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    Wednesday, February 21, 2024
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      न्यूक्लियस मॉल के मालिक के ठिकानों पर बड़ी छापामारी, जानें कौन है विष्णु अग्रवाल

      रांची(एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)।  झारखंड के जाने माने कारोबारी विष्णु अग्रवाल के घर और ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर विष्णु अग्रवाल कौन है और कैसे बंगाल के पूर्लिया से महज सात-आठ साल पहले रांची आया ये कारोबारी आज रांची में 500 करोड़ से ज्यादा के जमीन का मालिक बन गया है।

      इतना ही नहीं वर्तमान सरकार के कई मंत्री और विधायकों के साथ विष्णु की अच्छी पकड़ भी है। सूत्रों की मानें तो विपक्षी पार्टियों के भी कई बड़े राजनेताओं के साथ विष्णु की पकड़ अच्छी है।

      कोलकात्ता में था मामूली कारोबारीः विष्णु अग्रवाल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पूरुलिया का रहने वाला है। विष्णु जैसे ही झारखंड के राजनेताओं के संपर्क में आता है वो महज चंद सालों में ‘लक्ष्मीपति’ बन जाता है। रांची में कई बड़े मॉल और होटल विष्णु के ही हैं।

      रांची के लालपुर स्थित न्यूक्लियस मॉल से लेकर कांके में कई होटल और जमीन का मालिक विष्णु अग्रवाल है।

      दरअसल, मिली जानकारी के अनुसार विष्णु अग्रवाल झारखंड के कई बड़े राजनेताओं के साथ लगातार संपर्क में था।

      इतना ही नहीं विष्णु झारखंड के कई बड़े राजनेताओं के काले धन को सफेद करने में मदद करता था। झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग का सबसे बड़ा मशीन विष्णु अग्रवाल माना जाता है।

      विष्णु के संपर्क में रहते हैं कई आएएस और आइपीएसः विष्णु की पैठ सिर्फ राज्य के बड़े राजनेताओं तक ही सीमित नहीं है। विष्णु की पकड़ राज्य के बड़े अधिकारियों तक है। राज्य के कई आईएएस और आईपीएस लगातार विष्णु के संपर्क में रहते हैं।

      खबरों की मानें तो विष्णु ना सिर्फ राजनेताओं के अवैध पैसे को सफेद करता है बल्कि अधिकारी भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

      आर्मी जमीन घोटाले का आरोपी है विष्णु अग्रवालः विष्णु सेना के 4 एकड़ से अधिक जमीन बेचने मामले में आरोपी है। जिसको लेकर ईडी की छापेमारी कर रही है।

      बता दें कि सेना की जमीन 2019 में 14 लोगों को बेची गयी थी। जमीन रांची के बरियातू रोड स्थित बड़गाई अंचल के मोरहाबादी मौजा में है। जमशेदपुर के एक कारोबारी ने जमीन बेची थी। बेची गयी जमीन के डीड को रद्द करने के लिए सेना की ओर से रांची उपायुक्त को एक पत्र दिया गया था।

      हालांकि अभी तक वह डीड रद्द नहीं किया गया है। छापेमारी के बाद ईडी जमीन खरीदारों और बिक्री करने वालों से भी पूछताछ करेगी।

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