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Tuesday, January 26, 2021

94000 शिक्षकों की बहाली पर हाई कोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने बिहार के प्रारंभिक स्कूलों में बड़े पैमाने पर होनेवाली शिक्षक बहाली प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सितंबर तक जवाब तलब किया है

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया के नियमों में बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शिक्षक बहाली पर फिलहाल रोक लगा दी है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 4 सितबंर तय की है और प्रारम्भिक शिक्षक बहाली प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार को 4 सितंबर तक जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का भी आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने नीरज कुमार सहित 71 सीटीईटी परीक्षा पास उम्मीदवारों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में करीब 94 हजार शिक्षक पदों पर नियुक्ति तीन माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। विभाग ने 31 अगस्त को चयनित शिक्षकों को नियोजन पत्र देने की घोषणा की थी।

शिक्षा विभाग ने बकायदा प्रारंभिक शिक्षकों के नियोजन का संशोधित शेड्यूल भी जारी कर दिया था। नये शिड्यूल के जरिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से 18 माह का सेवाकालीन डिप्लोमा इन एलिमेन्ट्री एजुकेशन (डीईएलएड) कोर्स कर चुके टीईटी पास अभ्यर्थियों को आवेदन करने का मौका सरकार ने दिया। 

शिक्षक नियोजन को लेकर 15 जून से ही गतिविधियां आरंभ हो गईं थी। 12 अगस्त तक मेधा सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाना था। जबकि 31 अगस्त को चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच कर नियोजन पत्र देना का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 

यह भी उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने पिछले साल 94,000 प्रारंभिक शिक्षकों की भर्ती के लिए नोटिफेशन जारी किया था। इन पदों के लिए एनआइओएस से डीएलएड कोर्स करनेवाले निजी स्कूलों के शिक्षकों ने भी आवेदन किया।

सरकार ने एनसीटीई से पूछा कि ये आवेदक इस भर्ती के लिए योग्य हैं या नहीं। इसके जवाब में एनसीटीई ने कोर्स को अयोग्य करार दिया था।

इसके बाद निजी स्कूलों में पढ़ानेवाले शिक्षकों ने पटना हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। कोर्ट ने एनसीटीई के पात्रता नियमों को गलत बताते हुए शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने के योग्य करार दिया था।

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