
पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधानसभा में घोषणा की कि टीआरई-4 के तहत 45 हजार विभिन्न विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार पहले गणित, भौतिकी और रसायनशास्त्र जैसे प्रमुख विषयों में शिक्षकों की कमी को दूर करेगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर शिक्षकों की भी बहाली की जाएगी।
यह घोषणा सहरसा के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में की गई। विधायक ने कक्षा 6 से 10 तक के सभी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई थी। मंत्री ने स्वीकार किया कि डिजिटल शिक्षा के विस्तार के लिए कंप्यूटर शिक्षकों की आवश्यकता है और इसे प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।
विषयवार शिक्षक-छात्र अनुपात की होगी जांचः शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे अपने-अपने जिलों में स्कूलों में विषयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की समीक्षा करें। जहां जिस विषय में शिक्षकों की कमी होगी, वहां उसी आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता और वास्तविक जरूरत के अनुरूप पदस्थापन संभव होगा।
टीआरई में 10% ईडब्लूएस आरक्षणः बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी के प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि टीआरई में ईडब्लूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि ग्रेस मार्क्स को लेकर कोई न्यायालयीय आदेश या संवैधानिक प्रावधान सामने आता है तो सरकार उसका अध्ययन कर आवश्यक निर्णय लेगी। विधायक ने यह मुद्दा उठाया था कि एसटीईटी परीक्षा में सवर्ण अभ्यर्थी ईडब्लूएस लाभ से वंचित हो रहे हैं।
दो माह में सेनेटरी वेंडिंग मशीनः राज्य के स्कूलों में महावारी स्वच्छता प्रबंधन को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अगले दो महीनों के भीतर अधिकांश स्कूलों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन स्थापित कर दी जाएंगी। शेष स्कूलों में यह कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा।
उन्होंने बताया कि फिलहाल 419 स्कूलों में वेंडिंग मशीनें लग चुकी हैं। कैबिनेट ने इस योजना के लिए 40 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जो बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल को प्रदान की गई है।
यह जानकारी गयघाट की विधायक कोमल सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में दी गई। विधायक ने माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों में सेनेटरी वेंडिंग मशीन और भस्मक (इनसिनिरेटर) की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया था।
आपदा प्रबंधन कोर्स और विश्वविद्यालयः विभूतिपुर के विधायक अजय कुमार के प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य के स्कूलों के पाठ्यक्रम में आपदा प्रबंधन विषय पहले से शामिल है और इसकी पढ़ाई भी हो रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान हैं और उनका नियंत्रण राज्यपाल के माध्यम से होता है। यदि नेट परीक्षा में आपदा प्रबंधन विषय शामिल है, तो राज्य सरकार विश्वविद्यालयों को इस विषय में कोर्स प्रारंभ करने का सुझाव देगी।
शिक्षा सुधार की दिशा में संकेतः विधानसभा में हुई इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि राज्य सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्राओं के स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में सक्रिय है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोषित योजनाओं को जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाता है। स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट







