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    Sunday, February 25, 2024
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      गवर्नर के एटम बम की एंट्री के बाद फिर विस्फोटक हुई झारखंड की सियासत

      एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क। झारखंड की सियासत में कई रूप देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग ने राज्यपाल को क्या मंतव्य दिया है वह पिछले दो महीने से लिफाफे में बंद है।

      चुनाव आयोग ने राज्यपाल को भेजे लिफ़ाफ़े में क्या सिफारिश की है, यह या तो राज्यपाल को पता है या फिर चुनाव आयोग को, लेकिन झारखंड की सियासी फिजा इस मामले को लेकर नित नये रंग ले रही है।

      इस बीच राज्यपाल ने चुनाव आयोग से दोबारा मंतव्य लेने की बात कह शरद ऋतु में सूबे की सियासत में एक बार फिर से गर्मी पैदा कर दी है।

      इतना ही नहीं राज्यपाल का यह बयान कि झारखंड में पटाखा बैन नहीं है और एक आध एटम बम फूट सकते हैं, राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

      गौर करनेवाली बात यह है कि राज्यपाल कहते हैं कि एक आध एटम बम फूट सकता है तो वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कत्ल होने का अंदेशा सता रहा है।

      बता दें कि बुधवार को रायपुर में राज्यपाल रमेश बैस ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि दिल्ली में पटाखा बैन है, झारखंड में नहीं।

      इससे पहले राज्यपाल ने कहा था कि आयोग का लिफाफा इतनी मजबूती से चिपका है कि वह खुल ही नहीं रहा। हेमंत सोरेन ने भी राज्यपाल से मुलाकात की थी और जल्द फैसला सुनाने का आग्रह किया था।

      बाद में सीएम ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अगर वे दोषी हैं, तो सजा दी जाये। पर, बगैर सजा सुनाये ही उन्हें सजा दी जा रही है। राज्यपाल ने कहा कि जबतक वे संतुष्ट नहीं हो जाते, तबतक किसी तरह का आर्डर करना ठीक नहीं है।

      उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से सेकेंड ओपिनियन आने के बाद तय करेंगे कि आगे क्या करना है। हेमंत सोरेन के मसले पर फैसला लेना मेरे अधिकार क्षेत्र में है। इसके लिए कोई मुझे बाध्य नहीं कर सकता।

      गौरतलब है कि सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुले मंच से कहा था कि झारखंड में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को क़त्ल करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन वह डरनेवाले नहीं हैं।

      उस समय उन्होंने कहा था कि वह राज्यपाल के हर फैसले के लिए तैयार हैं। बहरहाल राज्यपाल के इस बयान के बाद सूबे की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गरम है।

      राज्यपाल का यह बयान लोकतंत्र के लिए उचित नहीं : नामधारी झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष इन्दर सिंह नामधारी ने कहा कि राज्यपाल का यह बयान लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का इस तरह का बयान अनुचित है।

      उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला दो महिने पहले आया है। अबतक इसमें क्या है यह किसी को पता नहीं। कहा कि राज्यपाल के इस तरह के बयान से सरकार डिमोरलाइज हो जाती है। जनता का काम प्रभावित होता है। सरकार का सारा काम ठप हो जाता है। मुख्यमंत्री की नींद हराम हो जाती है।

      उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल को मिली थी तो उन्हें मुख्यमंत्री को बुला कर इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।

      राज्यपाल के बयान पर कुछ नहीं कहना : सरयू राय विधायक सरयू राय ने कहा कि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं। इनके बयान पर कुछ भी कहना उचित नहीं है। राज्यपाल की मर्यादा को ठेस नहीं पहुंचाया जा सकता। उनका अपना अधिकार है और वह उसी के तहत काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को भी अपना काम करते रहना चाहिए।

      बम-बंदुक का जवाब तीर-धनुष सेः झामुमो झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता तनुज खत्री ने कहा कि राज्यपाल के इस बयान से साफ हो गया कि देश की संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल केंद्र कर रहा है।

      राज्यपाल ने सेकेंड ओपिनियन के लिए भेजा है। एक बार जब चुनाव आयोग ने इस पर अपनी राय दे दी, तो फिर क्यों चुनाव आयोग से राय मांगी गयी? साफ है कि इससे चुनाव आयोग के मंतव्य को बदलने की कोशिश है।

      केंद्र अपना राजनीतिक फायदा देख रहा है जाहिर है कि पहले वाले चुनाव आयोग के मंतव्य में कोई ऐसी बात नहीं होगी क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ऐसी पार्टी है, जो रातों रात सरकार बनाती और बिगाड़ती है।

      अगर चुनाव आयोग के मंतव्य में ऐसा कुछ होता तो भाजपा अब तक चुप नहीं होती। इस मामले में जितना भी ओपिनियन ले लें, जनता ने जो ओपिनियन दिया है वह पांच सालों के लिए दिया है। झारखंड प्राकृतिक रूप से अपनी पहचान रखता है और यहां के लोग तीर-धनुष चलाना जानते हैं। इतिहास गवाह है कई बम का जवाब तीर-धनुष से दिया गया है।

      राजभवन को न बनाया जाये राजनीति का अखाड़ाः कांग्रेस कांग्रेस का पक्ष रखते हुए प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि इस मामले पर अब तक फैसला आ जाना चाहिए था। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के द्वारा बयानबाजी गंभीर मामला है।

      इसमें यही लग रहा है कि फैसले को अपने अनुसार बदलने की कोशिश है। राजभवन को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। एक नहीं राज्यपाल चाहें, तो चुनाव आयोग से दस बार मंतव्य ले लें लेकिन गर्वनर की ओर से बयानबाजी उचित नहीं है।

      झामुमो के नेताओं को माफी मांगनी चाहिए : भाजपा भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले पर झामुमो के नेताओं की बयानबाजी पर सवाल खड़ा करते हुए कह कि उन नेताओं को माफी मांगनी चाहिए, जो राज्यपाल पर आरोप लगा रहे थे।

      भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्यपाल के बयान पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी राजनीतिक दल को नहीं है। मैं भी उनके बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा बार-बार राज्यपाल पर आरोप लगा रहा था, लेकिन राज्यपाल ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत से एक कदम आगे बढ़ कर चुनाव आयोग से दोबारा मंतव्य मांगा है। राज्यपाल पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगानेवाले नेताओं को माफी मांगनी चाहिए। इससे ज्यादा पारदर्शी तरीका और क्या हो सकता है।

      मुख्यमंत्री ने पहले ही कहा, जल्द करें फैसलाः इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति लंबे समय से गर्म है, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मामले जल्द फैसला सुनाने की मांग करते हुए पहले ही कहा था कि देश की यह पहली घटना है, जब सजा सुनने वाला राज्यपाल से गुहार लगा रहा है कि मेरी सजा तो बताओ। अगर मैं असंवैधानिक तरीके से मुख्यमंत्री पद पर बैठा हूं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। केंद्र सरकार मेरे खिलाफ अपनी असीम ताकत का दुरुपयोग कर रही है। आसमान को जमीन से मिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

      हेमंत सोरेन की सदस्यता से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रमः

      • 11 फरवरी – राज्यपाल रमेश बैस से भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पत्थर खनन लीज लेने संबंधी दस्तावेज सौंपे। कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल ने चुनाव आयोग से मंतव्य मांगा।
      • 2 मई – चुनाव आयोग ने विशेष दूत के जरिए मुख्यमंत्री आवास पर नोटिस सौंपा। पूछा गया कि क्यों नहीं उनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार देने की कार्रवाई की जाये। आयोग ने 10 मई तक पक्ष रखने का निर्देश दिया।
      • 9 मई – मुख्यमंत्री ने मां की बीमारी और हैदराबाद में इलाज की जानकारी देकर अतिरिक्त समय मांगा। आयोग ने 10 दिनों का वक्त दिया।
      • 20 मई – हेमंत सोरेन का जवाब, रांची के अनगड़ा मौजा में 88 डिसमिल जमीन की माइनिंग लीज 17 मई 2008 को दस साल के लिए दिया गया था। वर्ष 2018 में उन्होंने नवीकरण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन आवेदन अस्वीकृत हो गया। वर्ष 2021 में नए सिरे से माइनिंग लीज के लिए आवेदन मांगा। नियमों का पालन करते हुए माइनिंग लीज दी गयी। खनन करने की अनुमति (सीओटी) नहीं मिलने पर उन्होंने बगैर खोदाई किए लीज सरेंडर कर दिया। उनके पास कोई माइनिंग लीज नहीं है। जब उनसे आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा तो उनके पास कोई खनन लीज नहीं था।
      • 14 जून – मां की बीमारी और राज्यसभा चुनाव में व्यस्तता का हवाला देते हुए आयोग से वक्त मांगा, आयोग ने 28 जून का समय दिया।
      • 28 जून – भाजपा की तरफ से पक्ष रखा गया। हेमंत सोरेन को 14 जुलाई का समय दिया गया।
      • 14 जुलाई – आयोग के समक्ष हेमंत सोरेन के वकील ने पक्ष रखा। आयोग ने सुनवाई 5 अगस्त के लिए स्थगित कर दी।
      • 12 अगस्त : दोनों पक्षों की तरफ से बहस पूरी होने के बाद आयोग ने सुनवाई समाप्त की। दोनों पक्ष से 18 अगस्त तक लिखित जवाब देने को कहा।
      • 25 अगस्त : चुनाव आयोग ने विशेष दूत के माध्यम से राज्यपाल को मंतव्य भेजा।
      • 29 अगस्त : विधायकों को एकजुट रखने की कवायद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधायकों के साथ खूंटी के लतरातू डैम पहुंचे।
      • 30 अगस्त : सत्ताधारी गठबंधन के अधिकांश विधायक विशेष विमान से रायपुर गए और वहां पंचसितारा रिसार्ट में ठहरे।
      • 1 सितंबर : यूपीए का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राज्यपाल से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। राज्यपाल ने कहा कि वे जल्द स्पष्ट करेंगे।
      • 2 सितंबर : राज्यपाल का दिल्ली प्रवास।
      • 5 सितंबर : विधानसभा के विशेष सत्र में हेमंत सरकार ने हासिल किया विश्वास मत।
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