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ततहा जल कुंड: पानी इतना गर्म कि अंडा उबल जाए, कहीं जल इतना ठंढ कि शरीर जम जाए

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड की पहचान अब तक खनिज संपदा घने जंगलों और आदिवासी संस्कृति तक ही सीमित मानी जाती रही है, लेकिन यहां ततहा जल कुंड जैसे प्राकृतिक चमत्कार भी छिपे हैं, जो राज्य को देश के विशिष्ट पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर सकते हैं।

लातेहार जिला ऐसा ही एक क्षेत्र है, जहां प्रकृति ने खुले हाथों से अपनी संपदा बिखेरी है। दुर्भाग्यवश, सरकारी उदासीनता और योजनाबद्ध विकास के अभाव में ये धरोहरें आज भी गुमनामी के अंधेरे में पड़ी हैं। इन्हीं में से एक है ततहा गर्मजल कुंड, जो अपने आप में झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के चुनिंदा प्राकृतिक आश्चर्यों में शामिल होने की क्षमता रखता है।

एक ही नदी में गर्म और ठंडा पानीः ततहा गर्मजल कुंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक ही नदी में, एक ही स्थान पर गर्म और ठंडा पानी साथ-साथ बहता है। लातेहार जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित यह स्थल सदर प्रखंड की पोचरा पंचायत अंतर्गत जारम गांव के पास एक पहाड़ी नदी के बीच अवस्थित है।

लातेहार से करीब आठ किलोमीटर पक्की सड़क के बाद कच्चे रास्ते से होकर यहां पहुंचना पड़ता है। आज भी नदी पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को पानी पार कर इस अनोखे स्थल तक पहुंचना पड़ता है।

नदी के बीच 12 से 14 छोटे-बड़े कुंड बने हुए हैं। कुछ कुंडों का पानी इतना गर्म होता है कि उसमें अंडा तक उबाला जा सकता है, जबकि ठीक बगल में बहता पानी बेहद ठंडा रहता है। पहली बार यहां आने वाला हर व्यक्ति इस अद्भुत विरोधाभास को देखकर हैरान रह जाता है। स्थानीय लोग इसे प्रेम से “प्रकृति का गीजर” कहते हैं।

गंधक युक्त जल और स्वास्थ्य लाभः ग्रामीणों के अनुसार इस क्षेत्र की जमीन के भीतर गंधक की परतें मौजूद हैं, जिनसे होकर निकलने वाला पानी गर्म हो जाता है। इसी कारण कुंड के पानी में गंधक की मात्रा अधिक मानी जाती है।

हालांकि अब तक इस जलस्रोत का कोई विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हो सका है, लेकिन वर्षों का लोकअनुभव इसके औषधीय गुणों की पुष्टि करता है।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि ततहा कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों जैसे खाज, खुजली, दाद और फोड़ा-फुंसी में लाभ मिलता है। गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों से भी लोग यहां इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। कई लोगों का दावा है कि कुछ ही बार स्नान करने से पुराने त्वचा रोगों में उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली।

स्नान की अनोखी परंपराः कुंड का पानी अत्यधिक गर्म होने के कारण यहां स्नान की एक खास परंपरा है। लोग पहले कुंड का कुछ गर्म पानी बाहर निकालते हैं, फिर उसमें नदी का ठंडा पानी मिलाकर तापमान संतुलित करते हैं। जब पानी स्नान योग्य हो जाता है, तभी लोग इसमें उतरते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और स्थानीय लोग इसे पूरी सावधानी से निभाते हैं।

पिकनिक स्थल बना, पर सुविधाएं नदारदः पिछले कुछ वर्षों में ततहा कुंड स्थानीय युवाओं और परिवारों के लिए पिकनिक स्थल के रूप में उभरा है। छुट्टियों के दिनों में यहां अच्छी-खासी भीड़ जुटने लगी है।

बावजूद इसके न यहां सुरक्षा व्यवस्था है, न शौचालय, न चेंजिंग रूम और न ही कोई चेतावनी या सूचना बोर्ड। बरसात के दिनों में नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

आदिम जनजातियों का इलाका, विकास से दूरः ततहा कुंड के आसपास के गांवों में आदिम जनजातियों की बहुलता है। पहाड़ों, जंगलों और नदियों से घिरे इस क्षेत्र के लोग आज भी प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीते हैं, लेकिन विकास की मुख्यधारा से यह इलाका काफी पीछे छूट गया है।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार 1947 से पहले अंग्रेजों की एक टीम ने यहां सर्वे किया था और गंधक के साथ-साथ सोना और चांदी जैसे खनिजों की मौजूदगी की बात कही थी।

लंबे समय बाद जब कमल किशोर सोन लातेहार के उपायुक्त बने, तब प्रशासन का ध्यान इस क्षेत्र की ओर गया। उनके कार्यकाल में सड़क, आंगनबाड़ी केंद्र और आदिम जनजातियों से जुड़े कुछ विकास कार्य शुरू हुए, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई। आज भी नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे बरसात में गांवों का संपर्क लगभग कट जाता है।

स्वास्थ्य पर्यटन की अपार संभावनाः यदि ततहा गर्मजल कुंड को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए, तो यह झारखंड का प्रमुख स्वास्थ्य पर्यटन स्थल बन सकता है। सड़क और पुल निर्माण, सुरक्षित स्नानघाट, शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और सूचना बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कुल मिलाकर ततहा गर्मजल कुंड केवल एक प्राकृतिक स्थल नहीं, बल्कि लातेहार की पहचान बन सकता है। आज यह उपेक्षा का शिकार है, लेकिन सही नीति, वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ इसे झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल किया जा सकता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि प्रकृति के इस उपहार को उसकी वास्तविक पहचान दिलाई जाए।

Expert Media News / Mukesh bhartiy

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले 35 वर्षों से एक समर्पित समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रुप में सक्रीय हैं, जिन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय खबरों पर गहरी समझ और विश्लेषण देने का अनुभव है। वे Expert Media News टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो एक डिजिटल समाचार प्लेटफ़ॉर्म जो ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। Expert Media News न केवल ताज़ा खबरें साझा करता है, बल्कि उन विश्लेषणों को भी प्रकाशित करता है जो आज की बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। वे मानते हैं कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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