
रांची/चतरा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया स्थित करमटांड़ के पत्थरपनिया जंगल में हुए भीषण एयर एंबुलेंस हादसा ने अब एक नया रहस्य खड़ा कर दिया है। दुर्घटनाग्रस्त विमान के दो इंजनों में से एक इंजन अब तक नहीं मिल सका है।कई घंटे तक लगातार ड्रोन से पूरे जंगल, पहाड़ी ढलानों और तराई क्षेत्रों की सघन तलाशी ली गई, लेकिन इंजन का कोई सुराग नहीं मिला। इससे हादसे की जांच और भी जटिल हो गई है और विशेषज्ञ अब कई संभावित पहलुओं पर विचार कर रहे हैं।
हादसे में सात लोगों की दर्दनाक मौतः गौरतलब है कि सोमवार शाम रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुई एयर एंबुलेंस पत्थरपनिया जंगल में क्रैश हो गई थी। इस भयावह दुर्घटना में विमान में सवार पायलट, को-पायलट, डॉक्टर और अन्य कर्मियों सहित कुल सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि विमान के कई हिस्से दूर-दूर तक बिखर गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के समय जोरदार धमाका हुआ और विमान के टुकड़े पेड़ों से टकराते हुए कई दिशाओं में फैल गए। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और प्रशासन को सूचना दी।
इंजन की तलाश में ड्रोन ऑपरेशन भी विफलः जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विमान के गायब इंजन की तलाश बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन जैसे भारी उपकरण का पूरी तरह गायब होना सामान्य नहीं है। इसके लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चार घंटे तक लगातार हवाई सर्वेक्षण किया गया।
ड्रोन ने जंगल के घने हिस्सों, घाटियों और संभावित गिरावट वाले इलाकों की विस्तृत स्कैनिंग की, लेकिन इंजन का कोई निशान नहीं मिला। इससे जांच टीम के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या इंजन विस्फोट के कारण दूर जा गिरा या फिर जमीन के भीतर धंस गया?
एएआईबी और डीजीसीए की टीमें कर रही गहन जांचः एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की पांच सदस्यीय विशेष टीम ने बुधवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर करीब तीन घंटे तक गहन जांच की। इस दौरान टीम ने विमान के मलबे का बारीकी से निरीक्षण किया।
पेड़ों और जमीन पर पड़े प्रभाव के निशानों का अध्ययन किया। दुर्घटना स्थल की भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण किया। स्थानीय ग्रामीणों से घटना के समय की परिस्थितियों की जानकारी ली।
दिल्ली से आई इस टीम का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी रमेश कुमार कर रहे थे। टीम ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिन्हें आगे विश्लेषण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। इससे पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है।
रेडबर्ड कंपनी की टीम ने शुरू किया मलबा संग्रहः एयर एंबुलेंस का संचालन करने वाली रेडबर्ड कंपनी की तकनीकी टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। कंपनी के इंजीनियर और तकनीशियन मलबे को सावधानीपूर्वक एकत्र कर रहे हैं।
विमान के बड़े हिस्सों को गैस कटर से छोटे टुकड़ों में काटकर ट्रैक्टर के माध्यम से सिमरिया लाया जा रहा है। वहां से इन्हें कंटेनर में लोड कर दिल्ली भेजा जाएगा, जहां फॉरेंसिक और तकनीकी जांच होगी। पूरा मलबा दिल्ली भेजे जाने की संभावना है।
जांच में सामने आ सकते हैं कई तकनीकी पहलूः विशेषज्ञों का मानना है कि गायब इंजन इस हादसे की असली वजह का महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकता है। इंजन की स्थिति से यह पता लगाया जा सकता है कि क्या उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी हुई थी। क्या इंजन में विस्फोट हुआ था या मौसम और अन्य परिस्थितियों का प्रभाव था। जब तक इंजन नहीं मिलता, जांच अधूरी मानी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्टः हादसे के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन लगातार घटनास्थल की निगरानी कर रहे हैं। आसपास के गांवों में भी इंजन या अन्य मलबे के टुकड़ों की तलाश की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि हादसे की असली वजह का खुलासा विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल गायब इंजन ने इस दुर्घटना को और रहस्यमय बना दिया है। स्रोतः मुकेश भारतीय/मीडिया रिपोर्ट







