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पटना में नकली दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़, ‘विभा बायोटेक’ के नाम पर चल रहा था मौत का कारोबार

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार की राजधानी पटना से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औषधि नियंत्रण प्रशासन (Drug Control Administration) ने नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र के शिवाजी चौक इलाके में संचालित एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है।

विभा बायोटेक के नाम से चल रही यह फैक्ट्री लंबे समय से गैस, कफ, बुखार, दर्द और स्किन से जुड़ी बीमारियों की नकली दवाएं तैयार कर पूरे बिहार में सप्लाई कर रही थी।

गुप्त सूचना से हुआ खुलासा

ड्रग इंस्पेक्टरों को लंबे समय से नकली दवाओं की आपूर्ति को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। बाजार में कुछ दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह, मरीजों पर अपेक्षित असर न होना और पैकेजिंग में मामूली गड़बड़ियों जैसी शिकायतों ने विभाग को सतर्क किया। इसी क्रम में औषधि नियंत्रण प्रशासन को एक ठोस गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर पटना में छापेमारी की योजना बनाई गई।

सूचना की सत्यता की पुष्टि के बाद ड्रग इंस्पेक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई। जैसे ही टीम ने शिवाजी चौक इलाके के एक निजी परिसर में दबिश दी तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। यहां किसी आधुनिक फार्मास्युटिकल यूनिट की तरह मशीनें लगी थीं, कच्चा माल रखा था और नामी कंपनियों जैसी दिखने वाली पैकेजिंग में दवाएं तैयार की जा रही थीं।

नामी ब्रांड की नकल

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से जिन दवाओं को जब्त किया गया, उनमें लिव 52 कफ सिरप, इबुजेसिक प्लस सिरप, कॉस्ग्लो न्यू क्रीम सहित कई ऐसी दवाएं शामिल थीं, जो आम तौर पर मरीजों द्वारा बड़े भरोसे के साथ इस्तेमाल की जाती हैं। इन दवाओं के लेबल, रंग, बोतल और पैकेट इतने सटीक तरीके से तैयार किए गए थे कि सामान्य ग्राहक तो क्या, कई दुकानदार भी आसानी से धोखा खा सकते थे।

ड्रग इंस्पेक्टरों के अनुसार इन नकली दवाओं में इस्तेमाल किए जा रहे केमिकल न तो मानक के अनुरूप थे और न ही उनकी गुणवत्ता की कोई जांच की जाती थी। इसका सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता था, जो कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है।

सात से आठ लाख रुपये की बरामदगी

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से भारी मात्रा में तैयार नकली दवाएं, कच्चा माल, पैकेजिंग सामग्री, लेबल, मशीनें और अन्य उपकरण जब्त किए गए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जब्त सामान की कुल कीमत करीब सात से आठ लाख रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर यह फैक्ट्री लंबे समय तक चलती रहती, तो इससे करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार खड़ा हो सकता था।

पूरे बिहार में सप्लाई का नेटवर्क

ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि फैक्ट्री में तैयार की जा रही नकली दवाओं की सप्लाई सिर्फ पटना तक सीमित नहीं थी। इन्हें बिहार के अधिकांश जिलों के दवा बाजारों में भेजा जाता था। छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में, जहां निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, वहां इन नकली दवाओं की खपत ज्यादा थी।

अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क में कई थोक और खुदरा दवा विक्रेता भी शामिल हो सकते हैं, जो जानबूझकर या अनजाने में इन नकली दवाओं की बिक्री कर रहे थे। इस दिशा में अब सप्लाई चेन की गहराई से जांच की जा रही है।

पांच ड्रग इंस्पेक्टरों की संयुक्त कार्रवाई

इस पूरी कार्रवाई में ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, यशवंत झा, नेहा कुमारी, श्रृंखला और स्वेता सिंह की टीम शामिल थी। अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी पूरी तरह से नियोजित और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। मौके पर ही फैक्ट्री को सील कर दिया गया और जब्त दवाओं के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

फैक्ट्री संचालक पर प्राथमिकी

फैक्ट्री के संचालक सुनील कुमार झा के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग संयुक्त रूप से यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह कारोबार कब से चल रहा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे और इसका नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक सुनील कुमार झा पहले भी दवा कारोबार से जुड़ा रहा है, हालांकि अब तक उसके खिलाफ इस तरह की कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई थी। जांच एजेंसियां उसकी संपत्ति और बैंक खातों की भी जांच कर रही हैं।

नकली दवाएं: एक गंभीर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं का कारोबार सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे लोगों की जान से जुड़ा हुआ मामला है। गलत दवा या घटिया गुणवत्ता की दवा लेने से बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकती है। कई मामलों में मरीजों की जान तक जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कफ सिरप, दर्द निवारक और स्किन क्रीम जैसी दवाओं की नकली कॉपी बाजार में जल्दी खप जाती है, क्योंकि इनका उपयोग आम है और लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के भी इन्हें खरीद लेते हैं।

आम लोगों के लिए चेतावनी

औषधि नियंत्रण प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे दवा खरीदते समय सावधानी बरतें। हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें, पैकेजिंग, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर की जांच करें। अगर किसी दवा के असर को लेकर संदेह हो या पैकेट में कोई गड़बड़ी दिखे, तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

आगे भी चलेगा अभियान

ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। विभाग को आशंका है कि राज्य में नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। आने वाले दिनों में पटना समेत अन्य जिलों में भी सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर नकली दवाएं इतनी आसानी से बाजार तक कैसे पहुंच जाती हैं। क्या दवा बाजारों में निगरानी पर्याप्त है? क्या सप्लाई चेन में कहीं न कहीं लापरवाही हो रही है? इन सवालों के जवाब ढूंढना अब प्रशासन के लिए जरूरी हो गया है।

पटना में नकली दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़ निश्चित रूप से औषधि नियंत्रण प्रशासन की बड़ी सफलता है, लेकिन यह भी सच है कि यह समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक आम लोगों की सेहत पर खतरा बना रहेगा।

स्रोत: एक्सपर्ट मीडिया न्यूज के लिए मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

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