
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। एक ओर हेमंत सरकार केंद्र पर राशि आवंटन में सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाती रही है तो दूसरी ओर चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मिली भारी-भरकम राशि खर्च ही नहीं हो सकी है। सरकारी आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि योजनाओं की गति कागजों में तेज, लेकिन जमीन पर बेहद सुस्त है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड को केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु कुल 2,222.35 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान मिला। लेकिन अब तक मात्र 419 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। यानी कुल बजट का सिर्फ 18.86 प्रतिशत। शेष 81.14 प्रतिशत राशि अब भी अप्रयुक्त है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में ‘शून्य जैसी’ प्रगतिः
सबसे अधिक आवंटन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 761.29 करोड़ रुपये का है। परंतु हैरानी की बात यह है कि अब तक केवल 0.04 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। यह खर्च कुल आवंटन का नगण्य अंश है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आजीविका और स्वास्थ्य योजनाओं की भी सुस्त रफ्तारः
ग्रामीण सशक्तिकरण की महत्वपूर्ण योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 198.20 करोड़ रुपये आवंटित हैं, परंतु खर्च महज 0.90 करोड़ रुपये हुआ है।
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 285.25 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें से लगभग 72.77 करोड़ रुपये (करीब 26 प्रतिशत) ही खर्च किए जा सके हैं।
शिक्षा और नगर विकास में भी पिछड़ापनः
स्कूली शिक्षा और साक्षरता मद में 215.65 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 15.09 करोड़ रुपये (लगभग 7 प्रतिशत) खर्च हुए हैं। नगर विकास विभाग को मिले 365.85 करोड़ रुपये में से 65.50 करोड़ रुपये ही उपयोग में लाए जा सके हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में या तो प्रशासनिक सुस्ती है या फिर प्रक्रियागत अड़चनें।
1.33 लाख करोड़ का अनापत्ति प्रमाण पत्र लंबितः
महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) केंद्र सरकार को उपलब्ध नहीं कराया है। यही वह बड़ा कारण माना जा रहा है, जिसकी वजह से नई किस्तों का आवंटन और प्रस्तावों की स्वीकृति अटकी हुई है।
भारत सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रणाली एसएनए स्पर्श (Single Nodal Agency–System for Planning and Reconciliation of Spending for Health Schemes) लागू की है। इस प्रणाली के तहत जब तक पूर्व में दी गई राशि का उपयोग प्रमाण (NOC) अपलोड नहीं किया जाता, तब तक नई राशि जारी नहीं की जाती।
राज्य सरकार द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण योजनाओं के प्रस्ताव एसएनए स्पर्श पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप राशि आवंटन और व्यय की प्रक्रिया में लगातार विलंब हो रहा है।
सवालों के घेरे में प्रशासनिक जवाबदेहीः
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब असली सवाल यह है कि यदि राशि का उपयोग ही नहीं हो पा रहा, तो फिर केंद्र पर भेदभाव का आरोप किस हद तक उचित है? विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय, समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र और डिजिटल प्रक्रियाओं की समझ बेहद जरूरी है।
जब तक प्रशासनिक ढांचा चुस्त नहीं होगा, तब तक कागजों पर आवंटित हजारों करोड़ की राशि आम जनता तक पहुंचने में देर ही होती रहेगी।
समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय/मीडिया रिपोर्ट





