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राजगीर दिगंबर जैन धर्मशाला मामला: 4 तीर्थयात्रियों की मौत से सुरक्षा पर उठे सवाल

राजगीर दिगंबर जैन धर्मशाला
धर्मशाला के कमरे से दुर्गंध आने के बाद खुला राज, चारों शव मिलने से मचा हड़कंप

नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल राजगीर में दिगंबर जैन धर्मशाला से सामने आई चार तीर्थयात्रियों की रहस्यमयी मौत ने न सिर्फ प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि पर्यटन व्यवस्था, धर्मशालाओं की सुरक्षा और ठहराव नियमों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेंगलुरु से आए एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

शुक्रवार की सुबह जब धर्मशाला के एक कमरे से तेज दुर्गंध आने लगी, तो प्रबंधन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में किवाड़ तोड़कर कमरे को खोला गया, जहां चारों के शव बरामद किए गए। इसके बाद पूरे परिसर को सील कर जांच शुरू कर दी गई।

जांच का दायरा बढ़ा, कई एजेंसियां मैदान में

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अंतरराज्यीय समन्वय, फॉरेंसिक परीक्षण, डीआईयू जांच और ठहराव व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। एसपी भारत सोनी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। इसी क्रम में पटना से एफएसएल, डीआईयू टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया है। चारों शवों का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराने का निर्णय लिया गया है।

कमरे से मिले दस्तावेज, नींद की गोलियां

प्रशासन के अनुसार मृतक परिवार ग्रामीण बेंगलुरु के नागसेन्द्रा क्षेत्र का निवासी था और चारों सदस्य एक ही परिवार के थे। कमरे से आधार कार्ड, पैन कार्ड, अन्य दस्तावेज, कुछ नकद राशि और नींद की गोलियां बरामद की गई हैं। कमरे का दरवाजा अंदर और बाहर से बंद पाया गया, जिससे शुरुआती तौर पर किसी बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले हैं।

हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियां पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक विश्लेषण के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकालने की बात कह रही हैं।

धर्मशालाओं की व्यवस्था पर सख्ती की तैयारी

इस घटना के बाद प्रशासन ने धर्मशालाओं और ट्रस्ट के माध्यम से संचालित ठहराव स्थलों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। धर्मशाला का रजिस्ट्रेशन पंजी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

एसपी भारत सोनी ने स्पष्ट किया कि जिस तरह होटलों में ठहरने वाले यात्रियों के लिए पहचान पत्र की छायाप्रति अनिवार्य होती है, उसी तरह धर्मशालाओं में भी नियम लागू करने की दिशा में पहल की जाएगी। इसके लिए ट्रस्टियों और प्रबंधकों से संवाद कर एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।

एसआईटी का गठन, कर्नाटक भेजी जाएगी टीम

मामले की गहन जांच के लिए पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम में डीएसपी सुनील कुमार सिंह, राजगीर अंचल निरीक्षक संजय कुमार, जिला आसूचना प्रभारी आलोक कुमार, गिरियक अंचल निरीक्षक सुमंत कुमार, राजगीर थानाध्यक्ष रमण कुमार, सहायक निरीक्षक नेहा कुमारी, नवीन कुमार और परि-अपर निरीक्षक भानु प्रताप सिंह को शामिल किया गया है।  मामले की पृष्ठभूमि और पारिवारिक तथ्यों की पुष्टि के लिए दो सदस्यीय टीम को कर्नाटक भेजने की भी तैयारी की जा रही है।

मृतकों की पहचान और यात्रा की पृष्ठभूमि

धर्मशाला प्रबंधन के अनुसार संबंधित कमरा जी. आर. प्रसाद के नाम से बुक कराया गया था। मृतकों की पहचान जीआर सुमंगला (78 वर्ष), रत्नबाला राजु जीएन, शिल्पा जीआर (48 वर्ष), श्रुथा जीबी (43 वर्ष) एवं जीआर नागा प्रसाद (50 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी कर्नाटक के तुमकुर जिले के गुब्बी (ग्रामीण) थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

धर्मशाला प्रबंधन के मुताबिक चारों तीर्थयात्री 31 जनवरी को नेपाल भ्रमण के बाद राजगीर पहुंचे थे और यहां से पावापुरी जाने की योजना थी। धर्मशाला रजिस्टर में एक पुरुष तीर्थयात्री का आधार नंबर दर्ज है, लेकिन उसकी छायाप्रति उपलब्ध नहीं है।

प्रशासन अलर्ट, सवालों के घेरे में व्यवस्था

घटना के बाद एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता और डीएसपी सुनील कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे और स्थिति की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

फिलहाल राजगीर दिगम्बर जैन धर्मशाला की यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेंगी कि यह मामला सामूहिक आत्महत्या था या इसके पीछे कोई और रहस्य छिपा है।

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