गुमला-लातेहार में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: लेखापाल-अमीन रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

एसीबी की दो टीमों ने गुमला और लातेहार में जाल बिछाकर सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा, शिकायतकर्ता की सतर्कता से सफल हुई कार्रवाई

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए गुमला और लातेहार जिलों में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। एसीबी की दो अलग-अलग टीमों ने छापेमारी कर लघु सिंचाई प्रमंडल के लेखापाल और अंचल कार्यालय के अनुबंध अमीन को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों में भय का माहौल देखा जा रहा है।

गुमला में 20 हजार रुपये लेते लेखापाल गिरफ्तारः एसीबी की 20 सदस्यीय टीम ने गुमला के लघु सिंचाई प्रमंडल (एमआई) में कार्यरत लेखापाल राहुल प्रताप के खिलाफ यह कार्रवाई की। एसीबी को सूचना मिली थी कि लेखापाल राहुल प्रताप एक ठेकेदार से बिल पास करने और भुगतान प्रक्रिया में सहयोग करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं।

सूचना की सत्यता की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। रविवार को जैसे ही लेखापाल ने अपने सरकारी आवास, जो कार्यालय परिसर में ही स्थित है, वहां ठेकेदार से 20 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए, एसीबी की टीम ने तुरंत छापा मारकर उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम ने मौके पर ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

लातेहार के गारू अंचल में अमीन सात हजार रुपये लेते पकड़ा गयाः वहीं दूसरी ओर एसीबी पलामू की टीम ने लातेहार जिले के गारू अंचल कार्यालय में अनुबंध पर कार्यरत अमीन मुनिदेव सिंह को सात हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गारू प्रखंड के धांगरटोला निवासी विशाल कुमार ने अपनी मां चंपा देवी की जमीन की ऑफलाइन रसीद को ऑनलाइन कराने के लिए आवेदन दिया था। लेकिन इस कार्य के बदले अमीन मुनिदेव सिंह ने उनसे 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।

बाद में दोनों पक्षों के बीच सात हजार रुपये में रिश्वत की राशि तय हुई। विशाल कुमार ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत एसीबी से की। एसीबी ने शिकायत की जांच की, जो सत्य पायी गई। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही अमीन ने अंचल कार्यालय में सात हजार रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए, उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

शिकायतकर्ता की सतर्कता से सफल हुई कार्रवाईः एसीबी अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं की जागरूकता और साहस की वजह से यह कार्रवाई संभव हो सकी। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो उसकी शिकायत एसीबी से करें। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

विभागों में मचा हड़कंप, बढ़ेगी जांच का दायराः दो अलग-अलग जिलों में एक ही दिन हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, एसीबी अब इन दोनों आरोपियों की संपत्ति, बैंक खातों और अन्य लेनदेन की भी जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भ्रष्टाचार का नेटवर्क कितना बड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एसीबी की लगातार कार्रवाई से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी का अभियान जारीः झारखंड में एसीबी लगातार भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अभियान चला रही है। हाल के महीनों में कई सरकारी कर्मियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। एसीबी का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

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