छपरा में फिर जहरीली शराब का साया: 2 दिन में हुई 6 मौतें, प्रशासन की सतर्कता पर सवाल
Saran District Reels from Suspected Poisonous Alcohol Cases, Officials Place Hospitals on High Alert

पटना / छपरा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में शराबबंदी के लगभग एक दशक बाद भी जहरीली शराब की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सारण जिले के मशरक और पानापुर इलाके से सामने आया है, जहां कथित तौर पर जहरीला पेय पीने से दो और लोगों की मौत हो गयी है। इसके साथ ही पिछले दो दिनों में संदिग्ध परिस्थितियों में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गयी है।
हालांकि पुलिस और प्रशासन ने अभी इन मौतों को सीधे जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार किया है और कहा है कि पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। लेकिन ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि मृतकों ने देसी या चुलाई शराब का सेवन किया था।
पुलिस कस्टडी में भी हुई एक आरोपी की मौतः मशरक थाना क्षेत्र के पूर्वी टोला गांव निवासी परशुराम महतो के 45 वर्षीय पुत्र रघुवर महतो को गुरुवार को पुलिस ने शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गयी। उसे तुरंत इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी।
प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उसकी मौत बीमारी, जहरीले पदार्थ या किसी अन्य कारण से हुई।
एक और व्यक्ति की संदिग्ध मौतः इसी दौरान मशरक थाना क्षेत्र के पूरब टोला निवासी पंकज सिंह की भी शुक्रवार को मौत हो गयी। ग्रामीणों के अनुसार मृतकों के परिवार और आसपास के कुछ लोगों ने कथित तौर पर शराब का सेवन किया था। इस घटना में बबन महतो और मिंटू महतो नामक दो अन्य लोग बीमार बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम नितेश कुमार और एएसपी राम पुकार सिंह छपरा सदर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से पूरे मामले की जानकारी ली। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच करायी जा रही है।
इलाके में दहशत, कई लोग निजी अस्पतालों में इलाज करा रहेः स्थानीय सूत्रों के अनुसार कई लोग बीमार होने के बावजूद निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, लेकिन उनके परिजन पुलिस या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस वजह से प्रशासन को आशंका है कि वास्तविक स्थिति सामने आने में समय लग सकता है।
चार वर्षों में डेढ़ सौ से अधिक मौतें: छपरा और आसपास के क्षेत्रों में चुलाई या नकली शराब का खतरा लगातार बना हुआ है। पिछले चार वर्षों में जिले में जहरीली या मिलावटी शराब पीने से 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
सबसे बड़ी त्रासदी वर्ष 2022 में सामने आयी थी, जब मशरक, पानापुर, तरैया, गड़खा, दरियापुर, मढ़ौरा और नगरा समेत कई क्षेत्रों में जहरीली शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस घटना में 72 लोगों की मौत हुई थी, जबकि स्थानीय लोगों का दावा था कि मरने वालों की संख्या करीब 100 के आसपास थी। उस घटना का असर पड़ोसी जिलों सीवान और गोपालगंज तक देखने को मिला था।
11 मार्च से शुरू हुई संदिग्ध मौतों की श्रृंखलाः इस बार की घटनाओं की शुरुआत 11 मार्च को मशरक के तख्त टोला निवासी संतोष महतो की मौत से हुई।
परिजनों के अनुसार वे पहले से बीमार थे। उन्हें पहले मशरक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में छपरा सदर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी।
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए स्थानीय व्यक्ति मुकेश महतो के घर छापेमारी कर 26 लीटर देसी शराब बरामद की और दो लोगों को गिरफ्तार किया।
तीन दिनों में 160 जगहों पर छापेमारीः घटनाओं के बाद पुलिस और मद्य निषेध विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गये हैं। सारण के एसएसपी विनीत कुमार के अनुसार 11 और 12 मार्च को मशरक और पानापुर के विभिन्न गांवों में 160 स्थानों पर छापेमारी की गयी।
इस दौरान 6 प्राथमिकी दर्ज की गयी। 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। करीब 1650 लीटर देसी शराब मौके पर ही नष्ट की गयी। 28 लीटर चुलाई शराब जब्त कर नष्ट की गयी। पुलिस का कहना है कि चुलाई शराब बनाने वाले नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
बार-बार क्यों सामने आते हैं ऐसे मामले? विशेषज्ञों के अनुसार शराबबंदी के बाद अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बल्कि कई जगहों पर यह भूमिगत और अधिक खतरनाक रूप में संचालित हो रहा है।
चुलाई शराब बनाने में अक्सर सस्ते केमिकल और औद्योगिक अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शराब जहरीली हो जाती है। यही कारण है कि इसे पीने वाले लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ जाती है और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है।
अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देशः जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही निजी अस्पतालों को भी निर्देश दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध हालत में बीमार होकर इलाज के लिए आता है तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दी जाये।
क्या रुक पाएगा जहरीली शराब का सिलसिला? सारण जिले में बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई और छापेमारी के बावजूद अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
मशरक और पानापुर की ताजा घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गये, तो आने वाले दिनों में ऐसी त्रासदियां फिर सामने आ सकती हैं। समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय/एक्सपर्ट मीडिया रिपोर्टस्









