पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के जमीन मालिकों और भूमि विवादों में फंसे लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए अंचल कार्यालयों में वर्षों से चली आ रही मनमानी पर सख्ती से लगाम लगाने का फैसला किया है।
इस आदेश के तहत अब समान केस में समान फैसला को अनिवार्य कर दिया गया है। यानी यदि दो मामलों की प्रकृति एक जैसी है तो उन पर निर्णय भी एक जैसा ही होगा। अब यह नहीं चलेगा कि रसूखदार की फाइल तुरंत निपट जाए और आम आदमी को नियम-कानून दिखाकर लौटा दिया जाए।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव सी.के. अनिल ने राज्य के सभी राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े हर निर्णय में संविधान के अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता) का पालन अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर “पिक एंड चूज” की नीति अपनाने या चेहरा देखकर फैसला देने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नया नियम के अऩुसार बिना ठोस और वैधानिक कारण के आवेदन खारिज नहीं किए जा सकेंगे। अतिक्रमण को लेकर गरीब की झोपड़ी हटे और प्रभावशाली का निर्माण बचा रहे, अब ऐसा नहीं होगा। जमाबंदी व रसीद में गड़बड़ी और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी। भूमि विवाद में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
सरकार ने स्वीकार किया है कि कई मामलों में दबाव या प्रभाव में आकर अलग-अलग फैसले दिए जाते हैं। विधिक जानकारी के अभाव में गलत आदेश पारित हो जाते हैं। चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की जाती है।
इन प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। इससे इंसाफ के लिए सालों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अमीरों और दबंगों की ‘सेटिंग’ पर रोक लगेगी। राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
इस आदेश के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और पक्षपात पर लगाम लगेगी। जमीन से जुड़े मामलों में यह फैसला आम लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है।



