रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। हजारीबाग केंद्रीय कारा से फिल्मी अंदाज में फरार हुए तीन सजायाफ्ता कैदियों को पुलिस ने 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। फरारी के बाद लगातार ठिकाने बदलते हुए ये कैदी सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरटी गांव स्थित एक ईंट भट्टा में मजदूरी की आड़ में छिपे हुए थे, जहां से पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
गिरफ्तार किए गए कैदियों की पहचान देवा भुइयां उर्फ देव कुमार, राहुल रजवार और जीतेंद्र रवानी के रूप में हुई है। तीनों धनबाद जिले के निवासी हैं और गंभीर मामलों में सजा काट रहे थे। रविवार को हजारीबाग पुलिस टीम तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रांची होते हुए हजारीबाग पहुंची, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
पुलिस के अनुसार, 30 दिसंबर 2025 की देर रात तीनों कैदियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देते हुए कैदी वार्ड की खिड़की में लगे लोहे के रॉड को हेक्सा ब्लेड से काटा। इसके बाद बेडशीट को फाड़कर रस्सी बनाई और उसी के सहारे जेल की ऊंची चहारदीवारी फांदकर फरार हो गए। घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।
फरार कैदियों की गिरफ्तारी के लिए हजारीबाग एसपी के निर्देश पर तीन विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। तकनीकी संसाधनों की कमी और कैदियों के पास मोबाइल फोन नहीं होने के कारण पुलिस के लिए उनकी लोकेशन ट्रेस करना बड़ी चुनौती साबित हुआ। इसके बावजूद टीमों ने पुराने नेटवर्क, संभावित ठिकानों और श्रमिक क्षेत्रों पर लगातार दबिश दी।
एसपी ने बताया कि पूछताछ में यह भी सामने आया है कि देवा भुइयां और अंकित (एक अन्य मामले में) वर्ष 2021 में भी जेल से फरार होकर महाराष्ट्र चले गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इनका नेटवर्क और रणनीति पहले से तैयार रहती थी। इस बार भी उन्होंने पहचान छिपाकर मजदूरी शुरू कर दी थी।
गिरफ्तारी के बाद तीनों कैदियों की मेडिकल जांच कराई गई, जिसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जेपी केंद्रीय कारा भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी में किसी अंदरूनी मदद या सुरक्षा में चूक की भूमिका तो नहीं रही। इस घटना के बाद जेल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।










