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डिजिटल धोखाधड़ी का नया चेहरा: देवघर को RBI ने बताया हाई-रिस्क बैंकिंग ज़ोन

आरबीआई ने देवघर को देश का पहला बैंकिंग साइबर फ्रॉड हॉट स्पॉट घोषित किया, सख्त गाइडलाइन के बाद बैंकों में सुरक्षा अलर्ट और नया खाता खोलने की प्रक्रिया हुई कड़ी।

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन के दौर में साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसी कड़ी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने झारखंड के देवघर जिले को देश का पहला बैंकिंग साइबर फ्रॉड हॉट स्पॉट घोषित कर दिया है।

आरबीआई द्वारा एन्हांस्ड ड्यू डिलिजेंस (ईडीडी) के तहत करायी गयी विशेष जांच में देवघर को पूरे देश में बैंकिंग लेन-देन के लिहाज से हाई-रिस्क एरिया पाया गया है। यह घोषणा न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के बैंकिंग तंत्र के लिए एक बड़ा अलार्म है।

ईडीडी जांच में क्या सामने आया

आरबीआई की ईडीडी जांच में खुलासा हुआ है कि देवघर में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते पाए गए हैं, जिनका लेन-देन पैटर्न सामान्य नहीं है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई नये खातों में अचानक भारी रकम का ट्रांजेक्शन हुआ, जो बाद में म्यूल अकाउंट (दूसरे के नाम पर संचालित खाते) साबित हुए।

इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे साइबर अपराधों से जुड़ी ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक देवघर से प्रतिदिन करीब 30 लाख रुपये की ठगी विभिन्न साइबर फ्रॉड माध्यमों से की जा रही है। इस रकम का सीधा असर देशभर के आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

रोजाना 50 से 60 खाते हो रहे फ्रीज

जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि देवघर में संचालित विभिन्न बैंकों के 50 से 60 खाते प्रतिदिन देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस द्वारा फ्रीज किए जा रहे हैं। यह संख्या बताती है कि देवघर साइबर अपराधियों के लिए एक संगठित नेटवर्क का केंद्र बन चुका है। इन खातों के जरिए फर्जी कॉल, फिशिंग, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी जैसे अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।

आरबीआई की सख्त गाइडलाइन

साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए आरबीआई ने देवघर को बैंकिंग साइबर फ्रॉड हॉट स्पॉट घोषित करते हुए सभी बैंकों को विशेष सतर्कता बरतने का सख्त निर्देश दिया है। आरबीआई की नई गाइडलाइन के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर संबंधित शाखा प्रबंधक ग्राहकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और पृष्ठभूमि की जांच भी कर सकते हैं।

विशेष रूप से नये खाताधारकों और युवाओं के मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है। आरबीआई ने निर्देश दिया है कि नये खातों में अचानक बड़े ट्रांजेक्शन होने पर तत्काल अलर्ट जारी किया जाए

म्यूल अकाउंट की पहचान के लिए ट्रांजेक्शन पैटर्न की निरंतर निगरानी की जाए। मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और आधार से जुड़े विवरणों का मिलान अनिवार्य किया जाए। संदिग्ध गतिविधि दिखते ही खाते को अस्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई की जाए

देवघर के बैंकों में बढ़ी सख्ती

आरबीआई के निर्देश मिलते ही देवघर के सभी बैंकों ने नये बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया है। सबसे बड़ा कदम भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने उठाया है। एसबीआई ने अपने सभी ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) को सीधे तौर पर नया खाता खोलने से रोक दिया है।

अब एसबीआई में खाता खोलने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज पहले नजदीकी शाखा में जमा करने होंगे। शाखा प्रबंधक द्वारा पूरी जांच और संतुष्टि के बाद ही सीएसपी के माध्यम से खाता खोला जा सकेगा। बैंक अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी और म्यूल अकाउंट पर काफी हद तक लगाम लगेगी।

आम खाताधारकों पर क्या असर

आरबीआई की इस सख्ती का असर आम खाताधारकों पर भी पड़ना तय है। अब नया खाता खोलना पहले की तुलना में ज्यादा समय लेने वाला और प्रक्रिया-प्रधान होगा। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह कदम खाताधारकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

एक बैंक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इससे ग्राहकों को थोड़ी परेशानी होगी, लेकिन साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए यह जरूरी है। एक बार पैसा चला गया तो उसे वापस पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

देवघर क्यों बना साइबर फ्रॉड का केंद्र

विशेषज्ञों के मुताबिक देवघर धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के कारण बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की आवाजाही वाला क्षेत्र है। यहां अस्थायी रूप से रहने वाले लोग, बेरोजगार युवा और डिजिटल जागरूकता की कमी साइबर अपराधियों के लिए आसान शिकार बनते हैं। कई मामलों में युवाओं को मामूली कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में ठगी के लिए किया जाता है।

पुलिस और साइबर सेल की भूमिका

देवघर पुलिस और साइबर सेल भी अब अलर्ट मोड में है। दूसरे राज्यों की पुलिस से लगातार समन्वय किया जा रहा है। फ्रीज किए गए खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को भेजी जा रही है ताकि खाताधारकों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही देवघर में साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसमें बैंक, पुलिस और जिला प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

देशभर के लिए चेतावनी

आरबीआई का यह कदम केवल देवघर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो अन्य जिले भी साइबर फ्रॉड हॉट स्पॉट बन सकते हैं। आरबीआई की ईडीडी जांच आने वाले समय में अन्य संवेदनशील इलाकों पर भी लागू की जा सकती है।

डिजिटल सुरक्षा ही असली बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बैंकिंग सख्ती से साइबर फ्रॉड पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। इसके लिए आम लोगों को भी डिजिटल रूप से जागरूक होना होगा। अनजान कॉल, लिंक, ओटीपी शेयर करने से बचना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देना जरूरी है।

बाबा भोलेनाथ की भूमि पर धब्बा

बहरहाल, देवघर को देश का पहला बैंकिंग साइबर फ्रॉड हॉट स्पॉट घोषित किया जाना एक गंभीर संकेत है। यह बताता है कि साइबर अपराध अब छोटे शहरों और धार्मिक स्थलों तक फैल चुका है।

आरबीआई की सख्ती, बैंकों की अतिरिक्त जांच और पुलिस की सक्रियता से उम्मीद की जा सकती है कि इस पर नियंत्रण पाया जाएगा। लेकिन इसके साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है।

( एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क के लिए मुकेश भारतीय का विशेष आलेख )

Expert Media News / Mukesh bhartiy

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले 35 वर्षों से एक समर्पित समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रुप में सक्रीय हैं, जिन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय खबरों पर गहरी समझ और विश्लेषण देने का अनुभव है। वे Expert Media News टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो एक डिजिटल समाचार प्लेटफ़ॉर्म जो ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। Expert Media News न केवल ताज़ा खबरें साझा करता है, बल्कि उन विश्लेषणों को भी प्रकाशित करता है जो आज की बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। वे मानते हैं कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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