
नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के नालंदा ज़िले के इस्लामपुर नगर परिषद क्षेत्र में स्थित श्री सुभाष उच्च +2 विद्यालय, इस्लामपुर का मैदान एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि पटना उच्च न्यायालय एवं मुख्य सचिव, बिहार सरकार के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए विद्यालय परिसर में दोबारा डिज़नीलैंड मेला लगाने की अनुमति दी गई है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव को भेजे गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2022 में इसी विद्यालय के मैदान में डिज़नीलैंड लगाए जाने पर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। उस समय अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा द्वारा विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई करते हुए डिज़नीलैंड हटवाया गया था। यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के आदेश एवं तत्कालीन मुख्य सचिव (श्री अंजनी कुमार सिंह, IAS) के निर्देश के आलोक में की गई थी।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब 2022 में डिज़नीलैंड को अवैध मानते हुए हटाया गया था, जब हाईकोर्ट में डिज़नीलैंड मालिक की याचिका खारिज हो चुकी है, जब विद्यालय परिसर के व्यावसायिक उपयोग को स्पष्ट रूप से अनुचित बताया गया है तो 2025 में उसी स्थान पर डिज़नीलैंड लगाने के लिए NOC और लाइसेंस की अनुशंसा किस आधार पर की गई?
पत्र में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी, हिलसा द्वारा नियम-कानून से हटकर डिज़नीलैंड के लिए NOC एवं लाइसेंस की अनुशंसा की गई, जो सीधे तौर पर उच्च न्यायालय और राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मैदान सिर्फ एक विद्यालय का हिस्सा नहीं, बल्कि इस्लामपुर शहर के हजारों लोगों के लिए एकमात्र खुला सार्वजनिक स्थान है। बच्चे यहां खेलते हैं। बुज़ुर्ग सुबह-शाम टहलते हैं। महिलाएं योग और व्यायाम करती हैं। पुलिस, सेना, रेलवे और अन्य विभागों की तैयारी करने वाले युवा दौड़ और अभ्यास करते हैं ऐसे में भारी झूले, मशीनें और भीड़भाड़ से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक अधिकारी अपने कार्यकाल में नियमों का पालन कर डिज़नीलैंड हटाता है, जबकि दूसरा अधिकारी उसी पद पर रहते हुए उन्हीं नियमों का उल्लंघन कर अनुमति दे देता है। इससे न केवल प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि जनता के बीच सुशासन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
इस्लामपुर की जनता ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। तत्काल प्रभाव से विद्यालय मैदान से डिज़नीलैंड हटाया जाए। भविष्य में विद्यालय परिसरों के व्यावसायिक उपयोग पर पूर्ण रोक सुनिश्चित की जाए।
इस पत्र की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी नालंदा, उप विकास आयुक्त नालंदा, पुलिस अधीक्षक नालंदा, जिला शिक्षा पदाधिकारी नालंदा, अनुमंडल पदाधिकारी हिलसाको भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या हाईकोर्ट के आदेशों की गरिमा बहाल होगी या फिर सवाल यूँ ही हवा में तैरते रहेंगे।






