देवघर भू-अर्जन कार्यालय के घूसखोर बड़ा बाबू और अनुसेवक रंगेहाथ गिरफ्तार, घर से लाखों बरामद
रिंग रोड परियोजना के मुआवजा भुगतान में मांगा जा रहा था 5% कमीशन, एसीबी ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा

रांची/देवघर (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में जमीन अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़े विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार एक बार फिर उजागर हुआ है। देवघर भू-अर्जन कार्यालय में रिश्वतखोरी के एक मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यालय के प्रधान लिपिक और एक अनुसेवक को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों कर्मचारी मुआवजा भुगतान के बदले रिश्वत ले रहे थे।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) दुमका की टीम ने देवघर जिला भू-अर्जन कार्यालय में छापेमारी कर प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नुनुदेव प्रसाद यादव को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद की गई तलाशी में प्रधान लिपिक के सरकारी आवास से 3 लाख 19 हजार 800 रुपये नकद भी बरामद किए गए, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
रिंग रोड परियोजना के मुआवजे में मांगा जा रहा था कमीशनः बताया जाता है कि देवघर में बन रहे बाइपास रिंग रोड के लिए कई ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इसी के तहत मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी। इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी पीड़ितों से कमीशन की मांग कर रहे थे।
कुंडा थाना क्षेत्र के गौरीपुर गांव निवासी ब्रहमदेव यादव ने एसीबी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन अधिग्रहित होने के बाद मिलने वाले 4 लाख 41 हजार रुपये के मुआवजे के भुगतान के बदले भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक द्वारा 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी।
पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने रिश्वत देने से इंकार किया तो फाइल आगे बढ़ाने में टालमटोल की जाने लगी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत एसीबी से कर दी।
एसीबी की रणनीति और रंगेहाथ गिरफ्तारीः शिकायत मिलने के बाद एसीबी दुमका ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने जाल बिछाकर आरोपी कर्मचारियों को पकड़ने की योजना बनाई।
एसीबी के निर्देश पर शिकायतकर्ता ब्रहमदेव यादव को 10 हजार रुपये लेकर भू-अर्जन कार्यालय भेजा गया। प्रधान लिपिक के निर्देश पर यह राशि अनुसेवक नुनुदेव प्रसाद यादव को दी गई। जैसे ही रिश्वत की रकम दी गई, पहले से घात लगाए एसीबी के धावा दल ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
सरकारी आवास से मिली बड़ी नकदीः गिरफ्तारी के बाद एसीबी टीम ने प्रधान लिपिक निरंजन कुमार के सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वहां से 3.19 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। एसीबी अधिकारियों के अनुसार यह राशि संदिग्ध है और इसकी जांच की जा रही है कि यह रकम कहां से आई।
भू-अर्जन विभाग पर उठते रहे हैं सवालः झारखंड में सड़क, औद्योगिक और शहरी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अक्सर विवादों और शिकायतों में घिरी रहती है। मुआवजा वितरण में देरी और कमीशनखोरी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मुआवजा प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
कानूनी कार्रवाई की तैयारीः एसीबी अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की चुनौतीः देवघर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में सड़क और आधारभूत संरचना की परियोजनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन इन परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भ्रष्टाचार के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुआवजा भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैकिंग, डिजिटल फाइल सिस्टम और सीधे बैंक खाते में भुगतान से जुड़ जाए, तो बिचौलियों और रिश्वतखोरी की गुंजाइश काफी हद तक कम हो सकती है।
देवघर की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि यदि शिकायतकर्ता साहस दिखाएं और एजेंसियां सक्रिय रहें, तो सरकारी दफ्तरों में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल को उजागर किया जा सकता है। समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय/एक्सपर्ट मीडिया रिपोर्टस्









