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    Friday, March 1, 2024
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      प्रबंध निदेशक और अभियंता के लूट-मनमानी का अड्डा बना झारखंड राज्य आवास बोर्ड

      “झारखंड राज्य आवास बोर्ड में लूट-खसोंट का दौर जारी है। इसे लेकर नामकुम के जितेन्द्र कुमार नामक व्यक्ति ने 16 मई, 2020 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राँची के पुलिस महानिदेशक को शिकायत भेजी थी, लेकिन एबीसी ने अब तक कोई सुध नहीं ली है...

      रांची, एक्सपर्ट मीडिया न्यूज (इंद्रदेव लाल)। झारखंड राज्य आवास बोर्ड, रांची के प्रबंध निदेशक ब्रजमोहन कुमार एवं सहायक अभियंता संजीव कुमार के द्वारा नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से अवैध आर्थिक लाभ लेने के लिए लूट का अड्डा बना दिया गया है।यहाँ सभी नियमों अधिनियमों को तोड़कर अपने हिसाब से काम किया जा रहा है। सरकारी कोष के अरबों रुपए बर्बाद करते हुए कई करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई है। यहाँ योजनाबद्ध तरीके से कुछ संवेदकों के साथ मिलकर अवैध कार्य जारी है।

      बिहार (झारखंड) राज्य आवास बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 16 में साफ अंकित है कि मुख्य अभियंता की नियुक्ति राज्य सरकार ही कर सकती है, आवास बोर्ड नहीं। लेकिन यहाँ पर प्रबंध निदेशक के द्वारा उसका उलंघन कर स्वार्थवश एक सोची समझी शाजिस के तहत मुख्य अभियंता अशोक राम की नियुक्ति अपने स्तर से किया है।

      इसका विरोध तत्कालीन आवास बोर्ड के सचिव निरंजन कुमार के द्वारा किया गया। मानदेय भुगतान पर भी रोक लगा दिया गया। साथ ही नगर विकास एवं आवास विभाग को संपुष्टि हेतु सूचित करवाया गया। जिसपर विभाग द्वारा आपत्ति करत् हुए नियुक्ति को अवैध करार दे दिया गया।

      श्री अशोक राम को फर्जी तरीके से मानदेय पर बहाल किया गया, जिसकी अवधि 20 सितंबर,2019 से 18 दिसंबर,2019 यानि 3 महीना में इनके द्वारा लगभग 5 करोड़ की निविदा का निष्पादन कमीशन लेकर किया गया। अशोक राम को भू-संपदा पदाधिकारी भी बोर्ड के एमडी द्वारा अवैध तरीका से बनाया गया था, भू संपदा पदाधिकारी का पद अपर समाहर्ता/उप सचिव स्तर का पद कार्मिक विभाग द्वारा चिन्हित किया गया है। इन पदों पर सरकार के द्वारा ही नियुक्ति का नियम है।

      यही नहीं, एमडी एवं एई के द्वारा फर्जी मुख्य अभियंता के माध्यम से 4 अक्टूबर,2019 को 27 करोड़ एवं 30 अक्टूबर,2019 को 18 करोड़ रुपए का एक ही माह में निविदा का निष्पादन करवा दिया गया है, जिसमें कई करोड़ रुपए की अवैध वसूली संवेदकों से एग्रीमेंट के नाम पर किया गया है। इसके अतिरिक्त और भी योजना का निष्पादन फर्जी मुख्य अभियंता के द्वारा अवैध राशि लेकर किया गया है।

      प्रबंध निदेशक एवं सहायक अभियंता के द्वारा मनचाहे कमाई के लिए नियमों को दरकिनार कर करोड़ो-करोड़ो की योजना को ऑफ लाइन (टेबल टेंडर) किया गया है, ताकि अपने चहेते संवेदकों को मनमाफिक रुपए लेकर टेंडर दिया जा सके। और ऐसा किया भी गया। मात्र दो संवेदक द्वारा निविदा प्राप्त कर चेंडर दिया गया है, जो कि पीडब्लूडी कोड का सरासर उलंघन है।

      जबकि झारखंड सरकार का वर्ष 2012 में ही पत्र निकल गया है कि 10 लाख रुपए से उपर की जो भी योजना होगी, उसका ऑनलाइन टेंडर होगा। ताकि अच्छे और उच्च क्वलिटी के संवेदक निविदा में भाग ले सकें। और योजना का लागत भी कम जा सकता है, जिससे सरकारी कोष की राशि बचेगी। लेकिन बोर्ड में तो 5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत ज्यादा में योजना दिया गया है।

      यानि कुल मिलाकर 17 प्रतिशत तक अधिक राशि प्रत्येक योजना में खर्च किया गया। 17 प्रतिशत के हिसाब से एक योजना में 17 लाख से 25 लाख तक अधिक राशि का व्यय किया गया। जो सरकारी कोष का दुरुपयोग है। विगत दो वर्षों में 15-20 करोड़ योजना लागत से अधिक राशि खर्च कर सरकारी राशि बर्बाद करके कमीशन लिया गया है।

      इसके आलावे करीव 100 करोड़ से ज्यादा की लगभग सौ योजना का ऑफ लाइन टेंडर करके एमडी एवं एई के द्वारा कमीशन लिया गया है। जबकि पहले भी हजारों फ्लैट-मकान बनाया गया है। उसपर मनचाहा रुपया लेकर अवैध तरीके से मनचाहे व्यक्ति को घूस दिया गया है। यहां सोची समझी साजिश के तहत मकानों पर अतिक्रमण करवा दिया गया है। यहाँ अतिक्रमण करने वालं व्यक्ति से अवैध तरीका से किराया की वसूली होती है, जिसका बंटबारा बोर्ड के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के बीच होता है। यह बहुत ही गंभीर मामला है।

      पीडब्लूडी कोड के अनुसार कोई भी योजना को तोड़-मरोड़ कर नहीं बनाया जा सकता है। यानि जो भी भवन (योजना) बनाना है, उसे एक बार में पारित करना है। लेकिन एमडी द्वारा मुख्यालय भवन, आवास बोर्ड कार्यालय हरमू मैदान के सामने जी प्लस टू का निर्माण अलग-अलग फ्लोर को अलग-अलग ऑफलाइन निविदा द्वारा 2-2 करोड़ की लागत से मात्र एक माह के अंदर ही ले लिया गया है।

      गंभीर सवाल यह भी है कि एक ही संवेदक कृपाशंकर साई कंस्ट्रशन कंपनी से मोटी रकम लेकर दो फ्लोर का पूर्ण कार्य दे दिया गया है। जबकि दूसरा तल्ला का बोर्ड बैठक का आदेश तात्कालीन सचिव निरंजन कुमार द्वारा नहीं दिया गया है। फिर भी एमडी एवं एई द्वारा दूसरा तल्ला के निविदा का निष्पादन करके उक्त संवेदक को दे दिया गया है। दूसरा तल्ला का निविदा अक्टूबर,2019 में बोर्ड की 60वीं बैठक कर लिया गया है।

      इस बैठक में हरमू रांची स्थित उच्च आय वर्गीय भूखंड संख्या-117 के बगल में अनावंटित छिटपुट भूखंड के आवंटन को लेकर निर्णय लिया गया। जबकि इस जमीन की लॉट्री होती तो लाखों की आमदनी होती।

      वहीं संवेदक कृपाशंकर को बचाने के लिए एचआईजी, जी प्लस थ्री की जगह जी प्लस फोर के निर्माण को सही ठहराने के लिए प्राक्कलन के विचलन से संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति देने को निर्णय दिया गया है। जो भी पीडब्लूडी कोड का घोर उलंघन है।

      इन दोनों कार्यों के आलावा भी दर्जनों निर्णय लिए गए हैं। ऐसे निर्णय बोर्ड के पदाधिकारियों के द्वारा सोची समझी साजिश के तहत व्यक्तिगत लाभ के लिए लिया गया है। अध्यक्ष के बिना बोर्ड की बैठक तब हुई, जब कोविड-19 लॉकडाउन के चलते कार्यालय नियमित रुप से नहीं चल पा रहा था। आम व्यक्ति या मीडिया को इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि कोरोना के डर से आदमी घर से बाहर नहीं निकल पा रहा था।

      सहायक अभियंता संजीव कुमार पिछले 7-8 सालों ले बोर्ड में प्रतिनियुक्ति पर हैं। वह पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर हैं। बोर्ड में इनके कार्यकाल के दौरान अब तक अरबों रुपए का नुकसान सरकारी कोष को पहुंचाया जा चुका है। वर्तमान में वे सहायक अभियंता के साथ-साथ पांच प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, मुख्य अभियंता के तकनीकी सलाहकार, प्रभारी मुख्य लेखा पदाधिकारी, प्रभारी भू-संपदा पदाधिकारी, प्रभारी राजस्व पदाधिकारी, प्रभारी भू-अर्जन पदाधिकारी आदि का काम देखा जा रहा है।

      इनके कार्यकाल में किए गए कार्यों की जांच इसलिए भी आवश्यक है कि बोर्ड में पदास्थापित होने के कुछ माह बाद ही हिनू में फ्लैट, रांची में जमीन, पटना स्थित बेली रोड में मॉल सहित कई चल-अचल संपति बनाई गई है। यह आय से अधिक संपति का भी मामला बनता है।

      प्रबंध निदेशक ब्रजमोहन कुमार के द्वारा भी कई करोड़ के चल-अचल संपति बनाई गई है। नामकुम में इनका खटाल है। जिसमें सैकड़ों गाय हैं। स्कूल चल रहा है। बॉटलिंग प्लांट आदि है। इनके द्वारा बोर्ड में रहते हुए एक ही दिन 3-3 सरकारी गाड़ियों से चलने और ईंधन के नाम पर लाखों रुपए की अवैध निकासी का मामला भी प्रकाश में आया है। इन पर भी आय से अधिक संपति का बड़ा मामला बनता है।

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