बारिश के लिए मेंढ़क-मेंढ़की की कराई राजशाही शादी, यहाँ 55 साल से चली आ रही है यह अनोखी परंपरा

    बारिश की कामना को लेकर यज्ञ, हवन और टोटके का प्रचलन आम बात है। लेकिन इंद्र देवता को खुश करने के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी कराने की बात सुनकर आप भी चौंक गए होगें

    गढ़वा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड राज्य के गढ़वा जिले के मैराल थानान्तर्गत बाना गांव में मेढ़क-मेढ़की की अनोखी शादी हुई है। यहाँ 50 साल से अधिक समय से मेढ़क-मेढ़की की शादी कराई जा रही है।

    Villagers got married of frogs and frogs for rain this unique tradition has been going on here for 55 years 4मान्यता है कि इससे इंद्रदेव खुश होते हैं और अच्छी बारिश होती है। बीते सोमवार की शाम जब बारात निकली तो लगा कि मानों किसी बड़े घराने के बेटे की बारात जा रही है। लेकिन डोली पर दूल्हा की जगह मेढ़क राजा बैठा हुआ था।

    पूरे रीति रिवाज से संपन्न कराए गए दुल्हा-दुल्हन बने मेढ़क-मेढ़की की शादी की सैकड़ों लोग गवाह बने।

    बारात में शामिल लोगों ने ईश्वर से इस शादी को सफल बनाने की प्रार्थना की। इस मौके पर गांव के बड़ी संख्या में महिला पुरुष ग्रामीण दर्शालु भी मौजूद थे।

    ग्रामीणों के अनुसार वर्षा और सुख समृद्धि के लिए यह अनोखा विवाह वर्ष 1966 से हो रही है।

    अकाल से राहत पाने और गांव के सुख समृद्धि के लिए सबसे पहले साल 1966 में गांव के जमींदार महेश्वर नाथ सिंह ने गांव में मेढ़क-मेढ़की की शादी कराई थी।

    उस शादी के बाद गांव में जमकर वर्षा हुई थी तथा लोगों को अकाल से राहत मिली थी।

    उसके बाद गांव में मेढ़क-मेढ़की की शादी का प्रचलन शुरू हो गया, जो आज तक जारी है। शादी को लेकर गांव के दुर्गा मंडप को आकर्षक रूप में सजाया गया था।

    लड़का और लड़की पक्ष के रूप में ग्रामीण दो भागों में विभक्त थे। पंचायत के वर्तमान मुखिया विजय सिंह के पूर्वज द्वारा शुरू किया गया यह अनूठा प्रयोग आज इंद्रदेव को मनाने का पवित्र माध्यम बन चुका है।

    इस गांव के लोगों के लिए जीविका का मुख्य साधन कृषि है। यहां की कृषि पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर होता है। यही कारण है कि हर साल इस शादी के माध्यम से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

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