रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज ब्यूरो/मुकेश भारतीय)। झारखंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 2025 को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘क्लीन स्वीप’ का नाम दे दिया। नौकरशाहों की चमचमाती कारों से लेकर शराब की बोतलों के अंधेरे कारोबार तक एसीबी ने ऐसी कार्रवाइयां कीं कि भ्रष्टाचारियों के होश उड़ गए।
अनुमानित 20 से ज्यादा गिरफ्तारियां, दर्जनों छापेमारियां और सैकड़ों करोड़ों के घोटालों का पर्दाफाश यह साल एसीबी के लिए विजय का साल साबित हुआ। लेकिन सवाल वही पुराना कि क्या ये कार्रवाइयां भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ पाएंगी या फिर ये सिर्फ सतह की सफाई हैं?
2025 का सबसे बड़ा धमाका तो शराब घोटाला ही था। एसीबी ने केस नंबर 9/2025 दर्ज कर जांच शुरू की, जो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच गई। अनुमानित 500 करोड़ रुपये का नुकसान यह आंकड़ा ही काफी है भ्रष्टाचार की गहराई बयान करने के लिए।
सस्पेंडेड आईएएस विनय चौबे को रांची एक्साइज घोटाले में गिरफ्तार किया गया। चौबे पर छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ साठगांठ कर नई एक्साइज पॉलिसी बनाने का आरोप लगा, जिससे राज्य की तिजोरी लूटी गई।
एसीबी की पूछताछ में चौबे के ससुराल वालों से भी असमानुपातिक संपत्ति (डीए) मामले में सवाल-जवाब हुए। चौबे की पत्नी ने 75 लाख के फ्लैट की रजिस्ट्री तो करा ली, लेकिन भुगतान का कोई सबूत नहीं मिला। यह खुलासा एसीबी ने किया, जो सीधे गुमराह करने का आरोप लगाता है।
पूर्व एक्साइज आयुक्त अमित कुमार से भी तीखी पूछताछ हुई। कुमार ने दावा किया कि घोटाला उनके कार्यकाल के बाद का है, लेकिन एसीबी को 5 करोड़ रुपये की उगाही का सुराग मिला। व्यापारियों पर शिकंजा कसते हुए, टिंबर मर्चेंट श्रवण जालान के ठिकानों पर 8 दिसंबर को धावा बोला गया।
जांच में पता चला कि उन्होंने 4 करोड़ के फ्लैट के बदले 3 करोड़ नकद दिए। इसी तरह, विनय कुमार सिंह से 5 करोड़ की उगाही के बारे में पूछा गया- ये पैसे कहां खपाए? एसीबी का सवाल था। नावीन पटवारी को भी तलब किया गया।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा गजेंद्र सिंह का था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि अधिकारियों के दबाव में बैंक गारंटियों की वसूली ही नहीं की गई। इस घोटाले ने न सिर्फ शराब नीति पर सवाल उठाए, बल्कि पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया।
एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। 2026 में और बड़े नाम सामने आएंगे।
हजारीबाग वन भूमि घोटाले में एसीबी ने कमाल कर दिखाया। आईएएस विनय चौबे का नाम फिर से आया अवैध कटाई और भूमि हस्तांतरण के इस खेल में। 6 दिसंबर को 8 अभियुक्तों को धर दबोचा गया, जिनके हाथों करोड़ों की सरकारी संपत्ति बर्बाद हुई।
सेवायत भूमि घोटाले में आदिवासी जमीनों का अवैध हस्तांतरण उजागर हुआ, जहां कई स्थानीय अफसरों को नोटिस थमाए गए। वन संरक्षण के नाम पर हो रहा यह फर्जीवाड़ा अब एसीबी की कसौटी पर है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार का काला चेहरा रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज) भूमि घोटाले में दिखा। 22 दिसंबर को झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण पर एसीबी को जांच के सख्त निर्देश दिए।
कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने और दोषियों पर कार्रवाई का आदेश सुनाया। एसीबी ने महज 72 घंटों में प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें साजिश का पूरा खाका बयान किया गया। यह कदम न सिर्फ मरीजों की जमीन बचाएगा, बल्कि अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा।
एसीबी ने निचले स्तर पर भी नजर रखी। जनवरी में रांची, गुमला और बिहार में राजस्व अधिकारी राजेश कुमार के ठिकानों पर छापा। मार्च में बोकारो के गोमिया जोन में ललन कुमार को 15 हजार रिश्वत लेते रेड-हैंडेड पकड़ा गया। जुलाई में कोडरमा की असिस्टेंट रजिस्ट्रार मिताली शर्मा पर शिकंजा।
दिसंबर में लोहरदगा के पंचायत सचिव को 15 हजार और नवाबाजार जोनल अधिकारी शैलेश कुमार को 30 हजार रिश्वत पर गिरफ्तार किया। सरकारी जमीन घोटाले में विजय प्रताप सिंह के नाम पर 7 राज्यों में संपत्ति का खुलासा हुआ। सीबीआई के साथ मिलकर सब-डिविजनल इंस्पेक्टर मनीष सेन पर एफआईआर दर्ज की गई।
एसीबी ने इस साल 15-20 गिरफ्तारियां कीं, दर्जनों छापेमारियां चलाईं और कई मामलों को अदालत में मजबूत साक्ष्यों के साथ पहुंचाया। जून में पूर्व आयुक्त ने एसीबी के खौफ से 1200 पन्नों की सूचनाएं मांगीं।
इन कार्रवाइयों से न सिर्फ आर्थिक नुकसान रुका, बल्कि जनता में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता भी फैली। लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं उच्च अधिकारियों का दबाव और लंबी अदालती प्रक्रिया।




