झारखंड में बढ़ती गर्मी का असर: स्कूलों के समय में बड़ा बदलाव

21 अप्रैल 2026 से लागू आदेश। K.G. से 8वीं तक 11:30 बजे और 9वीं से 12वीं तक 12 बजे तक ही कक्षाएं। विशेषज्ञों ने बताया जरूरी, लेकिन अस्थायी समाधान...

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव जैसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी आदेश (संख्या-02/वि.1-03/2024…4744) के अनुसार अब राज्य के सभी सरकारी, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) और निजी विद्यालयों में कक्षाओं का समय घटा दिया गया है। यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।

नए निर्देश के तहत K.G. से 8वीं तक की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक, जबकि 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक संचालित होंगी। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी दोपहर 1:00 बजे तक विद्यालय में रहकर गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करेंगे।

क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला? झारखंड समेत पूर्वी भारत के कई हिस्सों में इस समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही इस तरह की गर्मी सामान्य से अधिक है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे बच्चों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकान का खतरा ज्यादा होता है। स्कूलों में पर्याप्त ठंडा वातावरण, पीने के पानी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी इस जोखिम को बढ़ा देती है।

शिक्षा पर क्या पड़ेगा असर? समय में कटौती का सीधा असर पढ़ाई के घंटों पर पड़ेगा। हालांकि शिक्षा विभाग का मानना है कि यह सुरक्षा पहले की नीति के तहत लिया गया निर्णय है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कम समय में पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा। शिक्षकों को पाठ्यक्रम तेजी से पूरा करना होगा। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में कटौती हो सकती है। लेकिन इसके सकारात्मक पहलू भी हैं कि सुबह के समय बच्चों की एकाग्रता अधिक रहती है, जिससे कम समय में भी प्रभावी पढ़ाई संभव है।

शिक्षकों की भूमिका में बदलावः आदेश के दूसरे बिंदु में यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विद्यालय में रहेंगे। कक्षाओं के बाद वे प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों को पूरा करेंगे।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार स्कूल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और अन्य लंबित कार्यों को पूरा कराने पर भी ध्यान दे रही है।

निजी और अल्पसंख्यक स्कूल भी दायरे में: यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी वर्ग के बच्चों को समान सुरक्षा मिल सके।

अस्थायी समाधान या दीर्घकालिक नीति? विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय तत्काल राहत देने वाला है, लेकिन भविष्य में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षा कैलेंडर और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में स्थायी बदलाव की जरूरत पड़ेगी।

कुछ सुझाव जो सामने आ रहे हैं, उनमें स्कूलों में कूलिंग सिस्टम और हरित परिसर, समर टाइम टेबल को स्थायी रूप देना, ऑनलाइन हाइब्रिड क्लास का विकल्प, गर्मी के महीनों में लंबी छुट्टियां  शामिल हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

संबंधित खबरें

ताजा खबरें

सर्वजन खबरें