रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची जोनल कार्यालय की सुरक्षा को लेकर बेहद कड़ा और अहम अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि वहां कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की होगी।
हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच और आगे की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही केंद्रीय गृह सचिव को निर्देश दिया गया है कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ, बीएसएफ या किसी अन्य अर्द्धसैनिक बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। अदालत ने ईडी परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है।
यह आदेश ईडी अधिकारियों द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत के अंतरिम आदेश के तहत एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 में दर्ज प्राथमिकी की जांच और किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है।
मामले में केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किया गया, जिसे भारत सरकार की ओर से एएसजीआई प्रशांत पल्लव ने स्वीकार किया। इसके अलावा संतोष कुमार को भी निजी प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की अनुमति दी गई।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्यतः प्राथमिकी के शुरुआती चरण में हस्तक्षेप उचित नहीं होता, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ईडी कार्यालय की सुरक्षा सर्वोपरि है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को निर्धारित की गई है।
ईडी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास, सौरव कुमार और शिवम उत्कर्ष ने अदालत को बताया कि रांची जोनल कार्यालय इस समय मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रहा है। ऐसे में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना जांच को प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
ईडी ने यह भी बताया कि संतोष कुमार पर झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में लगभग 23 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है और उनके खिलाफ ईसीआईआर दर्ज है। 12 जनवरी को वे बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान वे आक्रामक हो गए और कथित तौर पर पानी का जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें हल्की चोट आई। इसके बाद ईडी अधिकारियों ने उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया और चिकित्सकीय सलाह भी ली।
ईडी का आरोप है कि इसके बावजूद संतोष कुमार ने झूठी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 15 जनवरी की सुबह भारी पुलिस बल ईडी कार्यालय पहुंच गया। इससे केंद्रीय एजेंसी का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ। संतोष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ईडी अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
ईडी ने हाईकोर्ट से प्राथमिकी रद्द करने की मांग के साथ-साथ वैकल्पिक रूप से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का भी आग्रह किया है। इसके अलावा ईडी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि एयरपोर्ट थाना प्रभारी को संतोष कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि 13 जनवरी को ईडी कार्यालय में सरकारी कार्य में बाधा डालने और साक्ष्य गढ़ने का प्रयास किया गया।
हाईकोर्ट का यह आदेश न केवल ईडी की सुरक्षा को लेकर है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में किसी भी तरह का दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब सबकी निगाहें नौ फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले की आगे की दिशा तय होगी।










