
पटना/बक्सर (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में बीते 24 घंटों में सामने आई दो घटनाएं एक कानून विश्वविद्यालय के छात्र की आत्महत्या और दूसरी शादी के मंडप में दुल्हन पर गोली रिश्तों में टूटते भरोसे, अस्वीकृति को स्वीकार न कर पाने और भावनात्मक प्रबंधन की गंभीर कमी की ओर इशारा करती हैं।
पुलिस के प्रारंभिक तथ्यों और प्रत्यक्षदर्शी विवरणों के आधार पर यह रिपोर्ट घटनाक्रम, सत्यापित तथ्यों और उनके सामाजिक–मनोवैज्ञानिक निहितार्थों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
कानून विवि में मौत भरोसे के टूटने का ट्रैजिक अंतः चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के एलएलएम अंतिम वर्ष के छात्र मयंक राज (निवासी: खलारी, रांची) हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटके मिले। वह डॉ. राजेंद्र प्रसाद बॉयज हॉस्टल, कमरा संख्या 103 में रहते थे।
पुलिस के अनुसार कमरे से मिला सुसाइड नोट जब्त कर फॉरेंसिक जांच को भेजा गया है। नोट में एक युवती से दोस्ती, भरोसा, कथित धोखा और विवाद का उल्लेख है। मयंक के पिता कोल इंडिया में अधिकारी हैं।
अहले सुबह वह रोज़मर्रा की तरह चाय-नाश्ता करने के बाद कमरे में लौटे। दोपहर में मेस न पहुँचने पर साथियों ने दरवाज़ा खटखटाया, जवाब न मिलने पर खिड़की से झाँका गया, तब घटना का पता चला। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने सुसाइड नोट में उल्लेखित युवती और मयंक के एक मित्र से पूछताछ की है।
तथ्य सत्यापन स्थिति: मृत्यु का कारण आत्महत्या बताया गया है। सुसाइड नोट की भाषा और संदर्भ की पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही निर्णायक होगी। किसी तीसरे पक्ष की आपराधिक भूमिका पर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं है।
बक्सर के चौसा में शादी का मंडप बना अपराध स्थल, दुल्हन को मारी गोली
बक्सर जिले के चौसा बाजार में बीती रात वरमाला के दौरान 18 वर्षीय दुल्हन आरती कुमारी को गोली मार दी गई। गोली पेट में लगी। उन्हें वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार आरोपी युवक दुल्हन का पड़ोसी है और एकतरफा प्रेम करता था। घटना के समय दूल्हा–दुल्हन मंच पर थे, तभी नकाब पहने युवक ने फायरिंग की और फरार हो गया। अफरातफरी मच गई, बारात बिना शादी लौट गई।
एसपी ने बताया कि पीड़िता का बयान लिया गया है और तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। आरोपी की पहचान और मंशा पर पुलिस जांच जारी है। गिरफ्तारी और चार्जशीट के बाद ही कानूनी निष्कर्ष स्पष्ट होंगे।
रिश्तों में ‘अस्वीकृति सहनशीलता’ के संकट का नया एंगलः
इन दोनों घटनाओं को जोड़ता सूत्र अस्वीकृति और भावनात्मक नियमन की विफलता है। पहली घटना में आंतरिक टूटन ने आत्मघाती निर्णय तक पहुँचाया। दूसरी में बाहरी आक्रामकता ने निर्दोष जीवन को निशाना बनाया। दोनों ही स्थितियों में समस्या प्रेम नहीं, बल्कि प्रेम के टूटने को संभालने की क्षमता का अभाव दिखता है।
स्ट्रेन थ्योरी कहती है कि जब अपेक्षाएँ (रिश्ता, मान्यता) पूरी नहीं होतीं, तो मानसिक दबाव बढ़ता है। यह दबाव कुछ में आत्म-हानि और कुछ में दूसरों पर हिंसा में बदल सकता है।
अटैचमेंट थ्योरी बताती है कि असुरक्षित लगाव वाले व्यक्तियों में ब्रेकअप या अस्वीकृति पर अतिवादी प्रतिक्रियाएँ अधिक देखी जाती हैं।
सोशल लर्निंग थ्योरी स्पष्ट करती है कि अस्वीकृति को ‘अपमान’ मानने वाली सामाजिक सीख हिंसा को वैध ठहराने का जोखिम बढ़ाती है।
विशेषज्ञ करते हैं कि यहां कैंपस और समुदाय की भूमिका यहां अहम हैं। विश्वविद्यालयों में मेंटल हेल्थ सपोर्ट, काउंसलिंग और क्राइसिस इंटरवेंशन की उपलब्धता और समुदाय में शिकायत निवारण व सुरक्षा निर्णायक हो सकते हैं।
क्या बदला जाना चाहिए? कैंपस स्तर पर अनिवार्य काउंसलिंग, गोपनीय हेल्पलाइन, साथी-छात्र प्रशिक्षण। कानूनी-प्रशासनिक स्तर पर स्टॉकिंग / धमकी पर त्वरित कार्रवाई, हथियार नियंत्रण और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा। सामाजिक स्तर पर अस्वीकृति को सामान्य मानने, उससे उबरने की संस्कृति और ‘ना’ को स्वीकार करने की शिक्षा।
बहरहाल, पटना से बक्सर तक की ये घटनाएँ चेतावनी हैं कि रिश्तों की विफलता को हिंसा या आत्म-हानि में बदलने से रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य, कानून और सामाजिक संवेदनशीलता तीनों का साथ चलना जरूरी है। जांच के अंतिम निष्कर्षों का इंतज़ार रहेगा, लेकिन रोकथाम के कदम अभी से उठाने होंगे। स्रोतः मुकेश भारतीय/मीडिया रिपोर्ट







