SVU ने 50 हजार घूस लेते DPO को दबोचा, 6.5 लाख बरामद, CDPO से मांगे थे 10 लाख
विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई में किशनगंज के डीपीओ गिरफ्तार, 50 हजार की रिश्वत में पकड़ी गईं, आवास से साढ़े 6 लाख नगद बरामद
पटना / किशनगंज (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की टीम ने किशनगंज में आईसीडीएस की प्रभारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) सह ठाकुरगंज की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने सुबह करीब नौ बजे डुमरिया भट्टा रोड स्थित उनके किराए के आवास पर छापेमारी कर यह कार्रवाई की।
50 हजार की घूस लेते धराईं, बैग से मिले 6.5 लाख रुपयेः निगरानी टीम के अनुसार ट्रैप के दौरान अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये रिश्वत की राशि लेते पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान तलाशी में एक बैग से अतिरिक्त 6.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए। बरामद राशि के स्रोत और वैधता की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह रकम भी संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी हो सकती है।
10 लाख रुपये की मांग का आरोपः मामला तब उजागर हुआ जब कोचाधामन के CDPO नागेंद्र कुमार (नूरसराय थाना क्षेत्र, नालंदा के जगदीशपुर तियारी निवासी) ने 18 फरवरी को निगरानी विभाग में कांड संख्या 8/26 दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि DPO अनीता कुमारी ने उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई कराने और निलंबन की धमकी दी थी। कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनसे 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत के आधार पर विशेष निगरानी इकाई ने सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की गई।
विभागीय जांच से जुड़ा था मामलाः जांच में सामने आया है कि CDPO नागेंद्र कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के तहत गठित ‘प्रपत्र क’ में DPO अनीता कुमारी गवाह थीं। आरोप है कि उन्होंने गवाही में शिकायतकर्ता के पक्ष में बचाव करने के लिए मोटी रकम की मांग की थी। रिश्वत नहीं देने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही थी।
बढ़ सकती है कानूनी धाराएं: निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद अनीता कुमारी से पूछताछ जारी है। आय से अधिक संपत्ति के पहलू पर भी जांच की जा सकती है। बरामद 6.5 लाख रुपये की रकम इस दिशा में जांच को और गहरा सकती है। आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेशः इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में निगरानी इकाई ने कई सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से न केवल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।





