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झारखंड की मेगालीथ संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की पहल

दावोस और यूके में गूंजेगी पाषाण युग से जुड़ी विरासत की कहानी

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज / मुकेश भारतीय)। झारखंड अब केवल खनिज, उद्योग और प्राकृतिक संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के लिए भी वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की प्रस्तावित दावोस और यूनाइटेड किंगडम यात्रा का उद्देश्य जहां एक ओर राज्य की औद्योगिक क्षमता, निवेश संभावनाओं और शिक्षा के उन्नयन को दुनिया के सामने रखना है। वहीं दूसरी ओर झारखण्ड की मेगालीथ (महापाषाण) संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाना भी इस यात्रा का अहम हिस्सा है।An initiative to establish Jharkhand megalithic culture on the global stage 1

झारखण्ड का सिंहभूम क्षेत्र वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की उन शुरुआती भू-आकृतियों में शामिल है, जो सबसे पहले समुद्र से ऊपर उभरी थीं। यहां फैले प्राचीन पाषाण स्तंभ, गुफाएं, शैल चित्र और जीवाश्मयुक्त वन क्षेत्र इस बात के साक्ष्य हैं कि यह भूमि केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और खगोलीय दृष्टि से भी मानव इतिहास की आधारशिला रही है।

पंक्तिबद्ध मेगालीथ संरचनाएं सूर्य की गति, दिन-रात की गणना और ऋतु परिवर्तन से जुड़ी मानवीय समझ को दर्शाती हैं, जो झारखण्ड को विश्व के प्राचीन खगोल-ज्ञान केंद्रों की पंक्ति में खड़ा करती हैं।An initiative to establish Jharkhand megalithic culture on the global stage 4

भूले हुए नहीं, आज भी जीवंत हैं झारखण्ड के पत्थरः झारखण्ड के ये पाषाण किसी संग्रहालय में बंद अतीत नहीं हैं, बल्कि आज भी गांवों, जंगलों और समुदायों के जीवन में सांस लेते हैं। हजारों वर्षों से चली आ रही यह विरासत स्थानीय लोक परंपराओं, उत्सवों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में आज भी दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखण्ड का प्रतिनिधिमंडल दावोस और यूके में यह संदेश देगा कि ये मेगालीथ केवल इतिहास नहीं, बल्कि मानव चेतना, खगोल विज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्य की जीवंत मिसाल हैं। उद्देश्य स्पष्ट है अब तक उपेक्षित इस विरासत को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और सम्मान दिलाना।An initiative to establish Jharkhand megalithic culture on the global stage 3

विरासत संरक्षण का नया मॉडलः झारखण्ड के महापाषाणकालीन भू-दृश्य इस बात का उदाहरण हैं कि विरासत को दूरस्थ संग्रहालयों में स्थानांतरित किए बिना, स्थानीय समुदायों के बीच रहते हुए कैसे संरक्षित किया जा सकता है।

यह दृष्टिकोण भारत और यूनाइटेड किंगडम के सांस्कृतिक संरक्षण के साझा मूल्यों से भी मेल खाता है, जिसमें नैतिक संरक्षण, संग्रहालय साझेदारी, शोध सहयोग और विरासत को उसके मूल स्थान पर सुरक्षित रखने पर जोर दिया जाता है। यह पहल न केवल सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य के लिए एक संतुलित संरक्षण मॉडल भी प्रस्तुत करेगी।

स्टोनहेंज से कम नहीं झारखण्ड की मेगालीथ विरासतः हजारीबाग जिले के पकरी बरवाडीह में स्थित मेगालीथ संरचनाएं सूर्य की गति और इक्वीनॉक्स से जुड़ी हुई हैं। इनका महत्व यूनाइटेड किंगडम के विश्वविख्यात स्टोनहेंज से किसी भी तरह कम नहीं आंका जा सकता। ये संरचनाएं यह दर्शाती हैं कि महाद्वीपों और सदियों के पार, मानव सभ्यता में समय, मृत्यु और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को समझने की एक साझा प्रवृत्ति रही है।

इस्को के शैल चित्र, सोहराय और कोहबर पेंटिंग की सतत परंपरा तथा मंडरो क्षेत्र के जीवाश्मयुक्त वन मिलकर एक ऐसा दुर्लभ भू-दृश्य रचते हैं, जहां प्राचीन काल और जीवंत संस्कृति एक ही भूगोल में सह-अस्तित्व में दिखाई देते हैं।

An initiative to establish Jharkhand megalithic culture on the global stage 6

विकास और विरासत का संतुलनः मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड दावोस और यूनाइटेड किंगडम में केवल आर्थिक विकास का एजेंडा ही नहीं रख रहा, बल्कि यह भी रेखांकित कर रहा है कि किसी भी राज्य या देश का दीर्घकालिक विकास उसकी सांस्कृतिक निरंतरता और अतीत के प्रति सम्मान से जुड़ा होता है।

पाषाण युग से लेकर आधुनिक अर्थव्यवस्था तक की यात्रा तय करने वाला झारखण्ड आज देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पहल साबित करती है कि जब विकास और विरासत साथ चलते हैं, तब ही किसी समाज की पहचान स्थायी और सशक्त बनती है।

Expert Media News / Mukesh bhartiy

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले 35 वर्षों से एक समर्पित समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रुप में सक्रीय हैं, जिन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय खबरों पर गहरी समझ और विश्लेषण देने का अनुभव है। वे Expert Media News टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो एक डिजिटल समाचार प्लेटफ़ॉर्म जो ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। Expert Media News न केवल ताज़ा खबरें साझा करता है, बल्कि उन विश्लेषणों को भी प्रकाशित करता है जो आज की बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। वे मानते हैं कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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