जानें कैसे खुला JSSC CGL पेपर लीक का असल राज, क्या है नालंदा-पटना कनेक्शन?

“JSSC CGL पेपर लीक का मामला न केवल प्रतियोगिता परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि सिस्टम में सुधार की आवश्यकता पर भी सवाल उठाता है। अभ्यर्थी अब न्याय की मांग कर रहे हैं और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं…
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की JSSC CGL पेपर लीक का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा की गई गहन जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह मामला न केवल झारखंड बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड मोनू गुर्जर फिलहाल उत्तर प्रदेश के झांसी जेल में बंद है। उसने अपने नेटवर्क के जरिए इस साजिश को अंजाम दिया। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार मोनू के सहयोगी बिहार के नालंदा निवासी संजीव कुमार और पटना के अतुल वत्स ने मिलकर झारखंड और आसपास के राज्यों में पेपर कोचिंग संचालकों और उम्मीदवारों तक पहुंचाया।
ऐसे हुआ पेपर लीक-खुलासाः 28 जनवरी को आयोजित होने वाली परीक्षा का प्रश्न पत्र 26 जनवरी को ही अभ्यर्थियों को मिल चुका था। रिपोर्ट में बताया गया है कि गिरोह ने यह पेपर 3 लाख रुपए से 20 लाख रुपये तक में बेचा। लखीसराय के इंग्लिश टोला निवासी अभिषेक राज ने अपने दोस्त की मदद के लिए परीक्षा दिलवाई।
लेकिन जब उसे पेपर लीक की खबर मिली तो उसने परीक्षा रद्द कराने की चाल चली। उसने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रश्न पत्र और उत्तर की हस्तलिखित प्रतियां अपलोड कर दीं। लेकिन प्रश्न पत्र के साथ गलती से अभिषेक के दोस्त का बैंक डॉक्यूमेंट भी अपलोड हो गया। जिससे पुलिस को अहम सुराग मिला। इसी के चलते गिरोह के सदस्य गिरफ्तार हुए।
वहीं परीक्षा से पहले पटना के कच्ची तालाब इलाके में उम्मीदवारों को बुलाया गया और उन्हें उत्तर रटवाए गए। एसआईटी को सबूतों के रूप में छह मोबाइल फोन, वॉट्सएप चैट, टेलीग्राम पर प्रसारित आंसर-की और परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए प्रश्न पत्र की तस्वीरें मिलीं।
यही नहीं, उसके बाद जनवरी में रद्द हुई परीक्षा को 21 और 22 सितंबर को फिर से आयोजित किया गया। लेकिन इसमें भी कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके चलते झारखंड हाईकोर्ट ने परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी। वहीं पुलिस ने अभ्यर्थियों से सबूत मांगे। जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रातू पुलिस और डीएसपी हेडक्वार्टर ने अभ्यर्थियों को फोन कर सबूत जमा करने का निर्देश दिया। यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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