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    Saturday, April 13, 2024
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      झारखंडः राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए आदित्य साहू और महुआ मांजी

      राँची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। राज्यसभा चुनाव 2022 के लिए भाजपा के आदित्य साहू और झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गयी हैं। विधानसभा के प्रभारी सचिव सह रिटर्निंग अफसर सैयद जावेद हैदर द्वारा दोनों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की गयी और दोनों को जीत का प्रमाण पत्र दिया गया।

      मालूम हो कि झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना था। दो सीटों के लिए दो प्रत्याशी ने ही नामांकन किया था। नामांकन के साथ ही दोनों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित थी।

      शुक्रवार को नाम वापसी का आखिरी दिन था। किसी भी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने दोनों के निर्वाचित होने की घोषणा की।

      महेश पोद्दार और मुख्तार अब्बास नकवी की सीट हुई थी खालीः भाजपा से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार और मुख्तार अब्बास नकवी का कार्यकाल पूरा होने से झारखंड में राज्यसभा की दो सीटें खाली हुई थीं।

      दोनों सांसदों का कार्यकाल 7 जुलाई को समाप्त हो रहा है। झारखंड में राज्यसभा के छह सीट हैं। इस बार एक सीट भाजपा के कोटे में आयी है और एक सीट झामुमो के कोटे में गयी है। इस तरह झारखंड से राज्यसभा में भाजपा की एक सीट कम हो गयी।

      चौथी बार निर्विरोध चुने गये प्रत्याशीः राज्यसभा चुनाव को लेकर पूर्व में झारखंड की खूब बदनामी हुई है। झारखंड एक ऐसा प्रदेश है जहां राज्यसभा चुनाव में वोट के बदले नोट मामले में एक मंत्री को बर्खास्त भी किया जा चुका है। अर्जुन मुंडा सरकार में भू राजस्व मंत्री मधु सिंह को बर्खास्त किया गया था।

      इसके बाद भी कई बार झारखंड को थैलीशाहों ने अपना चरागाह बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। राज्यसभा चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी के पास से करोड़ों रुपये आयकर विभाग ने पकड़े थे। दर्जनों विधायकों और लगभग आधे दर्जन मंत्रियों के यहां राज्यसभा चुनाव में पैसे के लेन देन को लेकर सीबीआइ का छापा भी पड़ा था।

      लेकिन यह भी सच्चाई है कि इसी झारखंड से चार बार राज्यसभा के लिए निर्विरोध प्रत्याशी भी चुने गये हैं। वर्ष 2014 के बाद यह पहला मौका है जब झारखंड से राज्यसभा के लिए प्रत्याशी निर्विरोध चुन कर उच्च सदन जायेंगे।

      यहां पहली बार वर्ष 2004 में निर्विरोध निर्वाचन हुआ थातब भाजपा के यशवंत सिन्हा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्टीफन मरांडी अपने-अपने दल के प्रत्याशी थे।

      दूसरी बार वर्ष 2006 में कांग्रेस के उम्मीदवार माबेल रेबेलो और भाजपा के प्रत्याशी एसएस अहलुवालिया निर्विरोध निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद वर्ष 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी और राजद के प्रेमचंद गुप्ता उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।

      प्रधानमंत्री के एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करूंगा : आदित्य साहू

      राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद भाजपा प्रत्याशी आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीगृह मंत्री अमित शाहभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित केंद्रीय और प्रदेश चुनाव समिति के सभी सदस्यों व प्रदेश नेत्तृत्व के प्रति आभार जताया।

      उन्होंने कहा कि भाजपा ही देश में एकमात्र पार्टी है जहां मंडल स्तर से उठे एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा तक पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि देश पिछले आठ वर्षों से एक मजबूत हाथों में हैजिसका लोहा पूरा विश्व मान रहा है। भाजपा के एक सच्चे सिपाही की तरह प्रधानमंत्री के कार्यों को आगे ले जायेंगे।

      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करेंगे। जीत का प्रमाण पत्र मिलने के बाद आदित्य साहू भावुक भी हो गये। कहा कि सपने में भी नहीं सोचा था कि पार्टी मुझे इतना सम्मान देगी। पार्टी से प्राप्त इस सम्मान के लिए हमेशा ऋणी रहेंगे। उन्होंने भाजपा विधायकों के साथ आजसू के विधायकों को भी समर्थन देने के लिए आभार प्रकट किया।

      झामुमो ने बेटी को दिया सम्मानसदन में बनूंगी बेटियों की आवाज : महुआ

      राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद झामुमो प्रत्याशी महुआ माजी ने पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेनपार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित पार्टी के सभी विधायकों और राजद विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया।

      कहा कि गुरुजी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के उच्च सदन में झारखंड की बेटी को प्रतिनिधित्व करने का गौरवशाली मौका दिया है। देश के उच्च सदन में पार्टी द्वारा दी गयी बेटी के सम्मान को जाया नहीं जाने दूंगी और बेटियों की आवाज बनूंगी।

      उन्होंने कहा कि झारखंड से 22 वर्षों में कभी भी स्थानीय नारी शक्ति को देश के उच्च सदन में भेजने की दिशा में किसी भी पार्टी ने काम नहीं किया था। एक बार कांग्रेस पार्टी से एक महिला को राज्यसभा भेजा गया था लेकिन वो स्थानीय नहीं थीं।

      गुरुजी और हेमंत जी झारखंड के स्थानीय के दर्द को समझते हैं। दोनों नेताओं और पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने एक स्थानीय महिला पर विशवास किया है और उच्च सदन में झारखंड की आवाज को बुलंद करने का मौका दिया है।

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