रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड अगेंस्ट करप्शन (Jharkhand Against Corruption) झारखंड में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को अधिक संगठित, जन-आधारित और युगीन रूप देने का प्रयास जारी है। 2 मार्च 2026 को आयोजित केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से ‘युवा प्रकोष्ठ’ (Youth Wing) के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया, जिससे संगठन ने अपने ढांचे में एक निर्णायक विस्तार किया है।
इस युवा इकाई का केंद्रीय अध्यक्ष यंग स्कॉलर आर्या कुमार तथा केंद्रीय उपाध्यक्ष अंकित कुमार पाहन बनाए गए हैं, जिससे यह प्रयास युवाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
युवा प्रकोष्ठ: क्यों मायने रखता है यह कदम? संस्थापक अध्यक्ष दुर्गा उरांव उर्फ दुर्गा मुंडा ने इस इकाई को पूर्ण स्वायत्तता और संगठनात्मक संचालन अधिकार दिए हैं, ताकि यह न केवल भ्रष्टाचार-विद्रोह के मुद्दों को सामाजिक और डिजिटल मंच पर उभार सके, बल्कि संगठन के पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या का प्रयोग समस्त आधिकारिक कार्यक्रमों में कर सके। यह प्राधिकरण तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि युवा प्रकोष्ठ का गठन महज़ प्रतीकात्मक विस्तार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। अब तक संगठन की साख मुख्यतः PIL-आधारित कानूनी लड़ाइयों से जुड़ी रही है, लेकिन यह युवा इकाई जन-आधार पर सक्रियता, सोशल मीडिया अभियानों और शैक्षणिक संस्थानों में नेतृत्व विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
क्योंकि युवा नेतृत्व भ्रष्टाचार-विरोधी विमर्श को नई पीढ़ी की भाषा और तकनीक से जोड़ सकता है, जिससे आंदोलन का विस्तार अधिक व्यापक और प्रभावशाली होगा।
झारखंड में भ्रष्टाचार का व्यापक संदर्भः झारखंड में भ्रष्टाचार को लेकर लंबी-चौड़ी चर्चाएँ और जांचें पहले से ही जारी हैं। राज्य में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) कई बार वरिष्ठ अधिकारीयों को लेकर जांच में सक्रिय रहा है। जैसे कि सरकार की लिकर नीति घोटाले में वरिष्ठ IAS अधिकारी से पूछताछ की गई थी जिसमें भ्रष्टाचार के सवालों पर एजेंसी ने PE दर्ज की थी।
इसके अलावा राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक मामलों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी समय-समय पर चर्चा का विषय रहे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि प्रवर्तन एजेंसियों और सोशल संगठन दोनों ही इस दिशा में संघर्ष कर रहे हैं।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर एक युवा-चालित, चेतनावान मोर्चे का गठन भ्रष्टाचार-विरोधी मैदान में और गहराई ला सकता है, विशेषकर जब पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल-पीढ़ी की भूमिका को संगठनात्मक रूप दिया जा सके।
दुर्गा मुंडा की प्रतिबद्धता और सामाजिक संघर्षः दुर्गा मुंडा, जो राजधानी रांची के एदलहातु गांव के रहने वाले हैं और मुंडा जनजाति से आते हैं, उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद भ्रष्टाचार-विरोधी लड़ाई को एक मिशन के रूप में लिया है।
संगठन ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े कथित 4000 करोड़ रुपये के खनन घोटाले को उजागर करने में भूमिका निभाई थी, जिससे विजिलेंस और CBI जांच की मांग उठी थी और इसे राज्य में राजनीतिक व कानूनी हलचल भी मिली थी।
सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दवाब और कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सक्रियता आदिवासी समुदायों और ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार-विरोधी चेतना फैलाने के लिए अहम रही है।
भविष्य की चुनौतियां और अपेक्षाएं: युवा प्रकोष्ठ के समक्ष कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं । PIL-आधारित मॉडल की लंबी कानूनी प्रक्रिया और संसाधन-सीमाएँ, पारदर्शिता, जवाबदेही और संगठनात्मक अनुशासन की ज़रूरत, राजनीतिक दबाव और कानूनी जटिलताएँ जगजाहिर है।
इसके अलावा झारखंड जैसे राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी काम का सामाजिक स्वीकार्यता स्तर अब चुनावों के परिणामों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से भी जुड़ता जा रहा है, जैसे कि हाल के नगर निकाय चुनावों में पारंपरिक पार्टियों के साथ साथ निर्दलीय उम्मीदवारों का सशक्त प्रदर्शन देखने को मिला।
क्या यह बदलाव आंदोलन को आगे ले जाएगा? 2 मार्च 2026 का यह निर्णय संगठन के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में आया है। जहाँ अदालत की दहलीज पर आधारित लड़ाई अब युवा शक्ति, डिजिटल अभियान और जमीनी सचेतना के संगम के साथ समाज के भीतर उतरने की तैयारी कर रही है।
यदि यह युवा इकाई कानूनी लड़ाई को जनता-आधारित आंदोलनों तथा जन-सूचना से जोड़ने में सफल रहती है तो यह न केवल झारखंड में बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। स्रोतः रांची मीडिया रिपोर्ट
