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    Monday, July 22, 2024
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      Chitragupta Puja 2022 : भगवान यम के सहयोगी चित्रगुप्त जी की पूजा का महत्व और पूजन विधि

      एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क। हर साल भाई दूज के मौके पर चित्रगुप्त पूजा का मनाया जाता है। सनातन धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार मृत्यु के देवता भगवान यम के सहयोगी चित्रगुप्त को सभी मनुष्यों के कर्मों के हिसाब के रक्षक के रूप में जाना जाता है।

      मान्यता है कि चित्रगुप्त मनुष्यों के सभी पापों और गुणों का रिकॉर्ड रखते हैं और पाप करने वालों को दंड देते हैं।

      ज्योतिषविदों के अनुसार हर साल भाई दूज के दिन ही चित्रगुप्त पूजा मनाय जाता है। इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष के दूसरे दिन भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। इस बार चित्रगुप्त पूजा 27 अक्टूबर मनाई जाएगी।

      व्यापारियों के लिए विशेष है चित्रगुप्त पूजाः व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह दिन विशेष होता है क्योंकि इस दिन नए बहीखातों पर श्री लिखकर कार्य आरंभ किया जाता है। इसके अतिरिक्त सभी आय-व्यय का ब्योरा चित्रगुप्त जी के सामने रखा जाता है।

      कायस्थ समाज में चित्रगुप्त को आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है। इस दिन लोग चित्रगुप्त जयंती के रूप में मनाते हैं व लेखनी-दवात का पूजन करते हैं। इसी के साथ लोग इस दिन लेखनी से संबंधित कार्यों को भी बंद रखते हैं। चित्रगुप्त पूजन को दवात पूजन के नाम से भी जाना जाता है।

      चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्तः भगवान चित्रगुप्त की पूजा शुक्ल पक्ष द्वितीया 26 अक्टूबर दोपहर 2.42 बजे से से द्वितीया तिथि 27 अक्टूबर, 12.45 है। जो लोग उदय तिथि का पूजन करते हैं वे आज ही चित्रगुप्त की पूजा करेंगे।

      चित्रगुप्त पूजा की विधिः पूजा से पहले साधक भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति की सफाई करते हैं और फिर उसे गुलाब जल से स्नान कराते हैं। फिर देवता के सामने घी का दीया जलाएं और फिर दही, दूध, शहद, चीनी और घी का उपयोग करके पंचमित्र तैयार करें।

      उसके बाद प्रसाद के रूप में मिठाई और फल का भोग लगाएं। पूजा विधि में सिंदूर, अबीर, हल्दी और चंदन के पेस्ट के मिश्रण से जमीन पर स्वास्तिक चिन्ह बनाना बेहद जरूरी है।

      स्वास्तिक पर चावल रखें और उसके ऊपर आधा पानी भरा कलश रख लें। अब गुड़ और अदरक को मिलाकर गुराड़ी बना लें। फिर चित्रगुप्त कथा का पाठ करें। कथा के बाद आरती करें। फिर मूर्ति पर फूल और चावल छिड़कें।

      चित्रगुप्त पूजा की क्या है मान्यताः भक्तों का मानना ​​है कि चित्रगुप्त की पूजा करने से उन्हें उनका आशीर्वाद मिलता है। साथ ही उनकी रिकॉर्ड बुक में उनके बुरे कर्मों के प्रभाव को दूर होने का वरदान मिलता है।

      हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार चित्रगुप्त तय करते हैं कि किसी विशेष आत्मा को मोक्ष का पुरस्कार दिया जाना चाहिए या उसके बुरे कर्मों की सजा देनी चाहिए।

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