Bird flu alert in Holi: बिहार में H5N1 संक्रमण से हड़कंप, पोल्ट्री कारोबार पर संकट, पटना जू 7 मार्च तक बंद

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। होली के रंगों के बीच बिहार में बर्ड फ्लू (Bird flu alert in Holi) के H5N1 स्ट्रेन की पुष्टि ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी पटना के चितकोहरा स्थित कौशल नगर में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पोल्ट्री अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में संक्रमण मिलने के बाद राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

एहतियातन कदम उठाते हुए संजय गांधी जैविक उद्यान को 7 मार्च तक बंद कर दिया गया है, ताकि वहां मौजूद पक्षियों और वन्यजीवों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है।

संक्रमण की पुष्टि और नियंत्रण की कार्रवाईः पशुपालन विभाग की जांच में H5N1 वायरस की पुष्टि होने के बाद लगभग 6000 मुर्गियों और हजारों अंडों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया गया। प्रभावित क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे को इन्फेक्शन जोन घोषित किया गया है, जबकि नौ किलोमीटर क्षेत्र को निगरानी जोन में रखा गया है। इलाके में चेकपोस्ट स्थापित कर पोल्ट्री उत्पादों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा व्यापक सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही एक कंट्रोल रूम (0612-2219199) सक्रिय किया गया है, जहां मृत पक्षियों या संदिग्ध मामलों की सूचना देने की अपील की गई है।

पोल्ट्री कारोबार पर संकट के बादलः बर्ड फ्लू की खबर के बाद पोल्ट्री उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। होली के समय आमतौर पर चिकन और अंडों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन संक्रमण की पुष्टि के बाद ग्राहकों में भय का माहौल बन गया है।

कई दुकानों पर बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है और कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। छोटे पोल्ट्री फार्म संचालकों को सबसे अधिक नुकसान की आशंका है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

H5N1 वायरस कितना खतरनाक? H5N1 एवियन इन्फ्लुएंजा मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन दुर्लभ परिस्थितियों में मनुष्यों में भी संक्रमण संभव है, खासकर संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने पर।

हालांकि बिहार में अब तक किसी इंसान में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। चिकन और अंडों को कम से कम 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अच्छी तरह पकाने से वायरस निष्क्रिय हो जाता है। मृत पक्षियों को न छूने और तुरंत प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।

क्यों बढ़ रहा है खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम, प्रवासी पक्षियों की आवाजाही और छोटे पोल्ट्री फार्मों में जैविक सुरक्षा मानकों की कमी संक्रमण के फैलाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं। यदि संदिग्ध मामलों की रिपोर्टिंग में देरी होती है तो संक्रमण का दायरा तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए त्वरित जांच और निगरानी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

प्रशासनिक रणनीति और आगे की राहः राज्य सरकार ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। अल्पकालिक कदमों में संक्रमित पक्षियों का निस्तारण, जोनल प्रतिबंध और सघन निगरानी शामिल है।

दीर्घकालिक रणनीति के तहत पोल्ट्री फार्मों में जैविक सुरक्षा प्रशिक्षण, नियमित सैंपलिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम और मुआवजा नीति को मजबूत करने की आवश्यकता है। जनजागरूकता अभियान के जरिए अफवाहों पर रोक लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जू बंद करने का महत्वः संजय गांधी जैविक उद्यान को अस्थायी रूप से बंद करना एक एहतियाती कदम है, ताकि जू में मौजूद पक्षी और अन्य वन्यजीव संक्रमण से सुरक्षित रह सकें। यदि वायरस जंगली प्रजातियों में फैलता है तो नियंत्रण और अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए प्रशासन ने समय रहते यह सख्त निर्णय लिया है।

सतर्कता ही सुरक्षाः बिहार में बर्ड फ्लू का यह प्रकोप केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है। फिलहाल राहत की बात यह है कि इंसानों में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है।

यदि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जनता की जागरूकता साथ-साथ बनी रही तो इस संकट पर काबू पाया जा सकता है। होली के इस अवसर पर रंगों के साथ-साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है, क्योंकि सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। स्रोतः बिहार सरकार स्वास्थ्य विभाग/ मुकेश भारतीय/ मीडिया रिपोर्ट

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

संबंधित खबरें

ताजा खबरें

सर्वजन खबरें