मंत्री इरफान अंसारी से सवाल पूछने पर News18 के पत्रकार की जमकर धुनाई, इलाज जारी

हजारीबाग (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)।  झारखंड की राजनीति और मीडिया की स्वतंत्रता पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है। हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सदर अस्पताल) में सोमवार को हुई एक घटना ने पूरे राज्य को चौंका दिया।

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जब वहां पहुंचे थे, उसी दौरान News18 Jharkhand के वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सोनी ने उनसे एक सीधा और तथ्यपरक सवाल पूछा कि विमान हादसे (एयर एंबुलेंस क्रैश) के मृतकों के परिजनों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला?

इस सवाल के जवाब में मंत्री के समर्थकों ने कथित तौर पर पत्रकार सुशांत सोनी की जमकर पिटाई कर दी। हमले में पत्रकार घायल हो गए और उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कर इलाज चल रहा है। घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ा रहा है।

दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा कर रहे थे। इसी दौरान स्थानीय पत्रकारों ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे। जब सुशांत सोनी ने फरवरी 2026 में चतरा जिले में हुए एयर एंबुलेंस हादसे के मृतकों के परिवारों को अब तक मुआवजे न मिलने का मुद्दा उठाया तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।

पत्रकार के अनुसार सवाल पूछते ही मंत्री के समर्थक और कुछ लोग उन पर टूट पड़े और लात-घूंसे मारने लगे। घटना की सूचना मिलते ही अन्य पत्रकारों और स्वास्थ्य कर्मियों में हड़कंप मच गया। घायल सुशांत सोनी को तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

एयर एंबुलेंस हादसा और मुआवजे का मुद्दाः यह घटना 23 फरवरी 2026 को चतरा जिले में हुए दुखद एयर एंबुलेंस क्रैश से जुड़ी है। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें दो पायलट, दो मेडिकल स्टाफ और अन्य यात्री शामिल थे। हादसे के तुरंत बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, जांच का आदेश दिया और पर्याप्त मुआवजे का आश्वासन दिया था।

मार्च 2026 में विधानसभा में भी मंत्री ने कहा था कि सरकार जल्द ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देगी और एयर एंबुलेंस सर्विस देने वाली कंपनी Red Bird के साथ अनुबंध पर पुनर्विचार कर रही है। उन्होंने खराब मौसम में उड़ान की अनुमति देने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठाए थे।

हालांकि, हादसे को दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने की शिकायतें आ रही थीं। यही मुद्दा सुशांत सोनी ने मंत्री के सामने उठाया, जो उनके पेशेवर कर्तव्य का हिस्सा था।

प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही का सवालः यह घटना केवल एक पत्रकार की पिटाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की मिसाल है। सुशांत सोनी जैसे पत्रकार जनता के सवालों को उठाते हैं। मुआवजे का मुद्दा सरकारी आश्वासनों की विश्वसनीयता से जुड़ा है। अगर सरकार ने मुआवजे का वादा किया था तो उसकी प्रगति पर सवाल पूछना पूरी तरह जायज है।

सवाल नापसंद होने पर हिंसा का रास्ता अपनाना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। मंत्री को सार्वजनिक स्थान पर सवालों का सामना करना चाहिए और जवाब देना चाहिए। उनके समर्थकों द्वारा हमला करना मंत्री की छवि को भी प्रभावित करता है।

घटना को कई घंटे बीत गए, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। यह पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। यदि हमलावरों की पहचान आसानी से हो सकती है (क्योंकि घटना अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थान पर हुई) तो कार्रवाई में देरी क्यों?

झारखंड में पहले भी पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाएं मीडिया कर्मियों में भय का माहौल पैदा करती हैं और सूचना के अधिकार को कमजोर करती हैं।

क्या कहते हैं नियम और अपेक्षाएं? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है। साथ ही, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और विभिन्न पत्रकार संगठन ऐसी घटनाओं की निंदा करते रहे हैं।

सरकार की ओर से तत्काल निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। एयर एंबुलेंस हादसे के मृतकों के परिवारों को पारदर्शी तरीके से मुआवजा वितरित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे सवाल न उठें।

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