
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) के मानदेय में की गई कटौती का मामला अब एक बार फिर कानूनी दायरे में पहुंच गया है। जेटेट (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) और नियुक्ति कक्षा में विसंगति के आधार पर करीब 2000 पारा शिक्षकों के मानदेय में की गई कटौती को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने राज्य के महाधिवक्ता से पुनः कानूनी परामर्श मांगा है। इस कदम से शिक्षकों के बीच उम्मीद और असमंजस दोनों की स्थिति बन गई है।
चार से छह हजार रुपये तक की कटौती, शिक्षकों में बढ़ी चिंताः राज्य सरकार के निर्देश पर जनवरी 2026 से ऐसे सहायक अध्यापकों के मानदेय में चार हजार से लेकर छह हजार रुपये तक की कटौती कर दी गई, जिनकी नियुक्ति कक्षा और जेटेट उत्तीर्ण स्तर अलग-अलग हैं। यह कटौती उन शिक्षकों पर लागू की गई, जिन्होंने जिस कक्षा के लिए नियुक्ति प्राप्त की थी, उस स्तर की जेटेट परीक्षा पास नहीं की थी।
इस निर्णय से प्रभावित शिक्षकों की संख्या लगभग 2000 बताई जा रही है। इन शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से बढ़ा हुआ मानदेय प्राप्त कर रहे थे और अचानक कटौती से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
दिसंबर 2025 के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाईः झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दिसंबर 2025 में सभी जिलों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया था कि कक्षा 1 से 5 में नियुक्त सहायक अध्यापकों के लिए कक्षा 1 से 5 स्तर का जेटेट पास होना अनिवार्य होगा। कक्षा 6 से 8 में नियुक्त सहायक अध्यापकों के लिए कक्षा 6 से 8 स्तर का जेटेट पास होना आवश्यक होगा।
जेटेट पास करने के आधार पर मिलने वाली मानदेय वृद्धि केवल उसी स्तर पर मान्य होगी, जिसके लिए शिक्षक की नियुक्ति हुई है। इन निर्देशों के अनुपालन में जिलों ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उनके मानदेय में कटौती शुरू कर दी।
विसंगति की जड़: नियुक्ति और जेटेट स्तर में अंतरः राज्य में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षक की नियुक्ति कक्षा 1 से 5 में हुई, लेकिन उन्होंने जेटेट कक्षा 6 से 8 के स्तर पर पास किया। कुछ शिक्षकों की नियुक्ति कक्षा 6 से 8 में हुई, लेकिन उन्होंने जेटेट कक्षा 1 से 5 के स्तर पर पास किया।
अब तक इन सभी जेटेट उत्तीर्ण शिक्षकों को बढ़ा हुआ मानदेय दिया जा रहा था, भले ही उनका जेटेट स्तर नियुक्ति कक्षा से अलग क्यों न हो। लेकिन नए निर्देश के बाद केवल नियुक्ति के अनुरूप जेटेट पास शिक्षकों को ही बढ़ा हुआ मानदेय देने का नियम लागू किया गया।
दूसरी बार महाधिवक्ता से मांगी गई राय, निर्णय पर टिकी निगाहः इस पूरे मामले में बढ़ते विवाद और शिक्षकों के विरोध को देखते हुए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के महाधिवक्ता कार्यालय से दूसरी बार कानूनी राय मांगी है। परियोजना परिषद यह स्पष्ट करना चाहती है कि क्या मानदेय कटौती का निर्णय कानूनी रूप से सही है? या फिर पूर्व की तरह बढ़ा हुआ मानदेय बहाल करना होगा? महाधिवक्ता की राय आने के बाद ही राज्य सरकार इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेगी।
शिक्षकों में असंतोष, संगठन कर रहे विरोध की तैयारीः मानदेय कटौती से प्रभावित सहायक अध्यापकों और उनके संगठनों में भारी असंतोष है। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से सेवा दे रहे हैं और जेटेट भी पास कर चुके हैं, इसलिए केवल स्तर के आधार पर मानदेय घटाना अनुचित है।
शिक्षक संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि मानदेय बहाल नहीं किया गया, तो वे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकते हैं।
सरकार के निर्णय से तय होगा शिक्षकों का भविष्यः अब इस पूरे विवाद का समाधान महाधिवक्ता की कानूनी राय पर निर्भर करेगा। यदि राय शिक्षकों के पक्ष में आती है, तो कटे हुए मानदेय की बहाली संभव है। वहीं सरकार के पक्ष में राय आने पर कटौती जारी रह सकती है। इस बीच करीब 2000 सहायक अध्यापक अपने मानदेय और भविष्य को लेकर असमंजस में हैं और सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
समाचार स्रोतः मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्टस्







