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सम्राट चौधरी को लेकर जन सुराज का X पर बड़ा धमाका, कांप उठी भाजपा

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हंगामा मच गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर उर्फ पीके के समर्थन में संचालित एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल @PK_for_CM ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर ऐसा ‘खुलासा’ किया है, जो पूरे राज्य को हिला सकता है। थ्रेड में पीके ने चौधरी की उम्र, नाम, शिक्षा और आपराधिक इतिहास पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने लिखा है कि सम्राट चौधरी का ये राज आपको हिलाकर रख देगा। पूरी थ्रेड पढ़िए। यह हमला बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जब NDA सरकार पर भ्रष्टाचार और अक्षमता के आरोप लग रहे हैं। क्या यह चौधरी के राजनीतिक करियर का बड़ा झटका साबित होगा? आइए, इस थ्रेड के आधार पर विस्तार से समझते हैं कि कैसे एक ‘फर्जीवाड़ेबाज’ नेता बिहार का दूसरा सबसे बड़ा पद संभाल रहा है।

उम्र का रहस्य: बड़ा भाई से भी ‘बुजुर्ग’ कैसे बने सम्राट? सबसे चौंकाने वाला आरोप है सम्राट चौधरी की उम्र पर। जन सुराज ने तंज कसा कि क्या आपकी उम्र कभी अपने बड़े भाई से अधिक हो सकती है? कभी नहीं। लेकिन बिहार तो बिहार है।

थ्रेड के मुताबिक चौधरी की उम्र उनके बड़े भाई से भी ज्यादा दर्ज है, जो एक हास्यास्पद विडंबना है। आधिकारिक दस्तावेजों में चौधरी 16 नवंबर 1968 को जन्मे बताए जाते हैं, लेकिन पुराने रिकॉर्ड्स में यह 1980 के आसपास का है। विकिपीडिया और अन्य स्रोतों के अनुसार 2024 में उनकी उम्र 54 वर्ष बताई गई है, लेकिन 1999 में राज्यपाल द्वारा जन्मतिथि विवाद के चलते उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था।

उस समय चौधरी के पास तीन अलग-अलग उम्रें थीं। जन्म प्रमाणपत्र में 34 वर्ष, मतदाता सूची में 32 वर्ष और 1995 के हलफनामे में मात्र 15 वर्ष। चुनावी हलफनामों में तो यह और उलझा।

वर्ष 2005 में 26 वर्ष, 2010 में 28 वर्ष और 2020 में अचानक 51 वर्ष! यानी, 5 साल में 2 वर्ष बढ़े, लेकिन 10 साल में 23 वर्ष कैसे जुड़ गए? पीके का सवाल बिल्कुल सटीक है कि 1 साल में किसी की उम्र 7 साल कैसे बढ़ सकती है?। यह फर्जीवाड़ा 1999 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बनने के लिए किया गया, जहां न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। नाबालिग साबित करने के बाद एक साल में ही 18 से 25 वर्ष हो गए।

यह विवाद नया नहीं है। 2025 में ही, लाइवमिंट और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स में प्रशांत किशोर ने फिर से इस पर सवाल उठाए, दावा किया कि चौधरी ने उम्र हेरफेर कर मंत्री पद हासिल किया।

नामों का जाल: राकेश से सम्राट तक, जेल बचाने का ‘ट्रिक’? उम्र के साथ नाम बदलना भी चौधरी का पुराना खेल रहा। थ्रेड में पीके ने खुलासा किया कि जन्म के समय नाम ‘राकेश कुमार’ था। फिर ‘राकेश कुमार मौर्य’, ‘सम्राट चंद्र मौर्य’ और अंत में ‘सम्राट चौधरी’। सवाल वाजिब है कि कोई सामान्य व्यक्ति अपना नाम और जन्मतिथि इतनी बार क्यों बदलेगा? जवाब: जेल से बचने के लिए। यह सब 1998 के एक हत्याकांड से जुड़ा है।

बिहार के कांग्रेस नेता सदानंद सिंह की बैठक में बम विस्फोट से उनकी हत्या हो गई, जिसमें 6 अन्य लोग भी मारे गए। चौधरी के पिता शकुनी चौधरी (7 बार विधायक-सांसद और पूर्व मंत्री) के परिवार और सदानंद के बीच पुरानी राजनीतिक दुश्मनी थी। सम्राट पर आरोप लगा कि उन्होंने हमलावरों को बम मुहैया कराया। इस केस में वे 6 महीने जेल में रहे। बचने के लिए 1995 का हलफनामा दिखाया, जिसमें खुद को 15 वर्ष का नाबालिग बताया। परिणामस्वरूप केस से नाम हट गया। लेकिन यही झूठ बाद में गले की हड्डी बना।

स्टार्सअनफोल्डेड जैसी साइट्स पर भी उनके नाम बदलाव का जिक्र है, जो राजनीतिक सफर के साथ जुड़ा है। 1990 में लालू प्रसाद के RJD से शुरूआत की। 1999 में मंत्री बने। 2014 में RJD से विद्रोह कर 13 विधायकों को ले BJP में शामिल हुए। आज वे BJP के OBC चेहरा हैं, लेकिन यह अतीत उनके लिए बोझ बन रहा है।

शिक्षा का झूठ: 7वीं फेल से D.Litt. तक का ‘चमत्कार’? थ्रेड का एक और धमाका शिक्षा पर है। 2020 के हलफनामे में चौधरी ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से D.Litt. (डॉक्टरेट) की डिग्री का दावा किया। लेकिन @PK_for_CM पर जन सुराज का तर्क है कि ऐसा कोई विश्वविद्यालय अमेरिका में है ही नहीं!।

ऊपर से हाईकोर्ट को दिए बयान में स्वीकार किया कि वे बिहार बोर्ड की 10वीं में फेल हो गए थे। 2010 के हलफनामे में खुद को 7वीं पास बताया। प्रशांत किशोर ने हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में कहा कि बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सम्राट कुमार मौर्य मैट्रिक में फेल हुए। फिर D.Litt. कैसे?। उन्होंने चुनाव आयोग से 10वीं का सर्टिफिकेट मांगने की मांग की।

आपराधिक छवि और बिहार पर असर:  @PK_for_CM पर जनसुराज ने चौधरी को हत्या के आरोप में जेल जाने वाले, जमानत बचाने के लिए नाम-उम्र बदलने वाले, झूठी डिग्री लगाने वाले करार दिया। इसके अलावा पटना की सड़कों पर लड़कियां छेड़ने का भी जिक्र। इंडिया टुडे और अन्य रिपोर्ट्स में उनके विवादास्पद बयानों का उल्लेख है। जैसे 2021 में विधानसभा स्पीकर से झगड़ा। पिता शकुनी चौधरी के रसूख पर सवार होकर वे BJP का ‘बड़ा चेहरा’ बने, लेकिन अब ये फर्जीवाड़े बेनकाब हो रहे हैं।

बिहार के लिए यह अभिशाप है। राज्य पलायन, बेरोजगारी और शिक्षा की समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन ऐसे नेता सत्ता में हैं। @PK_for_CM पर अपील की है कि बिहार को चाहिए ऐसे नेता जो नाम-पद के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, रोजगार और पलायन सुलझाने के लिए काम करें।

क्या कहते हैं चौधरी? चुप्पी या जवाब? अभी तक सम्राट चौधरी या BJP की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन 2024 में लोकसभा चुनावों में BJP की सीटें घटने (17 से 12) के बाद सम्राट को ही राज्य अध्यक्ष पद से हटाया गया था। क्या यह थ्रेड NDA सरकार के लिए खतरे की घंटी है? बिहारवासी फैसला करेंगे।

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