Home अपराध भाई-भाभी और मासूम भतीजी के हत्यारे को फांसी, बेगूसराय ट्रिपल मर्डर में...

भाई-भाभी और मासूम भतीजी के हत्यारे को फांसी, बेगूसराय ट्रिपल मर्डर में ऐतिहासिक फैसला

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के बेगूसराय जिले के सिंघौल थाना क्षेत्र अंतर्गत मचहा गांव में छह साल पहले हुई दिल दहला देने वाली तिहरी हत्या के मामले में न्याय की गूंज सुनाई दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने दोषी विकास सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि जिले में पहली बार किसी दोषी को इस तरह डिजिटल माध्यम से सजा सुनाई गई है।

यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि लोभ, पारिवारिक वैमनस्य और गवाही दबाने की साजिश का भयावह उदाहरण है। दोषी विकास सिंह पहले से ही पटना के बेऊर जेल में बंद है और उसका आपराधिक इतिहास भी लंबा रहा है। ट्रिपल मर्डर से पहले वह दो हत्याओं में संलिप्त पाया जा चुका है, जिनमें से एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है।

जमीन विवाद से शुरू हुआ खून का सिलसिलाः जानकारी के अनुसार मचहा गांव निवासी विकास सिंह का अपने चाचा अरुण सिंह से चार बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में उसने वर्ष 2012 में चाचा अरुण सिंह की हत्या कर दी। इसके बाद 2017 में उसने अपनी चाची मुन्नी देवी की भी हत्या कर दी। चाचा की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, जबकि चाची की हत्या का मामला अभी अदालत में लंबित है।

इन दोनों मामलों में विकास का अपना भाई कुणाल सिंह अभियोजन पक्ष का गवाह बना। यही बात विकास को नागवार गुजरी। वह लगातार कुणाल पर गवाही न देने का दबाव बनाता रहा। जब कुणाल सिंह ने दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो विकास ने बदले की खौफनाक साजिश रच डाली।

दीपावली की रात उजड़ा पूरा परिवारः 27 अक्टूबर 2019 को दीपावली की रात करीब 10 बजे विकास सिंह अपने साथियों के साथ कुणाल सिंह के घर पहुंचा। वहां उसने कुणाल सिंह, उनकी पत्नी कंचन देवी और मासूम बेटी सोनम कुमारी को गोलियों से भून डाला। इस निर्मम वारदात के बाद जब वह घर से निकल रहा था, तभी कुणाल का बेटा शिवम कुमार दरवाजे पर आ गया। विकास ने उसके सीने पर पिस्तौल सटाकर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन संयोगवश गोली नहीं चली और शिवम की जान बच गई।

घर के भीतर का मंजर देखकर शिवम सन्न रह गया। उसके पिता, मां और बहन खून से लथपथ पड़े थे। उसी वक्त पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज हुआ। गहन जांच, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने विकास सिंह को दोषी ठहराया।

अदालत का कड़ा संदेशः इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक (एपीपी) राम प्रकाश यादव ने सशक्त बहस की। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में अहम है, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि कानून के आगे कोई भी अपराधी नहीं बच सकता।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version