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राजगीर बबुनी कांडः उपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं !

✍️मुकेश भारतीय / एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क

बेटी सिर्फ बेटी होती है। चाहे वह किसी पत्रकार की हो, पुलिस की हो या नेता की या फिर समाज के किसी तबके की… इनकी भावनाओं और आजादी को एक दुष्ट ही कुचल सकता है।

यदि हम बिहार के सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा अवस्थित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर में हुई शर्मनाक ‘बबुनी गैंगरेप’ मामले की बात करें तो शुरुआती तौर पर इसमें काफी दुष्टता बरती गई।

इसे दबाने, दोषियों को बचाने और महिमामंडन करने के भी षडयंत्र रचे गए। लेकिन यह भी सच है कि उपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। कुकर्मी को ही कड़ी सजा नहीं मिली अपितु, दुष्टों के वहम भी धाराशाही हुए।

हमारे पास इस बात के प्रमाण है कि बबुनी गैंगरेप के मामले में पुलिस का 24 घंटे में खुलासा और आरोपियों को दबोचने का दावा झूठ है।

अगर सच होता तो न्यूज18 चैनल के रिपोर्टर अभिषेक कुमार को तात्कालीन एसपी नीलेश कुमार ने फोन कर केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी नहीं देते।

हमारे एक्सपर्ट मीडिया न्यूज टीम के पास जैसे ही पीड़ता के परिजन द्वारा सूचनाएं आई तो उसकी पड़ताल में जुट गए। घटना राजगीर की थी। लेकिन पुलिस पहले मानने को तैयार नहीं थी। उसके बाद एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क को निशाने पर ले लिया।

काफी गंभीर पहलु है कि बिहार पुलिस के थानेदार, डीएसपी से लेकर एसपी तक को किसी संपादक पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया मालूम नहीं है। पॉस्को एक्ट तक लगा दिए गए, मानो एक संपादक भी उस घृणित वारदात में शामिल हो। इसे क्या कहेंगे?

मुझे फक्र है कि पीडिता के परिजन ने स्थानीय मीडिया से इतर संपर्क कर मामले की जानकारी दी और हमने उनका साथ दिया। क्योंकि उस समय पुलिस ने जो हालात उत्पन्न कर रखे थे, उन्हें भय था कि कहीं साक्ष्य मिटाने के लिए पीड़ता को नुकसान न पहुंचा दे।

हमने अपना फर्ज निभाया और पीड़ित परिवार ने भी अपना धर्म निभाया। जब हम पर इस मामले को उजागर करने पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया तो वे भी न्यायालय में साथ खड़े हो गए और माननीय न्यायाधीश ने एक पत्रकार के मूल दायित्व की भावनाओं को बल दिया।

यहां भी पुलिस की वहीं घृणित मानसिकता देखने को मिली कि सुशासन में अपराध को दबाना ही कर्तव्यनिष्ठता है। लेकिन मामले की वीडियो जिस तरह से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे, वे बिहार ही नहीं पूरे देश को झकझोर रही थी। इतना दुःसाहस कि बदमाश अपनी क्रुरता को खुद फैला दे।

लेकिन तारीफ हो रामधारी सिंह दिनकर न्यास परिषद के अध्यक्ष नीरज कुमार जी का कि उनकी रहनुमाई में लोग सड़क पर उतर आए।

शायद नालंदा की धरती पर वह पहली बार हुआ कि सीएम नीतीश कुमार के ‘आँगन’ में ही मुर्दाबाद गूंज उठे और पुलिस कार्रवाई करने को बाध्य हो गई।

लेकिन दुष्टता यही खत्म नहीं हुई। बबुनी गैंगरेप के 7 आरोपियों में 4 बदमाश ने सजा से बचने के लिए नाबालिग होने के तिकड़म भिड़ाए। किसी ने राजगीर के एक मध्य विद्यालय से पाँचवीं कक्षा के परित्याग प्रमाण पत्र का सहारा लिया तो किसी ने अन्य फर्जी कागजात का।

लेकिन मामला जब नालंदा बाल-किशोर न्याय परिषद के माननीय प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा के समक्ष पहुँचा तो उनकी पारखी नजर से बदमाशों की होशियारी बच नहीं सकी और उत्पन्न बारीकियों के मद्देनजर सघन जाँच करवाई तो सारे वयस्क पाए गए। फिर मामला स्पेशल पॉस्को कोर्ट में स्थानान्तरित कर दिया गया। अन्यथा सारे बदमाश आसानी से कड़ी सजा से बच जाते।

तभी तो कहा गया है कि उपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं। यही कारण है कि राजगीर के बबुनी को न्याय मिल सका और सभी 7 दुष्ट आजीवन सलाखों के पिछे रहेंगे।

 

Expert Media News / Mukesh bhartiy

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले 35 वर्षों से एक समर्पित समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रुप में सक्रीय हैं, जिन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय खबरों पर गहरी समझ और विश्लेषण देने का अनुभव है। वे Expert Media News टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो एक डिजिटल समाचार प्लेटफ़ॉर्म जो ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। Expert Media News न केवल ताज़ा खबरें साझा करता है, बल्कि उन विश्लेषणों को भी प्रकाशित करता है जो आज की बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। वे मानते हैं कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।
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