
पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। पूर्वोत्तर भारत के हरे-भरे इलाकों में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक ने नई ऊर्जा भरी है। औषधीय एवं सुगंधित पौधों तथा पान पर आधारित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP-MAP&B) की 33वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन 20 से 22 जनवरी तक कृषि महाविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) पासीघाट में हुआ।
इस बैठक में देशभर के वैज्ञानिकों ने न केवल अपने शोध साझा किए, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान भी बांटे गए। सबसे खास बात रही BRC इस्लामपुर को सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार और डॉ. शिवनाथ दास को सर्वश्रेष्ठ AICRP वैज्ञानिक पुरस्कार से नवाजा जाना।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत में औषधीय पौधों की खेती को किसानों की आय दोगुनी करने के एक मजबूत माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। पासीघाट के शांत और हरियाली से भरे परिसर में तीन दिनों तक चली इस कार्यशाला में अनुसंधान, नवाचार और भविष्य की योजनाओं पर गहन चर्चा हुई।
बैठक के दौरान फसल सुधार, उत्पादन, संरक्षण और फाइटोकेमिस्ट्री जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जहां वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोगों के नतीजे पेश किए। इन चर्चाओं से 2026-27 के लिए नए अनुसंधान कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया, जो किसानों को सीधे लाभ पहुंचा सकते हैं।
सम्मान की चमक और उत्कृष्टता की कहानी: बैठक का एक प्रमुख आकर्षण रहा पुरस्कार वितरण। BRC इस्लामपुर, जो पान और औषधीय पौधों पर केंद्रित अनुसंधान में अग्रणी है, को अनुसंधान की गुणवत्ता, तकनीकी उपलब्धियों और परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह केंद्र बिहार के इस्लामपुर में स्थित है और यहां के वैज्ञानिकों ने पान की नई किस्मों और सुगंधित पौधों की खेती में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, डॉ. शिवनाथ दास, जो इसी केंद्र से जुड़े हैं, को उनके उल्लेखनीय वैज्ञानिक योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ AICRP वैज्ञानिक पुरस्कार मिला। डॉ. दास ने औषधीय पौधों की जैविक खेती और रोग प्रबंधन पर कई नवाचारी शोध किए हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
डॉ. दास ने सम्मान ग्रहण करते हुए कहा कि यह पुरस्कार मेरे लिए नहीं, बल्कि उन किसानों के लिए है जो इन पौधों की खेती से अपनी जिंदगी बदल रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि औषधीय खेती को हर गांव तक पहुंचाया जाए।
BRC इस्लामपुर के निदेशक ने भी इस उपलब्धि को टीम वर्क का नतीजा बताते हुए कहा कि यह सम्मान केंद्र को और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा।
उद्घाटन में राजनीति और विज्ञान का संगम: बैठक का उद्घाटन समारोह बेहद भव्य रहा। मुख्य अतिथि के रूप में अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री निनोंग एरिंग उपस्थित थे।
उन्होंने अपने संबोधन में जोर दिया कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती पूर्वोत्तर राज्यों में किसानों की आय बढ़ाने का सुनहरा अवसर है। अनुसंधान संस्थानों को ऐसी तकनीकें विकसित करनी चाहिए जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह खेती न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी।
विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडे ने AICRP-MAP&B की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश में औषधीय फसलों के क्षेत्र को मजबूत कर रही है। भविष्य में ये फसलें फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण होंगी। डॉ. पांडे ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखकर शोध करें।
नई शुरुआतें और प्रकाशन: बैठक में अतिथियों ने पांच तकनीकी बुलेटिन और AICRP-MAP&B की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया। इन दस्तावेजों में नई किस्मों, उत्पादन तकनीकों और अनुसंधान निष्कर्षों का विस्तृत विवरण है। उदाहरण के लिए एक बुलेटिन में पान की रोग प्रतिरोधी किस्मों पर फोकस है, जबकि दूसरा सुगंधित पौधों जैसे तुलसी और लेमनग्रास की जैविक खेती पर। ये प्रकाशन किसानों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी संसाधन साबित होंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता: इस कार्यशाला में देशभर से 120 से अधिक वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और प्रतिभागी शामिल हुए। ICAR-डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स रिसर्च, आनंद के निदेशक डॉ. मनीष दास, जो परियोजना समन्वयक भी हैं, उन्होंने बैठक की अध्यक्षता की।
उनके अलावा केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल के निदेशक (अनुसंधान) डॉ. एल. एम. गरनायक, CAU के कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री के डीन डॉ. वांगचू और पासीघाट कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. संजय स्वामी जैसे प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। मीडिया प्रतिनिधियों ने भी इस आयोजन को कवर किया, जिससे अनुसंधान की पहुंच आम जन तक बढ़ी।
यह बैठक न केवल वैज्ञानिकों के बीच समन्वय बढ़ाने में सफल रही, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाई। औषधीय पौधों की खेती से जुड़े किसान अब इन नई तकनीकों का लाभ उठा सकते हैं, जो उनकी आय को बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी मजबूत करेंगी। AICRP-MAP&B जैसी परियोजनाएं साबित कर रही हैं कि विज्ञान और कृषि का मेल देश की प्रगति का आधार है।
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