
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार झारखंड पेसा नियमावली- 2025 लागू कर दिया है। यह नियमावली राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को सशक्त बनाना और स्वशासन को मजबूती देना है।
इसमें ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी। इसके लिए निर्णय ग्राम सभा की बैठक में होगी। इसमें कोरम पूरा करने की बाध्यता होगी। इसमें पारंपरिक ग्रामसभा द्वारा दंड का प्रावधान भी किया गया है। कहा गया है कि अगर गांव के किसी व्यक्ति द्वारा कोई क्षति पहुंचायी जाती है तो दंड का भी प्रावधान है। दंड अधिकतम 2000 रुपये तक होगा।
अगर गलती किसी नीयत से नहीं की गयी हो तो भूल स्वीकार करने पर ग्राम सभा माफी भी दे सकेगी। ग्रामसभा के पास कारावास की सजा देने का प्रावधान नहीं होगा। दंड
की राशि प्रभावित व्यक्ति की क्षमता को देखकर तय की जायेगी। यह राशि ग्रामसभा के कोष में जमा होगी। प्रभावित व्यक्ति इसका अपील भी कर सकेगा। इसके लिए समाज की पारंपरिक व्यवस्था में स्थान सुनिश्चित किया गया है।
इसके बाद भी मामला नहीं सुलझने पर कोर्ट की शरण में जा सकेंगे। झारखंड सरकार की यह अधिसूचना अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए जल, जंगल और जमीन पर उनके पारंपरिक अधिकारों को कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
नियमावली में ग्रामसभा में किसी भी योजना की समय सीमा भी तय कर दी गयी है। ग्राम सभा को किसी भी प्रस्तावित योजना पर 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। अन्यथा उसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जायेगा।
नियमावली में अंधविश्वास, जादू-टोना और डायन बिसाही जैसी कुरीतियों के खिलाफ ग्राम सभा को कड़े कदम उठाने और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
नयी नियमावली के अनुसार अब हर पारंपरिक गांव की अपनी ग्रामसभा होगी, जिसकी अध्यक्षता उस समुदाय के पारंपरिक प्रधान (जैसे मांझी, मुंडा, पाहन, महतो आदि) करेंगे।
ग्रामसभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य है। बैठक के कोरम के लिए कुल सदस्यों का एक-तिहाई होना आवश्यक है। जिसमें एक-तिहाई महिला सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।
ग्राम सभा के सभी निर्णय मुख्य रूप से सर्वसम्मति से लिये जायेंगे। यदि सर्वसम्मति नहीं हो तो बहुमत के आधार पर हाथ उठाकर मतदान कराया जायेगा।
प्रत्येक ग्राम सभा अपना ग्राम कोष बना सकेगी। जिसमें अन्न, श्रम, वस्तु और नगद कोष शामिल होंगे। इस कोष में लघु वन उपज से प्राप्त रॉयल्टी, दंड राशि और अन्य राजस्व जमा किये जायेंगे।
इसमें विवादों का समाधान और शांति व्यवस्था करने का भी प्रावधान शामिल है। ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में शांति बनाये रखने और विवादों को सुलझाने का मौलिक दायित्व दिया गया है।
नियमावली में प्रावधान है कि अगर किसी समय डीसी को यह पता चले कि किसी रैयत, जो अनुसूचित जनजाति (एसटी) का सदस्य है, उसकी भूमि का हस्तांतरण विधि सम्मत नहीं किया गया है तो वापसी कराने का अधिकार होगा। इसके लिए जमीन लेने वाले व्यक्ति को सफाई देने का उपयुक्त अवसर दिया जायेगा।
बाद में आवश्यक जांच कर लेने के बाद बिना किसी भुगतान के बाद पूर्व के मालिक को दिया जायेगा। अगर जमीन का वारिस उपलब्ध नहीं हो तो यह भूमि किसी दूसरे अनुसूचित जनजाति के रैयत को बंदोबस्त की जा सकेगी।
पेसा नियमावली 2025 ने प्राकृतिक और सामुदायिक संसाधनों पर ग्राम सभा के अधिकारों को स्पष्ट किया है। ग्राम सभा अपने पारंपरिक क्षेत्र के भीतर स्थित जल निकायों (तालाब, झरना, नहर आदि) और लघु खनिजों का प्रबंधन रूढ़िवादी प्रथाओं के अनुसार कर सकेगी।
लघु वन उपज भी ग्रामसभा के नियंत्रण में होंगे। महुआ, शहद, लाह, बांस और औषधीय पौधों जैसी लघु वन उपज पर अब ग्राम सभा का पूर्ण नियंत्रण होगा।
राज्य के 16 जिलों में पेसा लागू होगा। इसे 13 जिलों में पूर्ण रूप से तथा तीन जिलों के कुछ प्रखंडों में लागू किया जायेगा। यह पूर्ण रूप से रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, प सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ में लागू होगा। वहीं पलामू, गोड्डा, गढ़वा में आंशिक रूप से लागू होगा।
ग्राम सभा में पारिवारिक और छोटे भूमि विवादों की होगी सुनवाई ग्राम सभा पारिवारिक और जमीन से जुड़े छोटे विवादों की सुनवाई अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और क्षेत्रीय कानूनों (जैसे सीएनटी और एसपीटी एक्ट) के आधार पर करेगी। नयी नियमावली में दंड का प्रावधान भी किया गया है।
प्रस्तावित नियमावली में यह 10 हजार रुपये तक थी। जिसे घटाकर अधिकतम दो हजार रुपये तक कर दिया गया है। ग्राम सभा को अधिकतम 2,000 तक का आर्थिक दंड लगाने का अधिकार होगा, जिसे ग्राम कोष में जमा किया जायेगा।
ग्राम सभा को कारावास की सजा देने का अधिकार नहीं है। इसमें पुलिस की भूमिका भी तय की गयी है। पुलिस को किसी भी गिरफ्तारी की जानकारी सात दिन में ग्राम सभा को देनी होगी। विकास योजनाओं पर वीटो पावर ग्रामसभा को दिया गया है।
अब सरकारी विभाग या पंचायतें गांव में कोई भी योजना लागू करने से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेने के लिए बाध्य होंगी। गांवों में उपायुक्त द्वारा एक बहु अनुशासनात्मक टीम (एमडीटी) बनायी जायेगी। जो ग्राम सभा के साथ मिलकर विकास योजनाएं तैयार करेगी।










