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भागलपुरः ड्रेजिंग जहाज की चपेट में आने से 50 भैंस और 6 चरवाहा लापता

भागलपुर (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बरारी स्थिति मुसहरी गंगा घाट में लगे ड्रेजिंग जहाज की चपेट में आ जाने से आज लगभग 50 भैंस गंगा में समा गई। वहीं इस दौरान 8 युवक में 6 लोग किसी तरह जान बचाकर बाहर निकले। जबकि दो लोग अभी भी लापता हैं।

घटना रविवार शाम की है। उधर लापता लोगों की खोजबीन जारी है। स्थानीय गोताखोर और एसडीआरएफ की टीम उसे ढूंढने में लगी है।

उल्लेखनीय है कि मुसहरी गंगा घाट से प्रत्येक दिन भैंस चराने के लिए चरवाहा दक्षिणी भाग से उत्तरी भाग की ओर गंगा नदी पार कर जाया करते हैं। इसी क्रम में आज ड्रेजिंग जहाज की पंखी की चपेट में आने से यह बड़ा हादसा हुआ है।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर बरारी थाना समेत कई थाना की पुलिस और भागलपुर के एसडीओ धनंजय कुमार पहुंचकर घटना का जायजा ले रहे हैं। देखते ही देखते पूरा विसर्जन घाट छावनी में तब्दील हो गया है। ग्रामीणों की भीड़ भी वहां लग गई।

लापता चरवाहे की पहचान मायागंज के निवासी सिकंदर यादव और कारू यादव के रूप में हुई है। किसी तरह जान बचाकर बाहर निकले युवक धीरज ने कहा मौत के मुंह से बचकर बाहर आया हूं। मेरे सामने दो युवक गंगा में समा गए। मेरे 5 साथी किसी तरह मेरे साथ गंगा से बाहर निकल पाए और 45 से 50 मवेशी गंगा में समा गए। गंगा में तेज धार होने के चलते ड्रेजिंग जहाज की पंखियों में एक एक करके लोग समाने लगे। मुझे लगा मैं भी अब नहीं बच पाऊंगा लेकिन किसी तरह बच कर बाहर निकला हूं।

घटना सुनते ही घटनास्थल पर पहुंचे एसडीओ धनंजय कुमार ने तुरंत एसडीआरएफ की टीम को बुलाया। एसडीआरएफ की टीम के साथ स्थानीय गोताखोरों ने डूबे दो युवक सिकंदर यादव और कारू यादव को ढूंढने का कार्य प्रारंभ कर दिया।

उन्होंने सांत्वना दिया कि जल्द दोनों को ढूंढ कर परिजन को सौंप दिया जाएगा। इस दौरान एसडीओ ने खुद से मॉनिटरिंग करते हुए गंगा के तेज धार में एसडीआरएफ के वोट के सहारे निरीक्षण भी किया।

उन्होंने बताया यह घटना काफी दुखद है। थोड़ी सी लापरवाही के चलते इतनी बड़ी घटना घटित हुई। लापता युवक सिकंदर यादव और कालू यादव के परिजन का रो रो कर बुरा हाल है। उनका कहना है वर्षों से भैंस लेकर उस पार चारा खिलाने के लिए जाया करता था। लेकिन आज इतनी बड़ी घटना बर्दाश्त से बाहर हो रहा है।

प्रत्यक्षदर्शी प्रदीप यादव ने कहा कि हमलोग पशुओं को चारा खिलाने के लिए दियारा लेकर जा रहे थे। तभी जाने के क्रम में पानी की धार काफी तेज थी। जिसके कारण जहाज वहां पर रुकी और जहाज से टकरा गया। मेरे नजरों के सामने तकरीबन 22 भैंस गंगा में समा गई।

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