, फर्जी जमीन मालिक बताने वाले बप्पी राय उर्फ गोपीराम चौधरी और धनबाद व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता सुशील प्रसाद की गिरफ्तारी ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

फर्जी रिकॉर्ड से करोड़ों का मुआवजा हड़पा गयाः ACB की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार के तहत रिंग रोड निर्माण के लिए किए गए भू-अर्जन में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई।

आरोप है कि स्थानीय बिचौलियों और जमीन कारोबारियों की मदद से फर्जी जमीन रिकॉर्ड तैयार किए गए। असली रैयतों को मुआवजा देने के बजाय फर्जी मालिक खड़े कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान करा लिया गया।

2016 से चल रही थी जांच, अब हुआ बड़ा खुलासाः इस मामले में धनबाद ACB थाना में वर्ष 2016 में तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी लाल मोहन नायक और उदयकांत पाठक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में एक और केस दर्ज हुआ। जांच के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक लेन-देन और गवाहों के बयान के आधार पर ACB को पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद यह समन्वित कार्रवाई की गई।

कई मौजों में नियमों की खुली अनदेखीः शिकायत के अनुसार दुहाटांड़, मनईटांड़, ढोखरा, तिलाटांड़, धैया, भेलाटांड़, पंड्रा समेत कई मौजों में रिंग रोड, विस्थापित कॉलोनी, बीआईटी विस्तार, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और मैथन राइट थर्मल पावर परियोजना के लिए हुए भू-अर्जन में सरकारी प्रक्रियाओं को ताक पर रखा गया। बिना वैधानिक जांच और सत्यापन के भुगतान कर दिया गया।

पूछताछ जारी, और गिरफ्तारियों के संकेतः चारों जिलों में छापेमारी के बाद सभी संदिग्धों को पूछताछ के लिए ACB कार्यालय लाया गया। पूछताछ के दौरान उनकी संलिप्तता से जुड़े ठोस साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तारी की गई।

ACB अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इस कार्रवाई के बाद झारखंड में भू-अर्जन से जुड़े पुराने मामलों पर भी जांच की आंच तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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