पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री आवास खाली करने की प्रक्रिया और समानांतर रूप से 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्टिंग की शुरुआत ने सत्ता परिवर्तन के संकेतों को और स्पष्ट कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे से पहले ही सरकारी आवास से फर्नीचर, सोफा, पलंग समेत अन्य सामान हटाने का काम तेजी से जारी है।
उधर 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में तैयारियां जोरों पर हैं। यही वह बंगला है, जहां जल्द ही नीतीश कुमार के रहने की योजना है। खास बात यह है कि इस बदलाव के बाद वे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बन जाएंगे, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को हवा मिल रही है।
7 सर्कुलर रोड नीतीश का पसंदीदा ठिकानाः राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 7 सर्कुलर रोड बंगला नीतीश कुमार के लिए सिर्फ एक आवास नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक यात्रा का अहम हिस्सा रहा है। वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे यहीं रहे थे।
2015 में चुनाव जीतने के बाद वे 1 अणे मार्ग लौट गए, लेकिन इस बंगले को पूरी तरह छोड़ा नहीं। विपक्ष के आरोपों के बाद इसे मुख्य सचिव को आवंटित कर दिया गया था, हालांकि इसकी देखरेख और जुड़ाव बना रहा। अब एक बार फिर इस बंगले में उनकी वापसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
शिफ्टिंग के साथ तेज हुई तकनीकी तैयारियां: सूत्रों के मुताबिक बंगले में सिर्फ फर्नीचर ही नहीं पहुंचाया जा रहा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं को भी अपडेट किया जा रहा है। PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) पाइपलाइन का काम शुरू हो चुका है। सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है।
आवासीय परिसर में मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम भी जारी है। ये सभी तैयारियां इस बात का संकेत देती हैं कि शिफ्टिंग कोई अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक योजना के तहत हो रही है।
राजनीतिक संकेत क्या हैं? मुख्यमंत्री आवास खाली करने और नए ठिकाने पर जाने की प्रक्रिया को राजनीतिक विश्लेषक महज प्रशासनिक बदलाव नहीं मान रहे। इसे संभावित सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक पुनर्संरचना का संकेत माना जा रहा है
नीतीश कुमार का लालू यादव के नजदीक रहना, गठबंधन राजनीति के नए समीकरणों की ओर इशारा कर सकता है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े फैसलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
विपक्ष की नजर और सवालः इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष पहले से ही नजर बनाए हुए है। पहले भी 7 सर्कुलर रोड को लेकर सवाल उठ चुके हैं कि कैसे एक पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय तक सरकारी बंगले से जुड़े रहे। अब फिर से उसी बंगले में वापसी को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।
पटना में हो रही यह शिफ्टिंग सिर्फ आवास परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक पटकथा का संकेत भी हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव किस बड़े राजनीतिक फैसले का हिस्सा बनता है और राज्य की सत्ता समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है।


