राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर ‘चचा की चुप्पी’ बनी चर्चा

बिहार के सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी के भी लोग मायने निकालते हैं। इसका कारण है कि वे हमेशा तब बोलते हैं, जब लोग उनकी चुप्पी के कयास लगाते-लगाते थक जाते हैं। इस बार राम मंदिर भूमि पूजन के मौके पर भी वैसा ही देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उन्होंने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है….

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। वेशक आज 5 अगस्त की तारीख पूरे देश के लिए यादगार बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में जब राम मंदिर की आधारशिला रखी तो यह अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण था।

तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस मौके पर अपनी-अपनी तरफ से बधाई संदेश दिया। बीजेपी से लेकर कांग्रेस या फिर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने भी इस अवसर सबको बधाई दी लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से राम मंदिर भूमि पूजन पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बीजेपी शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्री ने उन्हें राम मंदिर भूमि पूजन पर अपनी तरफ से बधाई संदेश दिया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी राम मंदिर पर बधाई संदेश देते हुए जय श्री राम और जय बजरंगबली का उद्घोष भी किया।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बधाई संदेश में कहा कि राम मंदिर के निर्माण से ना केवल देश बल्कि दुनिया में भगवान राम की नीतियों का प्रचार प्रसार बढ़ेगा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राम मंदिर को लेकर कोई सीधा ट्वीट तो नहीं किया लेकिन उन्होंने हिंदू मुस्लिम सिख इसाई आपस में है भाई भाई वाला संदेश जरूर दिया। ममता का यह मैसेज पॉलिटिकल लाइन को दर्शाता है।

इधर, बीजेपी के सहयोगी होने के बावजूद नीतीश कुमार ने इस मामले पर चुप्पी साध ली। नीतीश कुमार ने राम मंदिर पर कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा।

न तो मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से और न ही नीतीश कुमार के ऑफिशियल टि्वटर हैंडल से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया आई है।

हालांकि नीतीश कुमार आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करते रहे, लेकिन अमूमन ऐसे मौकों पर उनके कार्यालय की तरफ से आधिकारिक प्रेस रिलीज जरूर आ जाता रहा, लेकिन कोई संदेश सामने नहीं आए।

सियासी जानकार यह मानते हैं कि नीतीश कुमार बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचना चाहते हैं, जो उन्हें विवादित लगता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भले ही फैसला दिया था, उसके बावजूद चुनाव के ठीक पहले इस पर प्रतिक्रिया देने से परहेज रखना चाहते हैं।

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