पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बगहा व्यवहार न्यायालय के लिए वर्ष 2025 न्यायिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला साल साबित हुआ। इस दौरान अदालत ने न सिर्फ कानून की सख्ती दिखाई, बल्कि कई जटिल, संवेदनशील और वर्षों से लंबित मामलों में ऐसे फैसले सुनाए, जिन्होंने आम जनता के बीच न्यायपालिका के प्रति भरोसे को और मजबूत किया। निष्पक्ष सुनवाई, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित निर्णय और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन इस साल के फैसलों की पहचान बने।
वर्ष 2025 में बगहा व्यवहार न्यायालय ने एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इन फैसलों ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध चाहे कितना ही पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से कोई बच नहीं सकता। अदालत का यह रुख अपराधियों के लिए चेतावनी और पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया।
इस साल का सबसे चर्चित मामला सेना के एक जवान से जुड़ा रहा। अपर एवं सत्र न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने 11 जुलाई को पत्नी निकहत परवीन की हत्या के मामले में आरोपित जवान इस्माइल अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपित जालंधर कैंट स्थित बटालियन-4 में तैनात था और घटना के बाद से ही जेल में बंद था।
कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि हत्या आरोपित द्वारा ही की गई थी। खास बात यह रही कि अभियोजन के अधिकांश गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे।
ऐसे मामलों में अक्सर आरोपित को संदेह का लाभ मिल जाता है, लेकिन अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और तथ्यों को प्राथमिकता देते हुए कड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया। यह निर्णय इस बात का प्रतीक बना कि न्याय केवल गवाहों पर नहीं, बल्कि सच्चाई और प्रमाणों पर टिका होता है।
बगहा का बहुचर्चित टीपू हत्याकांड भी 2025 में निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। करीब 27 वर्षों से लंबित इस मामले में अपर एवं सत्र न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने गुड्डू गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इतने लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन न्याय से इनकार नहीं।
इस वर्ष डकैती से जुड़े कई मामलों में भी न्यायालय का सख्त रुख देखने को मिला। जहां साक्ष्य के अभाव में कुछ आरोपितों को बरी किया गया, वहीं अपराध सिद्ध होने पर कई कुख्यात डकैतों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
इसके अलावा 17 साल पुराने अधिवक्ता अपहरण कांड में मुख्य आरोपित राजेंद्र चौधरी को आजीवन कारावास, धनहा के दोहरे हत्याकांड में साइको किलर समेत चार अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा दी गई।
इतना ही नहीं, अदालत ने अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने पर आधा दर्जन थानाध्यक्षों, एक पूर्व डीएसपी, एक चिकित्सक और मोतिहारी कारा केंद्र के अधीक्षक के वेतन पर रोक लगाने जैसे कड़े प्रशासनिक आदेश भी पारित किए, जो पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी के रूप में देखे गए।
मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए बगहा व्यवहार न्यायालय ने एक 80 वर्षीय वृद्धा को भी न्याय दिलाया। धनहा थाना क्षेत्र के एक पुराने अपहरण मामले में नामजद मालती देवी को लगभग 20 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बरी किया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इस निर्णय ने साबित कर दिया कि कानून की नजर में न तो उम्र बाधा है और न ही समय।
कुल मिलाकर वर्ष 2025 बगहा व्यवहार न्यायालय के लिए न्याय, साहस और संवेदनशीलता का प्रतीक बनकर उभरा। इन ऐतिहासिक फैसलों से जहां समाज में कानून का डर मजबूत हुआ, वहीं पीड़ितों को यह भरोसा भी मिला कि देर-सवेर न्याय जरूर मिलता है।










