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युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का सहायक निदेशक 5 लाख लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

पार्किंग में कार के अंदर चल रही थी डील, निगरानी ने बिछाया जाल

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। राजधानी पटना के नियोजन भवन में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब निगरानी ब्यूरो की टीम ने युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सहायक निदेशक परमजय सिंह को पांच लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी नियोजन भवन के उत्तर दिशा स्थित पार्किंग में खड़ी उनकी कार के अंदर हुई, जहां खुलेआम रिश्वत की रकम का लेन-देन चल रहा था।

सूत्रों के मुताबिक परमजय सिंह पार्किंग में अपनी निजी कार में बैठकर रिश्वत की राशि ले रहे थे। पहले से तैयार निगरानी टीम ने जैसे ही तय संकेत मिला, तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे नियोजन भवन परिसर में हड़कंप मच गया।

घर से 15 लाख से अधिक नकद, अहम दस्तावेज बरामद

गिरफ्तारी के बाद निगरानी ब्यूरो ने आरोपी के कंकड़बाग स्थित आवास पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान अब तक 15 लाख रुपये से अधिक नकद, निवेश से जुड़े कई अहम कागजात और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। निगरानी सूत्रों के अनुसार तलाशी की कार्रवाई अब भी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।

10 लाख की डील, बड़े अधिकारी का नाम भी आया सामने

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई, जब आवंटन के बदले 10 लाख रुपये की मांग के खुलासे में निदेशक नियोजन एवं प्रशिक्षण का नाम भी सामने आया। निगरानी सूत्रों का दावा है कि आवंटन से जुड़े इस पूरे खेल में सिर्फ सहायक निदेशक ही नहीं, बल्कि ऊपर के स्तर से भी वसूली का दबाव बनाया जा रहा था।

उप निदेशक की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले की शुरुआत मुजफ्फरपुर के सिद्धार्थनगर निवासी और विभाग में उप निदेशक ओम प्रकाश की शिकायत से हुई। उन्होंने निगरानी ब्यूरो को बताया था कि उनके नए व्यवसाय के तहत 26 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के लिए वेतन, कार्यालय व्यय और मशीन उपस्कर मद में आवंटन से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाई गई थी। योजना के तहत कुल 2 करोड़ 69 लाख 40 हजार 208 रुपये 50 पैसे का आवंटन होना था।

शिकायत के अनुसार परमजय सिंह ने अपने कार्यालय कक्ष में बुलाकर बताया कि कार्यालय व्यय मद में 84 लाख 95 हजार रुपये और मशीन उपस्कर मद में 85 लाख 35 हजार रुपये, यानी कुल 1 करोड़ 70 लाख 30 हजार रुपये का आवंटन निर्गत किया गया है।

आवंटन के बदले मांगी जा रही थी मोटी रिश्वत

निगरानी ब्यूरो के अनुसार इसी आवंटन के एवज में निदेशक नियोजन एवं प्रशिक्षण के निर्देश पर सभी संबंधित लोगों से मिलकर 10 लाख रुपये की रिश्वत वसूले जाने की मांग की जा रही थी। शिकायत की सत्यता की जांच कराई गई, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।

डीएसपी के नेतृत्व में बिछा जाल

पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार-1 के नेतृत्व में निगरानी ब्यूरो की धावादल टीम गठित की गई। तय रणनीति के अनुसार, आरोपी को पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपये लेते हुए मौके पर ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

फिलहाल निगरानी ब्यूरो पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची हुई है और आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

स्रोत : एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क

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